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Maharajganj News: जमीन के कागजात की जांच में चूक हुई्र तो खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें
Sat, 06 May 2023 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 06 May 2023 12:44 AM IST
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कहीं चौहद्दी में पेच दिखा तो कहीं कब्जा के दौरान पता चला कि पहले भी हो चुका है जमीन का बैनामा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जमीन लेने के पहले प्रपत्रों की पूरी तरह से जांच कर लें, नहीं तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। मुकदमे की तारीख देखने के साथ ही दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी। जालसाज झांसे में लेकर बंजर व सार्वजनिक जमीन को बेचकर रकम बना ले रहे हैं। जमीन लेने के बाद फंसे हुए लोगों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। कोई थाने का चक्कर लगा रहा है तो कोई कोर्ट में तारीख देख रहा है। जमीन के इस कारोबार में करोड़ रुपये का वारा-न्यारा हो जा रहा है, लेकिन गड़बड़ी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
यदि आप जिले में कहीं जमीन खरीदने जा रहे हैं तो जालसाजों से सावधान रहें। जमीन बेचने के दौरान रेट से लेकर कागजी प्रक्रिया में चिकनी चुपड़ी बातें कर अपने जाल में फंसाने वाले बिचौलिए जैसे तैसे जमीन बेचकर किनारे हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में उनका दिमाग लगता है। यदि जमीन खरीदने वाला सीधे तहसील पहुंचे तो वह भी उलझ जाएगा। क्योंकि, वहां भी बिचौलियों की सेटिंग रहती है। खरीदार को वही जानकारी मिलेगी तो बिचौलिए चाहेंगे।
जमीन बिकने के बाद रकम लेकर बिचौलिए ज्यों किनारे होते हैं, परत दर परत खुलने लगती है। यह सबकुछ होने के बाद थाने से लेकर न्यायालय तक चक्कर लगाना पड़ता है। जमीन से जुड़ी कोई पत्रावली तैयार करानी पड़ती है तो बगैर रकम खर्च किए कोई काम नहीं होता है। इस पूरे खेल में जमीन खरीदने वाले ही फंसते हैं। उनके पास कोई चारा भी नहीं होता है। पहले मोटी रकम खर्च कर जमीन खरीदी फिर मुकदमा झेलने में रकम खर्च करना पड़ता है। अधिवक्ताओं की सलाह है कि जमीन खरीदने से पहले सारी जानकारी हासिल कर लें।
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चौहद्दी में झोल कर कई लोगों को कर दिया बैनामा पनियरा क्षेत्र थाना के माधोनगर गांव के रामबचन बताया कि ग्राम सभा कुआंचाप में आराजी नंबर 158 में चकबंदी के पूर्व बैनामा लिया था। काबिज दाखिल भी है। इसमें चौहद्दी नहीं दर्शाया गया है। यह खेल करके फंसा दिया गया है। पक्का मकान भी लोगों ने बना लिया है। एक रकबे में दो लोगों ने बैनामा ले लिया है। 158 नंबर में ही तीन लोगों ने वर्ष 2010 में बैनामा करा लिया। थाने से लेकर कचहरी तक मामला चल रहा है। सभी इसी में परेशान हैं। समस्या दूर नहीं हो रही है।
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एक माह बाद पता चला वहीं जमीन दूसरे ने भी लिया है बैनामा
सदर कोतवाली क्षेत्र की आशा देवी बैकुंठपुर में रहती हैं। सवरेजी में 30 डिस्मिल जमीन वर्ष 2022 में खरीदी। करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए। जमीन पर पिलर भी लग गया। सब कुछ सामान्य रहा। एक माह बाद जमीन पर अचानक एक व्यक्ति पहुंचा और कहने लगा की जमीन उसने बैनामा लिया है। यह सुनकर आशा देवी सन्न रह गईं। रकम खर्च करने के बाद जमीन में पेच फंसने पर उनके परिजन इधर-उधर भटकने लगे। यह मामला तहसील न्यायालय से दीवानी न्यायालय पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपनी दलीलों के जरिये जमीन को अपना बताते हुए जमीन का प्रपत्र दिखा रहे हैं।
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जमीन खरीदा तो शांत रहे, खारिज दाखिल में कर दी आपत्ति
जनवरी 2023 में विनोद कुमार ने शिवनगर में सात डिस्मिल जमीन खरीदा। कब्जा भी कर लिया, लेकिन खारिज दाखिल में पेच फंस गया। एक व्यक्ति ने आपत्ति डाल दी। मामला तहसीलदार न्यायालय में है। विनोद ने बताया कि जमीन खरीदने के दौरान भरोसे पर सौदा किया, लेकिन पेच फंस गया। रकम भी खर्च हुए और अब इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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सीधे-साधे लोग फंस जाते दलालों के चक्कर में
जमीन खरीदने के दौरान सीधे-साधे लोग दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। दलाल जमीन बेचने के दौरान खरीदार को सही जानकारी नहीं देते हैं। खरीदार को बिचौलिए पूरा भरोसा दिलाते हैं कि उन्होंने जांच पड़ताल कर ली है। उनकी चिकनी चुपड़ी बातों में लोग फंस जाते हैं। इस पूरे रैकेट में इतने लोग शामिल होते हैं कि खरीदार यह समझ नहीं पता है कि किसका कौन सा किरदार है। दलाल जमीन मालिक से एग्रीमेंट करा लेते हैं। इसके बाद अपने हिसाब से रकम तय कर जमीन का सौदा करते हैं। जमीन के बारे में गोपनीयता की बात कर खरीदार को फंसा लेते हैं।
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इन बिंदुओं पर दें ध्यान तो नहीं होगी परेशानी
-कोई जमीन कहां पर है। उसका उपयोग क्या है। इसके बारे में जानकारी लें।
-कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। इसके बारे में भी जानकारी कर लें।
-सबसे पहले खसरा खतौनी की जांच कराएं। जमीन खरीदने से पहले 12 साला रिकार्ड की जांच हर हाल में कराएं।
-व्यावसायिक क्षेत्र की जमीन खरीदने के दौरान नियमों के बारे में जानकारी कर लें।
-अगर थोड़ी भी गड़बड़ी हो तो जमीन न खरीदें। व्यावसायिक क्षेत्र में रिहायशी मकान बनाना अवैध होता है।
... प्राॅपर्टी ग्रीन बेल्ट को छिपाकर बेच देते जमीन
जमीन का सौदा करने से पहले पूरी तरह से जांच करें। भू राजस्व विभाग के दस्तावेज खंगालने से सटीक जानकारी मिलेगी। जमीन के खसरा नंबर से पूरी जानकारी मिल जाती है। तहसील में आवेदन कर मुआयना कराएं। पैतृक भूमि से खतौनी के सही नाम की जानकारी हो जाती है। भूमि किस-किस नाम से रही है, 12 साला में पूरा रिकार्ड मिल जाता है। शहर में प्राॅपर्टी डीलरों से ग्रीन बेल्ट को छिपाकर जमीन कई जगहों पर बेच दी है। वहां मकान भी बन गया है। कुछ जमीन बंधक रखने के बाद भी बेच देते हैं। आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती है। ऐसे में वे ठगी का शिकार हो जाते हैं। खतौनी का मुआयना कराने में 12.50 रुपये सरकारी शुल्क जमा होता है। 12 साल के रिकार्ड के लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। भेंट कराई, फोटो काॅपी सहित कुल मिलकर करीब तीन हजार रुपये खर्च हो जाता है।
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फोटो
बगैर जांच-पड़ताल किए किसी भी जमीन को नहीं खरीदना चाहिए। 12 साल व सिलिंग की जांच हर हाल में कराना जरूरी होता है। जमीन लेने के पहले यह देख लें कि कहीं जमीन का अधिग्रहण तो नहीं हुआ है। कम खर्च करने पर सबकुछ जानकारी हो जाती है।
अवनीश नारायण त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष, सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन
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जमीन अधिकांश लोग प्राॅपर्टी डीलरों से खरीदते हैं। झांसा देकर वे जमीन किसी तरह से बेचकर किनारा कस लेते हैं। ऐसे में जमीन खरीदने वाले लोगों को किसी जानकार से पूरी जांच बारिकी से करा लेनी चाहिए। जमीन लेने के पहले अधिवक्ता या किसी से जानकार से राय लेने के बाद ही खरीदें। ऐसा करने से भूमि संबंधी समस्या नहीं होगी।
संतोष कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जमीन लेने के पहले प्रपत्रों की पूरी तरह से जांच कर लें, नहीं तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। मुकदमे की तारीख देखने के साथ ही दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी। जालसाज झांसे में लेकर बंजर व सार्वजनिक जमीन को बेचकर रकम बना ले रहे हैं। जमीन लेने के बाद फंसे हुए लोगों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। कोई थाने का चक्कर लगा रहा है तो कोई कोर्ट में तारीख देख रहा है। जमीन के इस कारोबार में करोड़ रुपये का वारा-न्यारा हो जा रहा है, लेकिन गड़बड़ी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
यदि आप जिले में कहीं जमीन खरीदने जा रहे हैं तो जालसाजों से सावधान रहें। जमीन बेचने के दौरान रेट से लेकर कागजी प्रक्रिया में चिकनी चुपड़ी बातें कर अपने जाल में फंसाने वाले बिचौलिए जैसे तैसे जमीन बेचकर किनारे हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में उनका दिमाग लगता है। यदि जमीन खरीदने वाला सीधे तहसील पहुंचे तो वह भी उलझ जाएगा। क्योंकि, वहां भी बिचौलियों की सेटिंग रहती है। खरीदार को वही जानकारी मिलेगी तो बिचौलिए चाहेंगे।
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जमीन बिकने के बाद रकम लेकर बिचौलिए ज्यों किनारे होते हैं, परत दर परत खुलने लगती है। यह सबकुछ होने के बाद थाने से लेकर न्यायालय तक चक्कर लगाना पड़ता है। जमीन से जुड़ी कोई पत्रावली तैयार करानी पड़ती है तो बगैर रकम खर्च किए कोई काम नहीं होता है। इस पूरे खेल में जमीन खरीदने वाले ही फंसते हैं। उनके पास कोई चारा भी नहीं होता है। पहले मोटी रकम खर्च कर जमीन खरीदी फिर मुकदमा झेलने में रकम खर्च करना पड़ता है। अधिवक्ताओं की सलाह है कि जमीन खरीदने से पहले सारी जानकारी हासिल कर लें।
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चौहद्दी में झोल कर कई लोगों को कर दिया बैनामा पनियरा क्षेत्र थाना के माधोनगर गांव के रामबचन बताया कि ग्राम सभा कुआंचाप में आराजी नंबर 158 में चकबंदी के पूर्व बैनामा लिया था। काबिज दाखिल भी है। इसमें चौहद्दी नहीं दर्शाया गया है। यह खेल करके फंसा दिया गया है। पक्का मकान भी लोगों ने बना लिया है। एक रकबे में दो लोगों ने बैनामा ले लिया है। 158 नंबर में ही तीन लोगों ने वर्ष 2010 में बैनामा करा लिया। थाने से लेकर कचहरी तक मामला चल रहा है। सभी इसी में परेशान हैं। समस्या दूर नहीं हो रही है।
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एक माह बाद पता चला वहीं जमीन दूसरे ने भी लिया है बैनामा
सदर कोतवाली क्षेत्र की आशा देवी बैकुंठपुर में रहती हैं। सवरेजी में 30 डिस्मिल जमीन वर्ष 2022 में खरीदी। करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए। जमीन पर पिलर भी लग गया। सब कुछ सामान्य रहा। एक माह बाद जमीन पर अचानक एक व्यक्ति पहुंचा और कहने लगा की जमीन उसने बैनामा लिया है। यह सुनकर आशा देवी सन्न रह गईं। रकम खर्च करने के बाद जमीन में पेच फंसने पर उनके परिजन इधर-उधर भटकने लगे। यह मामला तहसील न्यायालय से दीवानी न्यायालय पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपनी दलीलों के जरिये जमीन को अपना बताते हुए जमीन का प्रपत्र दिखा रहे हैं।
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जमीन खरीदा तो शांत रहे, खारिज दाखिल में कर दी आपत्ति
जनवरी 2023 में विनोद कुमार ने शिवनगर में सात डिस्मिल जमीन खरीदा। कब्जा भी कर लिया, लेकिन खारिज दाखिल में पेच फंस गया। एक व्यक्ति ने आपत्ति डाल दी। मामला तहसीलदार न्यायालय में है। विनोद ने बताया कि जमीन खरीदने के दौरान भरोसे पर सौदा किया, लेकिन पेच फंस गया। रकम भी खर्च हुए और अब इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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सीधे-साधे लोग फंस जाते दलालों के चक्कर में
जमीन खरीदने के दौरान सीधे-साधे लोग दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। दलाल जमीन बेचने के दौरान खरीदार को सही जानकारी नहीं देते हैं। खरीदार को बिचौलिए पूरा भरोसा दिलाते हैं कि उन्होंने जांच पड़ताल कर ली है। उनकी चिकनी चुपड़ी बातों में लोग फंस जाते हैं। इस पूरे रैकेट में इतने लोग शामिल होते हैं कि खरीदार यह समझ नहीं पता है कि किसका कौन सा किरदार है। दलाल जमीन मालिक से एग्रीमेंट करा लेते हैं। इसके बाद अपने हिसाब से रकम तय कर जमीन का सौदा करते हैं। जमीन के बारे में गोपनीयता की बात कर खरीदार को फंसा लेते हैं।
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इन बिंदुओं पर दें ध्यान तो नहीं होगी परेशानी
-कोई जमीन कहां पर है। उसका उपयोग क्या है। इसके बारे में जानकारी लें।
-कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। इसके बारे में भी जानकारी कर लें।
-सबसे पहले खसरा खतौनी की जांच कराएं। जमीन खरीदने से पहले 12 साला रिकार्ड की जांच हर हाल में कराएं।
-व्यावसायिक क्षेत्र की जमीन खरीदने के दौरान नियमों के बारे में जानकारी कर लें।
-अगर थोड़ी भी गड़बड़ी हो तो जमीन न खरीदें। व्यावसायिक क्षेत्र में रिहायशी मकान बनाना अवैध होता है।
... प्राॅपर्टी ग्रीन बेल्ट को छिपाकर बेच देते जमीन
जमीन का सौदा करने से पहले पूरी तरह से जांच करें। भू राजस्व विभाग के दस्तावेज खंगालने से सटीक जानकारी मिलेगी। जमीन के खसरा नंबर से पूरी जानकारी मिल जाती है। तहसील में आवेदन कर मुआयना कराएं। पैतृक भूमि से खतौनी के सही नाम की जानकारी हो जाती है। भूमि किस-किस नाम से रही है, 12 साला में पूरा रिकार्ड मिल जाता है। शहर में प्राॅपर्टी डीलरों से ग्रीन बेल्ट को छिपाकर जमीन कई जगहों पर बेच दी है। वहां मकान भी बन गया है। कुछ जमीन बंधक रखने के बाद भी बेच देते हैं। आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती है। ऐसे में वे ठगी का शिकार हो जाते हैं। खतौनी का मुआयना कराने में 12.50 रुपये सरकारी शुल्क जमा होता है। 12 साल के रिकार्ड के लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। भेंट कराई, फोटो काॅपी सहित कुल मिलकर करीब तीन हजार रुपये खर्च हो जाता है।
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बगैर जांच-पड़ताल किए किसी भी जमीन को नहीं खरीदना चाहिए। 12 साल व सिलिंग की जांच हर हाल में कराना जरूरी होता है। जमीन लेने के पहले यह देख लें कि कहीं जमीन का अधिग्रहण तो नहीं हुआ है। कम खर्च करने पर सबकुछ जानकारी हो जाती है।
अवनीश नारायण त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष, सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन
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जमीन अधिकांश लोग प्राॅपर्टी डीलरों से खरीदते हैं। झांसा देकर वे जमीन किसी तरह से बेचकर किनारा कस लेते हैं। ऐसे में जमीन खरीदने वाले लोगों को किसी जानकार से पूरी जांच बारिकी से करा लेनी चाहिए। जमीन लेने के पहले अधिवक्ता या किसी से जानकार से राय लेने के बाद ही खरीदें। ऐसा करने से भूमि संबंधी समस्या नहीं होगी।
संतोष कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता