फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Medle Winer has loss jindgi ki dav

लोकलाज से जिन्दगी की दाव हार गया मेडल विजेता पहलवान

Sun, 21 Nov 2021 11:09 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 11:09 PM IST
विज्ञापन
Medle Winer has loss jindgi ki dav
लोकलाज से जिंदगी की दाव हार गया पदक विजेता पहलवान
विज्ञापन

महराजगंज। नौतनवां थाना क्षेत्र के एक गांव में बहन की जिद और दाव पर लगे स्वाभिमान के मझधार में फंसे 22 वर्षीय भाई ने खुशी-खुशी मौत को गले लगा लिया। जिले में आयोजित सांसद खेल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया था। लोक लाज से पदक विजेता पहलवान जिंदगी की दाव हार गया। बचपन से ही स्वाभिमानी, मिलनसार और खेल में रुचि रखने वाले प्रतिभावान युवक की मौत से जहां पूरे गांव में मातम का माहौल है। वहीं, परिजनों, मित्रों और बुजुर्गों के साथ ही गांव के हर व्यक्ति की आंखें आंसुओं से नम हैं। उधर, इकलौते भतीजे की मौत से दोनों बुआ की बूढ़ी आंखों से भी आंसुओं की धार थमने का नाम नहीं ले रही थी।

इकलौते और जिम्मेदार पुत्र के मौत की सूचना मिलते ही पिता भी मुंबई से बेटे की आखिरी झलक पाने की चाह में निकल पड़े हैं। बताते चलें कि तीन भाई और बहनों में मझले मृतक युवक एमकॉम (प्रथम वर्ष) का छात्र होने के साथ ही क्रिकेट और कुश्ती जैसे अन्य खेलों में खासा रुचि रखते थे। युवक के पिता करीब 20 वर्षों से रोजी-रोजगार और बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए मुंबई में दुकान चलाकर परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। करीब 15 वर्षों पूर्व सर्पदंश से हुई माता की मौत के बाद युवक के हौसले कमजोर जरूर पड़े, लेकिन दोनों बहनों को कभी टूटने नहीं दिया। जिस बहन की वजह से आज उन्हें अपनी जीवन लीला को समाप्त करनी पड़ी, उसके आगे और पढ़ाई में परेशानियों को कभी बाधा नहीं बनने दिया। जिसकी बदौलत आज वह बीए (द्वितीय वर्ष ) की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। युवक परदेश में रह रहे पिता को घर की चिंता से निश्चिंत कर स्वयं दोनों बहनों की देखरेख करता रहा और हाल ही में 2 वर्ष पूर्व बड़ी बहन की धूमधाम से शादी भी हुई। युवक रविवार को अस्पताल में अपनी अंतिम सांसें गिनते हुए भी यही कह रहा था कि जिस बहन के लिए उसने अपना सब कुछ त्याग कर दिया, आज वही बहन बहकी-बहकी बातें कर मुझे अपना दुश्मन मान रही है। मैं स्वाभिमान से समझौता और बहन की जिद के बीच खुद को बहुत ही कमजोर समझ रहा हूं और अब मैं जीना नहीं चाहता, मुझे मर ही जाने दो।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed