फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Mango blossoms are at risk from pests and fungus on the stalk.

Maharajganj News: कीट से फल और डंठल पर फफूंदी से आम के बौर को खतरा

Tue, 12 Mar 2024 12:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 12 Mar 2024 12:12 PM IST
विज्ञापन
Mango blossoms are at risk from pests and fungus on the stalk.
महराजगंज। जनपद में करीब 2800 हेक्टेयर में आम का बागीचा है। भुनगा कीट का प्रयोग नई कोपलों, इससे बनने वाले छोटे-छोटे फलों में होता है। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है। ये कीट प्रकोप वाले हिस्से पर शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं। इसके चलते पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जमा हो जाती है। वहीं, पत्तियों द्वारा होने वाला प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
विज्ञापन

उद्यान निरीक्षक विकास श्रीनेत ने बताया कि मिज कीट से फल और डंठल पर सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देती है। इस रोग की चपेट में आया हिस्सा पहले पीला हो जाता है। इसके बाद मंजरियां सूखने लगती हैं। आम को भुनगा व मिज कीट से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड तीन मिली प्रति लीटर पानी या क्लोरपोइरीफास या डायमेथोएट दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए तो कीट का प्रकोप समाप्त हो जाता है। इससे अच्छे फल होंगे और अच्छा लाभ मिलेगा। इस समय बौर की देख-रेख अनिवार्य है। मौसम में बदलाव के कारण मौजूदा समय में बौर में खर्रा रोग लगने का खतरा बढ़ इस गया है। इसको लेकर बागवान चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो समय एक से इसकी रोकथाम कर ली जाए तो अच्छे फल आएंगे
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि खर्रा व दहिया रोग के रोकथाम के लिए ट्राइडोमार्क एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव कार्बारिल 0.2 वा क्योनालफ्वस 1.3 मिली और इंडोफिल एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ करने से रोग नहीं लगेंगे। फूल खिलने या फल लगने के दौरान मार्शल 1.5 मिलो या कंटाफ प्लस 1.5 मिली दवा का छिड़काव करने से बेहतर लाभ मिलेगा। फलों के साथ प्राप्त फलों की गुणवत्ता के चलते बागवानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे करें कीट और रोग का नियंत्रण
बसूली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय चंद्रन ने बताया कि खर्रा व दहिया रोग के रोकथाम के लिए ट्राइडोमार्क एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव कार्बारिल 0.2 वा क्योनालफ्वस 1.3 मिली और इंडोफिल एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ करने से रोग नहीं लगेंगे। फूल खिलने या फल लगने के दौरान मार्शल 1.5 मिलो या कंटाफ प्लस 1.5 मिली दवा का छिड़काव करने से बेहतर लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed