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वन क्षेत्र वाले महाव नाले में काम कराएगा वन विभाग, भेजा गया प्रस्ताव
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महाव नाले को और गहरा कराएगा वन विभाग, भेजा गया प्रस्ताव
महराजगंज। बाढ़ से बचाव के दृष्टिगत जंगल क्षेत्र में पड़ने वाले महाव नाले में वन विभाग ने कार्य कराने की योजना बनाई है। मनरेगा से वन क्षेत्र से गुजरने वाले नाले को एक मीटर तक गहरा कराने की व्यवस्था बनाई गई है। इस कार्य पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव विभागीय जिम्मेदारों ने उच्चाधिकारियों को भेज दिया है।
महाव नाले की कुल लंबाई लगभग 23 किलोमीटर है। इसमें से 15 किलोमीटर का हिस्सा खुले क्षेत्र में है। जबकि आठ किलोमीटर का हिस्सा सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग से होकर गुजरता है। बरसात के मौसम में पहाड़ी नदियों से होकर आने वाले पानी का सिल्ट उसमें जम जाता है। नियमित सफाई न होने से जब जलस्तर बढ़ता है तो किसानों की फसल बर्बाद होती है। इस बार रुड़की से आए वैज्ञानिक ने इसकी स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग से प्रस्ताव मांगा था। इस पर सिंचाई विभाग ने लगभग तीन करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वन विभाग सेंचुरी वन क्षेत्र के नियमों को ध्यान में रखते हुए किसी दूसरे विभाग को काम कराने की अनुमति नहीं देगा, बल्कि वह स्वयं ही इस कार्य को कराएगा। मनरेगा से इस कार्य को लगभग 45 लाख रुपये में ही कराने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
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एक मीटर गहरी होगी खुदाई
उप प्रभागीय वनाधिकारी राकेश चंद्र यादव ने बताया कि वन क्षेत्र में पड़ने वाले करीब आठ किलोमीटर हिस्से में मनरेगा के तहत लगभग एक मीटर की खुदाई की योजना बनाई है। कार्य कराने मेें 60 प्रतिशत मशीन व 40 प्रतिशत श्रमिकों का योगदान लिया जाएगा।
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महाव नाले में वन विभाग की ओर से ही सफाई कराने का निर्णय लिया गया है। मनरेगा से होने वाले इस कार्य पर कुल 45 लाख के व्यय का अनुमान है। प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
पुष्प कुमार कांधला, डीएफओ
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महराजगंज। बाढ़ से बचाव के दृष्टिगत जंगल क्षेत्र में पड़ने वाले महाव नाले में वन विभाग ने कार्य कराने की योजना बनाई है। मनरेगा से वन क्षेत्र से गुजरने वाले नाले को एक मीटर तक गहरा कराने की व्यवस्था बनाई गई है। इस कार्य पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव विभागीय जिम्मेदारों ने उच्चाधिकारियों को भेज दिया है।
महाव नाले की कुल लंबाई लगभग 23 किलोमीटर है। इसमें से 15 किलोमीटर का हिस्सा खुले क्षेत्र में है। जबकि आठ किलोमीटर का हिस्सा सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग से होकर गुजरता है। बरसात के मौसम में पहाड़ी नदियों से होकर आने वाले पानी का सिल्ट उसमें जम जाता है। नियमित सफाई न होने से जब जलस्तर बढ़ता है तो किसानों की फसल बर्बाद होती है। इस बार रुड़की से आए वैज्ञानिक ने इसकी स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग से प्रस्ताव मांगा था। इस पर सिंचाई विभाग ने लगभग तीन करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वन विभाग सेंचुरी वन क्षेत्र के नियमों को ध्यान में रखते हुए किसी दूसरे विभाग को काम कराने की अनुमति नहीं देगा, बल्कि वह स्वयं ही इस कार्य को कराएगा। मनरेगा से इस कार्य को लगभग 45 लाख रुपये में ही कराने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
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एक मीटर गहरी होगी खुदाई
उप प्रभागीय वनाधिकारी राकेश चंद्र यादव ने बताया कि वन क्षेत्र में पड़ने वाले करीब आठ किलोमीटर हिस्से में मनरेगा के तहत लगभग एक मीटर की खुदाई की योजना बनाई है। कार्य कराने मेें 60 प्रतिशत मशीन व 40 प्रतिशत श्रमिकों का योगदान लिया जाएगा।
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महाव नाले में वन विभाग की ओर से ही सफाई कराने का निर्णय लिया गया है। मनरेगा से होने वाले इस कार्य पर कुल 45 लाख के व्यय का अनुमान है। प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
पुष्प कुमार कांधला, डीएफओ