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Maharajganj News: बी-पैक्स सदस्यता में महराजगंज प्रदेश में अव्वल

Fri, 24 Oct 2025 01:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:18 AM IST
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Maharajganj tops the state in B-PACS membership
महराजगंज। जिले ने बी-पैक्स सदस्यता अभियान में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सहकारिता विभाग के अनुसार, महराजगंज में 30 हजार के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 59,183 किसानों को ऑनलाइन सदस्य बनाया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग दो गुना है।
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इस तरह से जिले ने प्रदेश के सभी जनपदों को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, दूसरे स्थान पर सहारनपुर है, जहां 56,545 किसानों को सदस्यता से जोड़ा गया है। जिले में कुल 96 साधन सहकारी समितियां हैं। ये समितियां किसानों को उर्वरक, बीज, कीटनाशक, ऋण और कृषि उपकरण जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। हाल ही में शासन ने समितियों के माध्यम से खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है।
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इसके अनुसार अब केवल समिति के सदस्य किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराएंगे। शासन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में बी-पैक्स सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ते हुए उन्हें उर्वरक, बीज और कृषि उपकरणों की सुगम आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
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महराजगंज में चलाए गए इस अभियान को किसानों से जबरदस्त समर्थन मिला। सहकारिता विभाग और संबंधित समितियों की संयुक्त टीमों ने गांव-गांव जाकर किसानों को सदस्यता लेने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप, अपेक्षा से अधिक किसानों ने बी-पैक्स सदस्यता ग्रहण की।
खाद वितरण में बदले नियम
शासन ने स्पष्ट किया है कि समिति से खाद प्राप्त करने के लिए किसान का सहकारी समिति का सदस्य होना अनिवार्य है। साथ ही किसान के पास फार्मर रजिस्ट्री (किसान पंजीकरण) होना भी जरूरी है। जो किसान समिति के सदस्य नहीं हैं या जिनके पास किसान आईडी नहीं है, उन्हें अब समितियों से खाद या बीज उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बड़ी संख्या में किसान समितियों और जनसेवा केंद्रों पर पंजीकरण कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
रबी सीजन की तैयारी में जुटे किसान
जिले में आगामी रबी मौसम के लिए तैयारियां तेज हैं। किसान अब आलू, सरसों, गेहूं, मक्का, दलहनी व तिलहनी फसलों की बुआई की तैयारी में जुट गए हैं। सहकारिता विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग करें ताकि भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन भी बेहतर हो।
प्रति हेक्टेयर तय की गई खाद की सीमा
इस बार विभाग ने उर्वरक वितरण के लिए एक सीमा भी तय की है। प्रत्येक किसान को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पांच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि समिति स्तर पर यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी कि खाद केवल पंजीकृत किसानों को ही दी जाए।
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी
अधिकारियों ने बताया कि हर समिति में खाद वितरण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे उर्वरक की बिक्री और स्टॉक की स्थिति का रियल टाइम रिकॉर्ड रखा जा सके। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित समिति या विक्रेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिले के सभी सहकारी समितियों में कार्यरत विभागीय कर्मचारियों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। अभियान की शुरुआत में ही तय कर लिया था कि लक्ष्य से आगे बढ़ना है,किसानों को यह समझाया गया कि सदस्य बनने से न सिर्फ उन्हें उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि वे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी उठा सकेंगे।
-सुनील गुप्ता, एआर कोऑपरेटिव
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