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Maharajganj News: एटीएस की रडार पर सीमा क्षेत्र के मदरसे, मांगी सूचना
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महराजगंज। नेपाल सीमा से सटे जिलों के मदरसे एक बार फिर एटीएस की रडार पर हैं। एंटी टेररिस्ट स्कवाड (एटीएस) प्रयागराज इकाई ने अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से पंजीकृत व गैर पंजीकृत मदरसे, पढ़ाने वाले मौलानाओं की जानकारी मांगी है।
फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ाव के बारे में भी रिपोर्ट मांगी गई है। यह बताने का निर्देश है कि क्या किसी मौलाना का जुड़ाव अल फलाह यूनिवर्सिटी से है। डीएमओ ने बताया कि एटीएस प्रयागराज इकाई ने कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
दिल्ली ब्लास्ट के बाद जनपद में एटीएस की गतिविधि तेज हुई हैं। इससे पहले भी एटीएस मदरसों को लेकर कई बार जांच-पड़ताल कर चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर इसी वर्ष मई में अभियान चलाकर जिले के कुल 13 गैर पंजीकृत मदरसे बंद कराए गए थे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में कुल 291 पंजीकृत मदरसों का संचालन हो रहा है। इनका संचालन प्रदेश मदरसा बोर्ड के जिम्मे है। इनमें अब दीनी के साथ ही दुनियावी तालीम दिए जाते हैं। मदरसों में प्राथमिक स्तर की जमात में एनसीईआरटी की पुस्तकों का संचालन हो रहा है। जिले के पंजीकृत मदरसों में अब तक कुछ ऐसा तो नहीं मिला जिसे प्रशासन गलत कह सके लेकिन जिन बिंदुओं को समाहित करते हुए जानकारी मांगी गई है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अल फलाह से स्थानीय मदरसों या पढ़ाने वाले मौलानाओं के जुड़ाव या फंडिंग के स्रोत मिल सकते हैं।
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फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ाव के बारे में भी रिपोर्ट मांगी गई है। यह बताने का निर्देश है कि क्या किसी मौलाना का जुड़ाव अल फलाह यूनिवर्सिटी से है। डीएमओ ने बताया कि एटीएस प्रयागराज इकाई ने कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद जनपद में एटीएस की गतिविधि तेज हुई हैं। इससे पहले भी एटीएस मदरसों को लेकर कई बार जांच-पड़ताल कर चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर इसी वर्ष मई में अभियान चलाकर जिले के कुल 13 गैर पंजीकृत मदरसे बंद कराए गए थे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में कुल 291 पंजीकृत मदरसों का संचालन हो रहा है। इनका संचालन प्रदेश मदरसा बोर्ड के जिम्मे है। इनमें अब दीनी के साथ ही दुनियावी तालीम दिए जाते हैं। मदरसों में प्राथमिक स्तर की जमात में एनसीईआरटी की पुस्तकों का संचालन हो रहा है। जिले के पंजीकृत मदरसों में अब तक कुछ ऐसा तो नहीं मिला जिसे प्रशासन गलत कह सके लेकिन जिन बिंदुओं को समाहित करते हुए जानकारी मांगी गई है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अल फलाह से स्थानीय मदरसों या पढ़ाने वाले मौलानाओं के जुड़ाव या फंडिंग के स्रोत मिल सकते हैं।
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