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काफी मशक्कत के बाद पकड़ा गया झाड़ी में फंसा तेंदुआ

Tue, 18 Dec 2018 12:48 AM IST
राकेश पांडेय महराजगंज (ब्यूरो)
महराजगंज (ब्यूरो) Published by: राकेश पांडेय Updated Tue, 18 Dec 2018 12:48 AM IST
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Leopard trapped in a bush caught after a severe stroke
काफी मशक्कत के बाद पकड़ा गया झाड़ी में फंसा तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला
महराजगंज। कड़ी मशक्कत के बाद रोहिन नदी के किनारे झांड़ी में फंसे तेंदुए को रविवार की रात करीब 11 बजे पकड़ लिया गया। वन विभाग के कर्मचारी पकड़े गए तेंदुए को पिंजड़ा सहित लक्ष्मीपुर रेंज परिसर ले गए। जहां सोमवार को दुधवा टाइगर रिजर्व फारेस्ट से बुलाए गए चिकित्सक दयाशंकर ने सबसे पहले तेंदुए का फंदा काटा। उसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। मेडिकल रिपोर्ट में उसकी हालत ठीक बताई गई। विभाग के कर्मचारी अब तेंदुए को जंगल में छोड़ने के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। 
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कजरी गांव के पास जो तेंदुआ रोहिन नदी के किनारे झाड़ी में फंसा गया था, उसे निकालने के लिए वन विभाग के अधिकारियों व वनकर्मियों ने रविवार को पूरे दिन प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। तेंदुए को बेहोश कर पकड़ने के लिए लखनऊ से ट्रंकुलाइजर गन चलाने वाले तथा दुधवा टाइगर रिजर्व फारेस्ट से चिकित्सक भी बुलाए गए। इस बीच ट्रंकुलाइजर गन चलाने वाली टीम के आने में देर होने पर सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह स्वयं तेंदुए को पकड़ने निकल पड़े। रोहिन नदी के किनारे फंसे तेंदुए का निकालने का प्रयास किया तो ढाल की वजह से प्रयास कई बार असफल हो गया। एक बार तो डीएफओ ने झाड़ी में फंसे तेंदुए का निकालने का प्रयास किया तो वह गुर्राया तथा उनके ऊपर हमला करने का प्रयास भी किया। इसके बाद डीएफओ वहां से 100 मीटर पीछे हट गए और वहां रस्सी का फंदा बनाकर उसे खूंटे में फंसाने की कोशिश गई। पांच बार के प्रयास के बाद रस्सी खूंटे में फंसी और उसी रस्सी के सहारे तेंदुआ को पिंजड़े के अंदर लाया गया। खूंटे व फंदा सहित तेंदुए को पिंजड़े में बंद कर रविवार की रात करीब 12 बजे लक्ष्मीपुर रेंज लाया गया। तेंदुए को फंदा सहित पकड़े जाने की जानकारी जब प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने लखनऊ स्थित चिड़ियाघर के चिकित्सक डॉक्टर उत्कर्ष को दी तो उन्होंने कहा कि 24 घंटे से फंसा तेंदुआ तनाव में होगा। उन्होंने बताया कि उसे बेहोश करना व तुरंत जंगल में छोड़ने में खतरा है। इसके अलावा पर्यावरण मंत्रालय के स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर के मुताबिक जानवर को रात में बेहोश नहीं किया जा सकता। डीएफओ ने तेंदुए के बारे में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि चिकित्सक की रिपोर्ट से मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पूर्वीवृत गोंडा से अवगत करा दिया गया है, मुख्य वन संरक्षण उक्त रिपोर्ट से प्रधान मुख्य वन संरक्षक को अवगत कराएंगे। ऐसे में उच्चाधिकारियों से आदेश मिलते ही तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया जाएगा। उन्होने बताया कि पकडा गये मादा तेंदुए की उम्र करीब पांच वर्ष है। उसका वजह 45 किलो है। डीएफओ मनीष सिंह ने कहा कि जिस खेत में जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए क्लच वायर का फंदा लगाया गया था और उसमें तेंदुआ फंसा। उस खेत के स्वामी के खिलाफ वन विभाग केस दर्ज कराएगा। लोगों के मुताबिक फंदे में फंसने की वजह से तेंदुए की कमर में घाव हो गया है। वहीं चिकित्सकों की टीम ने तेंदुए को स्वस्थ बताया है।  
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