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Maharajganj News: 17 साल बाद निरस्त पट्टे की होगी जांच
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तेंदुअहिया में भाकियू जिलाध्यक्ष रामअशीष के नेतृत्व में भूमिहीनों का धरना।
सदर तहसील के तेंदुअहिया में 37 किसानों को मिला था 55 एकड़ जमीन का पट्टा, डीएम ने तीन सदस्यीय टीम बनाई
महराजगंज। सदर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत तेंदुअहिया में 42 दिन से धरना दे रहे 37 भूमिहीनों को उम्मीद जगी है। जिलाधिकारी ने 17 साल पहले निरस्त किए गए पट्टे की जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी है। प्रशासन ने 1995 में अनुसूचित भूमिहीनों को पट्टे पर कृषि योग्य जमीन दी थी। आरोप है कि बिना नोटिस दिए पट्टा निरस्त कर दिया गया।
सदर तहसील के पनियरा ब्लॉक स्थित तेंदुअहिया के 37 अनुसूचित भूमिहीनों को जिला प्रशासन ने 1995 में पट्टे पर कृषि जमीन दिया था। आरोप है कि 14 वर्ष बाद 2009 में जिला प्रशासन ने बिना नोटिस दिए उक्त पट्टे को निरस्त कर दिया।
किसानों को इसके बदले कहीं जमीन तक नहीं दी गई। परेशान किसानों ने मामले को लेकर कई जगह शिकायत की। कहीं भी सुनवाई नहीं होने पर किसानों ने आंदोलन का रास्ता चुना।
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एसडीएम सदर ने बताया कि त्रिस्तरीय जांच टीम में एडीएम न्यायिक नवनीत गोयल, सीडीओ महेंद्र कुछ सिंह व चकबंदी अधिकारी अशोक शामिल हैं। यह टीम डीएम को बिंदुवार रिपोर्ट देंगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परती पड़ी थी भूमि : बुधवार सदर तहसील के तेंदुअहिया में जारी किसानों के धरनास्थल पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम पहुंची। धरने पर बैठे प्रभावित मुरारी, सोना, रामवृक्ष, चन्नर, सालिक व महेंद्र अगली पंक्ति में बैठे मिले।
उन्होंने बताया कि तेदुहिया के 55 एकड़ जमीन की मालकिन गोरखपुर की प्रेम किशोरी थीं। उनके नाम से छावनी की जमीन अभिलेखों में दर्ज थी। 1984 में उनकी मृत्यु के बाद भूमि का कोई वारिस नहीं था जिसके कारण 1995 तक जमीन परती पड़ी रही। 1995 में तहसीलदार की रिपोर्ट पर वारिस रहित यह जमीन जिला भूमि प्रबंधन समिति के अधीन आई तो तत्कालीन एसडीएम ने 55 एकड़ जमीन को तेंदुअहिया के 37 भूमिहीनों को पट्टे पर देते हुए खेती का अधिकार दे दिया। तब से 2009 तक स्थानीय किसान ही जमीन पर खेती कर रहे थे।
तेंदुअहिया के भूमिहीनों के साथ भद्दा मजाक हुआ है। पहले पट्टे पर खेती के लिए जमीन दी फिर कुछ ही वर्षों में बिना नोटिस दिए छीन ली। जिसे भूमि सौंपा गया वह कूटरचित दस्तावेजों के सहारे काबिज हो गया लेकिन पीड़ितों के जांच की मांग नहीं सुनी जा रही है। इसी सप्ताह संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आंदोलन में आना स्वीकार किया है।
-रामअशीष, जिलाध्यक्ष, भाकियू
तेंदुअहिया में हम भूमिहीनों को 1995 में पट्टे पर जमीन दिया गया। लेकिन 2009 में बिना हमें कोई नोटिस दिए पट्टे की जमीन कूटरचित दस्तावेज दिखाने वाले को सौंप दिया गया। हम अनपढ़ व गरीब हैं इसलिए प्रशासन हमारी आवाज दबा देना चाहती है।
- रामवृक्ष पासी, तेंदुअहिया, महराजगंज।
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वर्ष 1995 में गांव के 37 अनुसूचित जाति के भूमिहीनों को पट्टा दिया गया। लेकिन बाद में बिना नोटिस दिए पट्टा छीन लिया गया। जिस अभिलेख के सहारे पट्टे की जमीन पर एक व्यक्ति का नाम चढ़ा उसका कोई अभिलेख नहीं है। यह तथ्य अभिलेखपाल भी अपने पत्र में स्वीकार कर चुके हैं। फिर भी प्रशासन सिर्फ आश्वासन दे रहा है।
- मुरारी प्रसाद, पट्टाधारक तेंदुअहिया, महराजगंज।
वर्जन
मामला संज्ञान में है। जिलाधिकारी की तरफ से पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। धरने पर बैठे किसानों से कई बार धरना समाप्त करने के लिए कहा गया, लेकिन किसान कार्रवाई की जिद में 42 दिन से धरना दे रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद उक्त मामले में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- अवनीश त्रिपाठी, एसडीएम, महराजगंज।
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महराजगंज। सदर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत तेंदुअहिया में 42 दिन से धरना दे रहे 37 भूमिहीनों को उम्मीद जगी है। जिलाधिकारी ने 17 साल पहले निरस्त किए गए पट्टे की जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी है। प्रशासन ने 1995 में अनुसूचित भूमिहीनों को पट्टे पर कृषि योग्य जमीन दी थी। आरोप है कि बिना नोटिस दिए पट्टा निरस्त कर दिया गया।
सदर तहसील के पनियरा ब्लॉक स्थित तेंदुअहिया के 37 अनुसूचित भूमिहीनों को जिला प्रशासन ने 1995 में पट्टे पर कृषि जमीन दिया था। आरोप है कि 14 वर्ष बाद 2009 में जिला प्रशासन ने बिना नोटिस दिए उक्त पट्टे को निरस्त कर दिया।
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किसानों को इसके बदले कहीं जमीन तक नहीं दी गई। परेशान किसानों ने मामले को लेकर कई जगह शिकायत की। कहीं भी सुनवाई नहीं होने पर किसानों ने आंदोलन का रास्ता चुना।
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एसडीएम सदर ने बताया कि त्रिस्तरीय जांच टीम में एडीएम न्यायिक नवनीत गोयल, सीडीओ महेंद्र कुछ सिंह व चकबंदी अधिकारी अशोक शामिल हैं। यह टीम डीएम को बिंदुवार रिपोर्ट देंगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परती पड़ी थी भूमि : बुधवार सदर तहसील के तेंदुअहिया में जारी किसानों के धरनास्थल पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम पहुंची। धरने पर बैठे प्रभावित मुरारी, सोना, रामवृक्ष, चन्नर, सालिक व महेंद्र अगली पंक्ति में बैठे मिले।
उन्होंने बताया कि तेदुहिया के 55 एकड़ जमीन की मालकिन गोरखपुर की प्रेम किशोरी थीं। उनके नाम से छावनी की जमीन अभिलेखों में दर्ज थी। 1984 में उनकी मृत्यु के बाद भूमि का कोई वारिस नहीं था जिसके कारण 1995 तक जमीन परती पड़ी रही। 1995 में तहसीलदार की रिपोर्ट पर वारिस रहित यह जमीन जिला भूमि प्रबंधन समिति के अधीन आई तो तत्कालीन एसडीएम ने 55 एकड़ जमीन को तेंदुअहिया के 37 भूमिहीनों को पट्टे पर देते हुए खेती का अधिकार दे दिया। तब से 2009 तक स्थानीय किसान ही जमीन पर खेती कर रहे थे।
तेंदुअहिया के भूमिहीनों के साथ भद्दा मजाक हुआ है। पहले पट्टे पर खेती के लिए जमीन दी फिर कुछ ही वर्षों में बिना नोटिस दिए छीन ली। जिसे भूमि सौंपा गया वह कूटरचित दस्तावेजों के सहारे काबिज हो गया लेकिन पीड़ितों के जांच की मांग नहीं सुनी जा रही है। इसी सप्ताह संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आंदोलन में आना स्वीकार किया है।
-रामअशीष, जिलाध्यक्ष, भाकियू
तेंदुअहिया में हम भूमिहीनों को 1995 में पट्टे पर जमीन दिया गया। लेकिन 2009 में बिना हमें कोई नोटिस दिए पट्टे की जमीन कूटरचित दस्तावेज दिखाने वाले को सौंप दिया गया। हम अनपढ़ व गरीब हैं इसलिए प्रशासन हमारी आवाज दबा देना चाहती है।
- रामवृक्ष पासी, तेंदुअहिया, महराजगंज।
वर्ष 1995 में गांव के 37 अनुसूचित जाति के भूमिहीनों को पट्टा दिया गया। लेकिन बाद में बिना नोटिस दिए पट्टा छीन लिया गया। जिस अभिलेख के सहारे पट्टे की जमीन पर एक व्यक्ति का नाम चढ़ा उसका कोई अभिलेख नहीं है। यह तथ्य अभिलेखपाल भी अपने पत्र में स्वीकार कर चुके हैं। फिर भी प्रशासन सिर्फ आश्वासन दे रहा है।
- मुरारी प्रसाद, पट्टाधारक तेंदुअहिया, महराजगंज।
वर्जन
मामला संज्ञान में है। जिलाधिकारी की तरफ से पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। धरने पर बैठे किसानों से कई बार धरना समाप्त करने के लिए कहा गया, लेकिन किसान कार्रवाई की जिद में 42 दिन से धरना दे रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद उक्त मामले में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- अवनीश त्रिपाठी, एसडीएम, महराजगंज।