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29 लाख लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया की दवा
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29 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा देने का लक्ष्य
महराजगंज। जिले में करीब 29 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा खिलाने का लक्ष्य है। इनमें करीब 28.60 लाख ग्रामीण और करीब 38 हजार शहरी लोग होंगे। दवा खिलाने के लिए आगामी 12 से 27 मई तक अभियान चलेगा। अभियान में खुल 2,315 टीम लगाई जाएंगी। इन टीमों में 4,630 कर्मचारी लगाए जाएंगे।
एसीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अभियान में 382 सुपरवाइजर भी लगाए जाएंगे। अभियान की सफलता के लिए सारी तैयारी और व्यवस्था कर ली गई है। व्यवस्था के मुताबिक, 1,250 लोगों की आबादी पर एक टीम लगाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान दो से पांच साल आयु के बच्चों को डीईसी की (100 मिलीग्राम की) एक गोली, 6 से 14 वर्ष के बच्चों को दो गोली तथा 15 वर्ष से ऊपर के लोगों को तीन गोलियां देनी हैं।
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28.99 लाख अल्बेंडाजोल गोली की आवश्यकता
नोडल अधिकारी ने बताया लक्षित 29 लाख लोगों के लिए करीब 70.32 लाख डीईसी तथा करीब 29 लाख अल्बेंडाजोल गोली की आवश्यकता है। इसके सापेक्ष डीईसी की करीब 68.62 लाख डीईसी तथा अल्बेंडाजोल की करीब 26.22 लाख गोली विभिन्न अस्पतालों को उपलब्ध करा दी गई हैं।
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एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) का उद्देश्य
नोडल अधिकारी ने बताया कि एमडीए कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जन समुदाय को इस रोग के प्रति जागरूक करना, रोग की रोकथाम के लिए जानकारी देना तथा फाइलेरिया रोग के प्रसार को रोककर इस रोग पर नियंत्रण पाना है। वर्ष 2025 तक फाइलेरिया को पूर्ण रूप से समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान इस बात को ध्यान में रखने के लिए कहा गया है कि दो साल से कम आयु के बच्चे व गंभीर रूप से बीमार तथा गर्भवती को दवा नहीं खानी है।
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क्या है फाइलेरिया:
एसीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया एक परजीवी रोग है, जो बुचेरिया ब्रोन्कफटाई एवं बी. मलाई के कारण होता है। जब क्यूलेक्स ग्रुप की मादा मच्छर फाइलेरिया ग्रस्त व्यक्ति का रक्त चूसने के बाद किसी स्वस्थ मनुष्य का रक्त चूसती है तो उस व्यक्ति में भी इस रोग का संक्रमण हो जाता है। यह रोग शरीर के किसी भी भाग में सूजन के रूप में प्रकट होता है।
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महराजगंज। जिले में करीब 29 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा खिलाने का लक्ष्य है। इनमें करीब 28.60 लाख ग्रामीण और करीब 38 हजार शहरी लोग होंगे। दवा खिलाने के लिए आगामी 12 से 27 मई तक अभियान चलेगा। अभियान में खुल 2,315 टीम लगाई जाएंगी। इन टीमों में 4,630 कर्मचारी लगाए जाएंगे।
एसीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अभियान में 382 सुपरवाइजर भी लगाए जाएंगे। अभियान की सफलता के लिए सारी तैयारी और व्यवस्था कर ली गई है। व्यवस्था के मुताबिक, 1,250 लोगों की आबादी पर एक टीम लगाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान दो से पांच साल आयु के बच्चों को डीईसी की (100 मिलीग्राम की) एक गोली, 6 से 14 वर्ष के बच्चों को दो गोली तथा 15 वर्ष से ऊपर के लोगों को तीन गोलियां देनी हैं।
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28.99 लाख अल्बेंडाजोल गोली की आवश्यकता
नोडल अधिकारी ने बताया लक्षित 29 लाख लोगों के लिए करीब 70.32 लाख डीईसी तथा करीब 29 लाख अल्बेंडाजोल गोली की आवश्यकता है। इसके सापेक्ष डीईसी की करीब 68.62 लाख डीईसी तथा अल्बेंडाजोल की करीब 26.22 लाख गोली विभिन्न अस्पतालों को उपलब्ध करा दी गई हैं।
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एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) का उद्देश्य
नोडल अधिकारी ने बताया कि एमडीए कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जन समुदाय को इस रोग के प्रति जागरूक करना, रोग की रोकथाम के लिए जानकारी देना तथा फाइलेरिया रोग के प्रसार को रोककर इस रोग पर नियंत्रण पाना है। वर्ष 2025 तक फाइलेरिया को पूर्ण रूप से समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान इस बात को ध्यान में रखने के लिए कहा गया है कि दो साल से कम आयु के बच्चे व गंभीर रूप से बीमार तथा गर्भवती को दवा नहीं खानी है।
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क्या है फाइलेरिया:
एसीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया एक परजीवी रोग है, जो बुचेरिया ब्रोन्कफटाई एवं बी. मलाई के कारण होता है। जब क्यूलेक्स ग्रुप की मादा मच्छर फाइलेरिया ग्रस्त व्यक्ति का रक्त चूसने के बाद किसी स्वस्थ मनुष्य का रक्त चूसती है तो उस व्यक्ति में भी इस रोग का संक्रमण हो जाता है। यह रोग शरीर के किसी भी भाग में सूजन के रूप में प्रकट होता है।