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Maharajganj News: अमरमणि त्रिपाठी का चाचा की कर्मभूमि से चुनाव लड़ने का एलान

Thu, 03 Sep 2026 02:11 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 02:11 AM IST
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Amarmani Tripathi announces plan to contest election from his uncle's political turf.
जहां से चार बार विधायक रहे वह सीट बेटे के लिए छोड़ी, 2027 में फरेंदा से मैदान में उतरने की तैयारी
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गोरखपुर/महराजगंज। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने 2027 का विधानसभा चुनाव फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह चाचा श्यामनारायण की कर्मभूमि से चुनाव मैदान में उतरेंगे। श्यामनारायण इस क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हैं। अमरमणि ने बताया कि इस बार चाचा की जगह भतीजा चुनाव लड़ेगा और इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि वह किस दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ने के योग्य हैं।

अमरमणि त्रिपाठी मूल रूप से फरेंदा क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह लक्ष्मीपुर, अब नौतनवां विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मायावती, राजनाथ सिंह और राम प्रकाश गुप्त की सरकारों में मंत्री भी रहे हैं। अमरमणि त्रिपाठी कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराए गए थे और उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई थी। बाद में सरकार की नीति के तहत उन्हें समय से पहले रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद कुछ समय तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे। अब वह विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।
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कुछ समस्याओं को लेकर वह गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं। किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे, इस सवाल पर अमरमणि ने कहा कि दल की बात छोड़िए, चुनाव लड़ना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों से नजदीकी है लेकिन टिकट नहीं मिलने पर लोग निर्दलीय या दूसरे दल से चुनाव लड़कर भी जीतते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य चुनाव जीतना है और वह इसके लिए अभियान में जुट गए हैं।
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उन्होंने अपने बेटे की भी चर्चा करते हुए कहा कि वह निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं और नौतनवां में सक्रिय हैं। अमरमणि के चुनाव लड़ने के एलान के बाद क्षेत्रीय सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं और राजनीतिक दलों के बीच संभावित समीकरणों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।



कोट

जिला न्यायालय से गंभीर आपराधिक मामले में आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद सरकार यदि अच्छे आचरण या किसी शासनादेश के तहत व्यक्ति को जेल से रिहा कर देती है तब भी उसकी दोष सिद्धि खत्म नहीं होती। वह व्यक्ति तब तक दोषी माना जाएगा जब तक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय उसकी सजा पर रोक न लगा दे या उसे निर्दोष घोषित न कर दे। केवल प्रशासनिक आदेश से न्यायालय की ओर से दी गई सजा या दोषसिद्धि को खत्म नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में यदि उच्च या सर्वोच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है या व्यक्ति को निर्दोष नहीं ठहराया है तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा। न्यायालय के दोष सिद्धि संबंधी आदेश में बदलाव केवल सक्षम उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय ही कर सकता है।
-अखिल सिंह, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
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