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संसाधनों का अभाव, कागजों में होता है ट्रायल
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संसाधनों का अभाव, कागजों में होता है ट्रायल
महराजगंज। खेल निदेशालय की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के मेधावियों के चयन के लिए नियमित तौर पर जिला स्तरीय ट्रायल की तिथि निर्धारित की जाती है, मगर स्टेडियम में संसाधनों के अभाव में ज्यादातर खेलों के ट्रायल सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। जब तक यहां संसाधनों की उपलब्धता पर जोर नहीं दिया जाएगा, व्यावहारिक रूप से ट्रायल के नाम पर कोरम पूर्ति होती रहेगी।
स्टेडियम के खेल मैदान में हॉकी, फुटबाल तथा बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कुश्ती व बॉक्सिंग का ट्रायल कराए जाने की सुविधा है। मगर इन खेलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य खेलों में ट्रायल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। निदेशालय की ओर से जारी कार्यक्रम के तहत खिलाड़ियों को ट्रायल के लिए तो बुला लिया जाता है, मगर समुचित व्यवस्था न होने से उनका ट्रायल जैसे-तैसे करा कोरम पूर्ति कर ली जाती है।
दुर्भाग्य यह है कि जब स्टेडियम में खेलों के ट्रायल प्रतिवर्ष कराने हैं तो उनसे जुड़े संसाधनों की उपलब्धता के लिए पहल क्यों नहीं की जा रही है।
संसाधनों की उपलब्धता के मुताबिक स्टेडियम में संचालित खेलों का ट्रायल बेेहतर ढंग से कराया जाता है। जिन खेलों में संसाधन की अनुपलब्धता है, उसे बढ़ाए जाने के लिए निदेशालय से पत्राचार किया जाएगा।
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- धर्मेंद्र कुमार, उप क्रीड़ाधिकारी
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महराजगंज। खेल निदेशालय की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के मेधावियों के चयन के लिए नियमित तौर पर जिला स्तरीय ट्रायल की तिथि निर्धारित की जाती है, मगर स्टेडियम में संसाधनों के अभाव में ज्यादातर खेलों के ट्रायल सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। जब तक यहां संसाधनों की उपलब्धता पर जोर नहीं दिया जाएगा, व्यावहारिक रूप से ट्रायल के नाम पर कोरम पूर्ति होती रहेगी।
स्टेडियम के खेल मैदान में हॉकी, फुटबाल तथा बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कुश्ती व बॉक्सिंग का ट्रायल कराए जाने की सुविधा है। मगर इन खेलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य खेलों में ट्रायल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। निदेशालय की ओर से जारी कार्यक्रम के तहत खिलाड़ियों को ट्रायल के लिए तो बुला लिया जाता है, मगर समुचित व्यवस्था न होने से उनका ट्रायल जैसे-तैसे करा कोरम पूर्ति कर ली जाती है।
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दुर्भाग्य यह है कि जब स्टेडियम में खेलों के ट्रायल प्रतिवर्ष कराने हैं तो उनसे जुड़े संसाधनों की उपलब्धता के लिए पहल क्यों नहीं की जा रही है।
संसाधनों की उपलब्धता के मुताबिक स्टेडियम में संचालित खेलों का ट्रायल बेेहतर ढंग से कराया जाता है। जिन खेलों में संसाधन की अनुपलब्धता है, उसे बढ़ाए जाने के लिए निदेशालय से पत्राचार किया जाएगा।
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- धर्मेंद्र कुमार, उप क्रीड़ाधिकारी