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Maharajganj News: बेबी फीड कॉर्नर के अभाव में बेपर्दा हो रही मातृत्व
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बेबी फीड कॉर्नर के अभाव में खुले में स्तनपान को मजबूर महिलाएं
मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है स्तनपान
महराजगंज। एक ओर एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। दूसरी तरफ जनपद के सरकारी अस्पतालों की हकीकत इस अभियान की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। जिला अस्पताल समेत किसी भी सरकारी अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिलाओं को शिशुओं को खुले परिसर, ओपीडी या बरामदों में स्तनपान कराना पड़ रहा है।
जनपद के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में प्रसूताएं और नवजात शिशुओं के साथ परिजन पहुंचते हैं। लेकिन माताओं के लिए ऐसा कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है जहां वे सहजता से शिशुओं को स्तनपान करा सकें। मजबूरी में कई महिलाएं अस्पताल परिसर के किसी कोने या ओपीडी के बाहर बैठकर शिशुओं को दूध पिलाती हैं।
जिला अस्पताल के लेबर रूम में भी कंगारू मदर्स कॉर्नर की व्यवस्था नहीं है। हालांकि नवजात शिशु देखभाल इकाई में सीमित रूप से कंगारू मदर्स कॉर्नर बनाया गया है, जहां भर्ती नवजात शिशुओं की माताएं स्तनपान करा सकती हैं। लेकिन सामान्य मरीजों और ओपीडी में आने वाली महिलाओं के लिए ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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हर वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन
स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने तथा दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने के लिए जागरूक करता है। सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है और कई स्थानों पर मदर मिल्क बैंक स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है स्तनपान
डॉक्टर रोमा गुप्ता ने बताया कि बच्चे के लिए मां का पहला दूध वही भोजन होता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है तथा उसके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। वहीं मां को भी स्तनपान कराने से प्रसव के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, रक्तस्राव में कमी और भविष्य मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है।
वर्जन
जिला अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर की आवश्यकता को देखते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। बेबी फीड कॉर्नर बनने के बाद महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में स्तनपान कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी,मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है स्तनपान
महराजगंज। एक ओर एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। दूसरी तरफ जनपद के सरकारी अस्पतालों की हकीकत इस अभियान की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। जिला अस्पताल समेत किसी भी सरकारी अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिलाओं को शिशुओं को खुले परिसर, ओपीडी या बरामदों में स्तनपान कराना पड़ रहा है।
जनपद के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में प्रसूताएं और नवजात शिशुओं के साथ परिजन पहुंचते हैं। लेकिन माताओं के लिए ऐसा कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है जहां वे सहजता से शिशुओं को स्तनपान करा सकें। मजबूरी में कई महिलाएं अस्पताल परिसर के किसी कोने या ओपीडी के बाहर बैठकर शिशुओं को दूध पिलाती हैं।
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जिला अस्पताल के लेबर रूम में भी कंगारू मदर्स कॉर्नर की व्यवस्था नहीं है। हालांकि नवजात शिशु देखभाल इकाई में सीमित रूप से कंगारू मदर्स कॉर्नर बनाया गया है, जहां भर्ती नवजात शिशुओं की माताएं स्तनपान करा सकती हैं। लेकिन सामान्य मरीजों और ओपीडी में आने वाली महिलाओं के लिए ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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हर वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन
स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने तथा दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने के लिए जागरूक करता है। सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है और कई स्थानों पर मदर मिल्क बैंक स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है स्तनपान
डॉक्टर रोमा गुप्ता ने बताया कि बच्चे के लिए मां का पहला दूध वही भोजन होता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है तथा उसके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। वहीं मां को भी स्तनपान कराने से प्रसव के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, रक्तस्राव में कमी और भविष्य मां को ब्रेस्ट कैंसर से बचाता है।
वर्जन
जिला अस्पताल में बेबी फीड कॉर्नर की आवश्यकता को देखते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। बेबी फीड कॉर्नर बनने के बाद महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में स्तनपान कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी,मुख्य चिकित्सा अधिकारी