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Maharajganj News: दो साल में ही ध्वस्त हो गई खेल मैदान की चहारदीवारी
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परतावल। ब्लॉक के ग्राम सभा पुरैना में खेल मैदान की चहारदीवारी निर्माण के महज दो साल के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गई। करीब नौ लाख रुपये की लागत से मनरेगा योजना के तहत कराए गए इस कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चहारदीवारी के टूटने से सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में ग्रामसभा पुरैना के खेल मैदान की चहारदीवारी का निर्माण शुरू कराया गया था। इसके निर्माण पर लगभग नौ लाख रुपये खर्च किए गए। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद चहारदीवारी की हालत कुछ ही समय में खराब होने लगी। अब स्थिति यह है कि करीब 50 मीटर चहारदीवारी टूटकर गिर गई है। वहीं, मैकदान के किनारे निर्माण सामग्री बिखरी दिखाई दे रही है। इससे निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
गुणवत्ता की जांच पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण चहारदीवारी टिक नहीं सकी और दो साल के भीतर ही ध्वस्त होने लगी। आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गुणवत्ता की समुचित जांच किए बिना ही तकनीकी सहायक ने मेजरमेंट बुक तैयार कर दी। खेल मैदान की चहारदीवारी का कम समय में टूटना निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों में भी निर्माण कार्य की स्थिति को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद निर्माण का लाभ लंबे समय तक नहीं मिल पा रहा है।
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बोले अधिकारीमामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- कृष्ण कांत शुक्ला, खंड विकास अधिकारी, परतावल
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जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में ग्रामसभा पुरैना के खेल मैदान की चहारदीवारी का निर्माण शुरू कराया गया था। इसके निर्माण पर लगभग नौ लाख रुपये खर्च किए गए। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद चहारदीवारी की हालत कुछ ही समय में खराब होने लगी। अब स्थिति यह है कि करीब 50 मीटर चहारदीवारी टूटकर गिर गई है। वहीं, मैकदान के किनारे निर्माण सामग्री बिखरी दिखाई दे रही है। इससे निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
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गुणवत्ता की जांच पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण चहारदीवारी टिक नहीं सकी और दो साल के भीतर ही ध्वस्त होने लगी। आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गुणवत्ता की समुचित जांच किए बिना ही तकनीकी सहायक ने मेजरमेंट बुक तैयार कर दी। खेल मैदान की चहारदीवारी का कम समय में टूटना निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों में भी निर्माण कार्य की स्थिति को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद निर्माण का लाभ लंबे समय तक नहीं मिल पा रहा है।
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बोले अधिकारीमामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- कृष्ण कांत शुक्ला, खंड विकास अधिकारी, परतावल