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Maharajganj News: कॅरिअर बनाना छोड़ कैरियर बन रहे बेरोजगार
Thu, 19 Dec 2024 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 19 Dec 2024 12:49 AM IST
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महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में बेरोजगार युवकों को तस्कर अपना आसान शिकार बना रहे हैं। कम समय में अच्छी रकम पाने की लालच में युवक कैरियर के रूप में काम करने को विवश हैं।
एक चक्कर नेपाल जाने-आने पर 500 से 1000 रुपये मिल जाते हैं। इससे उनकी मुश्किल दूर हो जाती है। इसमें मुख्य सरगना सुरक्षित रहता है। सामान पकड़ गया तो जिम्मेदारी कैरियर की रहती है। जिले में 46,234 पढ़े लिखे बेरोजगार युवा जिला सेवा योजन कार्यालय में पंजीकृत हैं।
सूत्रों की मानें तो तस्करों का सिंडिकेट सीमावर्ती इलाकों में काफी मजबूत है। मुख्य सरगना सीधे बेरोजगार युवकों को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। साइकिल व बाइक से लहसुन से लेकर अन्य सामाग्री कैरियर के रूप में काम करने वाले युवा सरहद पार पहुंचाते हैं। इसमें इनको अलग अलग रास्तों से भेजा जाता है। बाइक वाले युवाओं को रकम ज्यादा दी जाती है। क्योंकि, पकड़ में आने पर उनकी बाइक भी सीज हो जाती है। ज्यादतर मामलों में खुली सीमा का फायदा उठाते हैं।
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सुरक्षा कर्मियों को आने की आहट पता चल गई तो पहले ही सामान छोड़कर नेपाल सीमा में चले जाते हैं। बीते एक माह में हुई बरामदगी पर नजर डाले में इसमें 40 साल से कम उम्र के अधिक युवा पकड़े गए। इसमें ज्यादातर वही हैं तो कम पढ़े लिखे हैं, या फिर स्नातक स्तर तक पढ़ाई किए हैं। हाई स्कूल से नीचे की शिक्षा ग्रहण कर बेरोजगार रहने वाले युवा अधिकतर पकड़ में आते हैं।
सीमावर्ती इलाकों में पड़ताल के दौरान पता चला कि युवक काम धंधे की तलाश में दिल्ली, मुंबई का रूख करते हैं, लेकिन शार्ट कट में रकम कमाने की चाह रखने वाले युवा तस्करी के दलदल में फंस जाते हैं। एक बार इसमें फंसे तो कम समय में अधिक आमदनी होने पर चाहकर भी बाहर नहीं निकल पाते हैं। औसतन पकड़ में नहीं आने पर एक युवा कम से कम 20 हजार से अधिक की आमदनी करता है। पकड़े जाने पर कस्टम अधिनियम में कार्रवाई के बाद छूट जाते हैं।
बातचीत में एक युवक ने बताया कि काम शुरू करने के लिए रकम नहीं है। ऐसे में मौके पर छोटा मोटा काम कर कुछ मिल जाता है। रिस्क तो होता है, लेकिन घंटे भर से कम समय में आमदनी ठीक हो जाती है। सूत्रों की मानें तो तस्कर इनका उपयोग रात के समय में अधिक करते हैं। बाइक पर इन दिनों कैरियर तीन से चार बोरी आसानी से लेकर चले आते हैं, इसके एवज में एक चक्कर 500 रुपया मिल जाता है। पेट्रोल की रकम अलग से दी जाती है।
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एक चक्कर नेपाल जाने-आने पर 500 से 1000 रुपये मिल जाते हैं। इससे उनकी मुश्किल दूर हो जाती है। इसमें मुख्य सरगना सुरक्षित रहता है। सामान पकड़ गया तो जिम्मेदारी कैरियर की रहती है। जिले में 46,234 पढ़े लिखे बेरोजगार युवा जिला सेवा योजन कार्यालय में पंजीकृत हैं।
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सूत्रों की मानें तो तस्करों का सिंडिकेट सीमावर्ती इलाकों में काफी मजबूत है। मुख्य सरगना सीधे बेरोजगार युवकों को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। साइकिल व बाइक से लहसुन से लेकर अन्य सामाग्री कैरियर के रूप में काम करने वाले युवा सरहद पार पहुंचाते हैं। इसमें इनको अलग अलग रास्तों से भेजा जाता है। बाइक वाले युवाओं को रकम ज्यादा दी जाती है। क्योंकि, पकड़ में आने पर उनकी बाइक भी सीज हो जाती है। ज्यादतर मामलों में खुली सीमा का फायदा उठाते हैं।
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सुरक्षा कर्मियों को आने की आहट पता चल गई तो पहले ही सामान छोड़कर नेपाल सीमा में चले जाते हैं। बीते एक माह में हुई बरामदगी पर नजर डाले में इसमें 40 साल से कम उम्र के अधिक युवा पकड़े गए। इसमें ज्यादातर वही हैं तो कम पढ़े लिखे हैं, या फिर स्नातक स्तर तक पढ़ाई किए हैं। हाई स्कूल से नीचे की शिक्षा ग्रहण कर बेरोजगार रहने वाले युवा अधिकतर पकड़ में आते हैं।
सीमावर्ती इलाकों में पड़ताल के दौरान पता चला कि युवक काम धंधे की तलाश में दिल्ली, मुंबई का रूख करते हैं, लेकिन शार्ट कट में रकम कमाने की चाह रखने वाले युवा तस्करी के दलदल में फंस जाते हैं। एक बार इसमें फंसे तो कम समय में अधिक आमदनी होने पर चाहकर भी बाहर नहीं निकल पाते हैं। औसतन पकड़ में नहीं आने पर एक युवा कम से कम 20 हजार से अधिक की आमदनी करता है। पकड़े जाने पर कस्टम अधिनियम में कार्रवाई के बाद छूट जाते हैं।
बातचीत में एक युवक ने बताया कि काम शुरू करने के लिए रकम नहीं है। ऐसे में मौके पर छोटा मोटा काम कर कुछ मिल जाता है। रिस्क तो होता है, लेकिन घंटे भर से कम समय में आमदनी ठीक हो जाती है। सूत्रों की मानें तो तस्कर इनका उपयोग रात के समय में अधिक करते हैं। बाइक पर इन दिनों कैरियर तीन से चार बोरी आसानी से लेकर चले आते हैं, इसके एवज में एक चक्कर 500 रुपया मिल जाता है। पेट्रोल की रकम अलग से दी जाती है।
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