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Maharajganj News: सोनौली हाईवे पर अधूरे निर्माण से सांसत में राहगीर
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फरेंदा के दक्षिणी बाईपास पर किया गया डायवर्जन।
खुदी हुई मिट्टी, अधूरी नालियां और अधूरे निर्माण कार्यों सो राहगीरों को होती है परेशानी
धुंध में संकेतक बोर्ड साफ नहीं दिखते, जिससे बाइक सवार आए दिन घायल होते
महराजगंज। सोनौली हाईवे पर ज्यादातर काम लगभग पूरा हो चुका है। कुछ जगहों पर अधूरे कार्यों की वजह से राहगीर खतरा महसूस कर रहे हैं। थोड़ी सी चूक होने पर बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है। ठंड में हाईवे पर आवागमन के दौरान धुंध में संकेतक बोर्ड साफ नहीं दिखते और रास्ते भी ठीक नहीं है। ऐसे मैं आए दिन वाहन चालक घायल होते हैं।
गोरखपुर–सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडरपास, सर्विस लेन, चौड़ा नाला, छोटे पुल तथा बाईपास का निर्माण हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण की प्रगति ठीक नहीं है। स्पीड ब्रेकर जैसी बाधाएं, खुदी हुई मिट्टी और अधूरी नालियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। इस रूट से गुजरने पर पता चला कि संपतिहा, एकसड़वा, पुरन्दरपुर, सोहरवलिया खुर्द, फरेंदा बुजुर्ग और महदेवा बुजुर्ग अंडरपास का निर्माण पूरा हो चुका है। इन स्थानों पर सर्विस लेन और नाले का कार्य अब भी अधूरा है। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है।
फरेंदा दक्षिणी बाईपास पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज अभी भी अधूरा है। इसको लेकर किया गया डायवर्ज़न ठीक नहीं है। यहां अक्सर लोग गिरकर घायल होते रहते हैं। डायवर्जन मार्ग बेहतर नहीं होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। फरेंदा बाईपास पर कई जगह निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। ऐसे में हालत यह है कि अगर वाहन चलाने में थोड़ी सी चूक हो गई तो दुर्घटना होना तय है। बाईपास पर मिले ज्ञानेंद्र तिवारी कहने लगे कि अभी तो निर्माण हो रहा है, इस वजह से यह समस्या बनी है। कार्यदायी संस्था थोड़ा सा गंभीर रहती तो समस्या नहीं होती। इतना कहते हुए वह आगे बढ़ गए।
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आगे बढ़ने पर फरेंदा के छतरी पुल के पास भी सड़क क्षतिग्रस्त नजर आई। यह सड़क सोनौली की तरफ जाती है वह भी खस्ताहाल है। इसको ठीक करने का काम चल रहा है। अधिकांश ओवरब्रिज के बगल वाली सड़क खराब हालत में है। भारीबैसी नर्सरी गांव के सामने भी अधूरा सड़क होने से परेशानी होती है, यहां डायवर्जन किया गया है। रानीपुर ओवरब्रिज के पास भी सड़कें टूटी हुई हैं। वहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। भैया फरेंदा ओवरब्रिज के पास डायवर्जन है। वहां नाली का निर्माण हो रहा है। ऐसे में भैया फरेंदा जाने वाले लोगों को दिक्कत होती है। इस तरह की समस्या इस रूट पर लगभग कई जगहों पर है।
हाईवे पर काम की प्रगति एक नजर में
कुसेरवा में अंडरपास का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हुआ है जबकि बाकी कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी है। कुंसेरवा उर्फ विशुनपुरा में भी अंडरपास का निर्माण जारी है। नौतनवा में निर्माणाधीन अंडरपास पर भी काम सुस्त पड़ा है। परसौनी में अंडरपास निर्माण का सिर्फ 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो सका है। राहगीर महेश कुमार बताते हैं कि यदि अंडरपास समय से बन जाते तो आवागमन काफी आसान हो जाता। वहीं, ललाइन पैसिया, मोहनापुर और मनिकौरा में अंडरपास का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। यहां प्रस्तावित नाले और सर्विस लेन की सड़क निर्माण भी अधूरी है। राहगीर मनोज कुमार ने बताया कि सर्विस लेन और नाली निर्माण के दौरान खुदी मिट्टी रात में बड़ी समस्या बन जाती है। इसी तरह कम्हरिया खुर्द और मथुरा नगर में भी अंडरपास निर्माण सुस्त है।
वर्जन
परियोजना 6 मार्च 2023 को प्रारंभ हुई थी और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। निर्माण एजेंसी की ओर से जहां-जहां नाला निर्माण और सर्विस लेन का काम शुरू किया गया है, वहां सुरक्षा और यातायात सुगमता के लिए संकेतक बोर्ड भी लगाए गए हैं। सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
-ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई गोरखपुर
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धुंध में संकेतक बोर्ड साफ नहीं दिखते, जिससे बाइक सवार आए दिन घायल होते
महराजगंज। सोनौली हाईवे पर ज्यादातर काम लगभग पूरा हो चुका है। कुछ जगहों पर अधूरे कार्यों की वजह से राहगीर खतरा महसूस कर रहे हैं। थोड़ी सी चूक होने पर बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है। ठंड में हाईवे पर आवागमन के दौरान धुंध में संकेतक बोर्ड साफ नहीं दिखते और रास्ते भी ठीक नहीं है। ऐसे मैं आए दिन वाहन चालक घायल होते हैं।
गोरखपुर–सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडरपास, सर्विस लेन, चौड़ा नाला, छोटे पुल तथा बाईपास का निर्माण हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण की प्रगति ठीक नहीं है। स्पीड ब्रेकर जैसी बाधाएं, खुदी हुई मिट्टी और अधूरी नालियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। इस रूट से गुजरने पर पता चला कि संपतिहा, एकसड़वा, पुरन्दरपुर, सोहरवलिया खुर्द, फरेंदा बुजुर्ग और महदेवा बुजुर्ग अंडरपास का निर्माण पूरा हो चुका है। इन स्थानों पर सर्विस लेन और नाले का कार्य अब भी अधूरा है। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है।
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फरेंदा दक्षिणी बाईपास पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज अभी भी अधूरा है। इसको लेकर किया गया डायवर्ज़न ठीक नहीं है। यहां अक्सर लोग गिरकर घायल होते रहते हैं। डायवर्जन मार्ग बेहतर नहीं होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। फरेंदा बाईपास पर कई जगह निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। ऐसे में हालत यह है कि अगर वाहन चलाने में थोड़ी सी चूक हो गई तो दुर्घटना होना तय है। बाईपास पर मिले ज्ञानेंद्र तिवारी कहने लगे कि अभी तो निर्माण हो रहा है, इस वजह से यह समस्या बनी है। कार्यदायी संस्था थोड़ा सा गंभीर रहती तो समस्या नहीं होती। इतना कहते हुए वह आगे बढ़ गए।
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आगे बढ़ने पर फरेंदा के छतरी पुल के पास भी सड़क क्षतिग्रस्त नजर आई। यह सड़क सोनौली की तरफ जाती है वह भी खस्ताहाल है। इसको ठीक करने का काम चल रहा है। अधिकांश ओवरब्रिज के बगल वाली सड़क खराब हालत में है। भारीबैसी नर्सरी गांव के सामने भी अधूरा सड़क होने से परेशानी होती है, यहां डायवर्जन किया गया है। रानीपुर ओवरब्रिज के पास भी सड़कें टूटी हुई हैं। वहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। भैया फरेंदा ओवरब्रिज के पास डायवर्जन है। वहां नाली का निर्माण हो रहा है। ऐसे में भैया फरेंदा जाने वाले लोगों को दिक्कत होती है। इस तरह की समस्या इस रूट पर लगभग कई जगहों पर है।
हाईवे पर काम की प्रगति एक नजर में
कुसेरवा में अंडरपास का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हुआ है जबकि बाकी कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी है। कुंसेरवा उर्फ विशुनपुरा में भी अंडरपास का निर्माण जारी है। नौतनवा में निर्माणाधीन अंडरपास पर भी काम सुस्त पड़ा है। परसौनी में अंडरपास निर्माण का सिर्फ 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो सका है। राहगीर महेश कुमार बताते हैं कि यदि अंडरपास समय से बन जाते तो आवागमन काफी आसान हो जाता। वहीं, ललाइन पैसिया, मोहनापुर और मनिकौरा में अंडरपास का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। यहां प्रस्तावित नाले और सर्विस लेन की सड़क निर्माण भी अधूरी है। राहगीर मनोज कुमार ने बताया कि सर्विस लेन और नाली निर्माण के दौरान खुदी मिट्टी रात में बड़ी समस्या बन जाती है। इसी तरह कम्हरिया खुर्द और मथुरा नगर में भी अंडरपास निर्माण सुस्त है।
वर्जन
परियोजना 6 मार्च 2023 को प्रारंभ हुई थी और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। निर्माण एजेंसी की ओर से जहां-जहां नाला निर्माण और सर्विस लेन का काम शुरू किया गया है, वहां सुरक्षा और यातायात सुगमता के लिए संकेतक बोर्ड भी लगाए गए हैं। सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
-ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई गोरखपुर