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Maharajganj News: नेपाल के चितवन जंगल से कर रहे धूप की लकड़ी की तस्करी
Tue, 14 Oct 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:46 AM IST
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महराजगंज/ निचलौल। भारत-नेपाल बाॅर्डर पर इन दिनों नेपाल के चितवन जंगल से धूप की लकड़ी की तस्करी का मामला सामने आया है। दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में बैठे धंधेबाज पलक झपकते सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर कीमती लकड़ी को भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दे रहे हैं।
इस लकड़ी को कोतवाली ठूठीबारी क्षेत्र के लक्ष्मीपुर खुर्द के रास्ते लाया जा रहा है। बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों की टीम एक सूचना के आधार पर 12 अक्तूबर को 650 किलो धूप की लकड़ी बरामद कर चुकी है। टीम शीघ्र ही तस्करों को पकड़ने की तैयारी में जुट गई है।
नेपाल का चितवन जंगल एक हरा भरा होने के साथ ही जैव विविधता से भरपूर है। इस जंगल में वन्य जीव के साथ ही कीमती लकड़ियां भी पाई जाती हैं। यह जंगल भारत-नेपाल बाॅर्डर को भी छूता है। इसका फायदा दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में बैठे धंधेबाज उठा रहे हैं। तस्कर मोटी रकम कमाने के चक्कर में इस जंगल से धूप की लकड़ी की तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहे हैं। इस लकड़ी की मांग भी अधिक होती है। क्योंकि यह लकड़ी हवन-पूजन में प्रयोग की जाती है। निचलौल शहर के एक व्यापारी ने बातचीत में बताया कि धूप की लकड़ी 80 रुपये किलो से लेकर 400 रुपये किलो तक बेची जाती है। नेपाल से आने वाली धूप की लकड़ी अच्छी क्वालिटी की होता है। जो मोटी रकम में बेची जाती है। ऐसे में इस लकड़ी को नेपाल से तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में आने के बाद गोरखपुर, दिल्ली, कानपुर, मुंबई के अलावा कई बड़े मंडियों में पहुंचा दिया जाता है।
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सूत्रों के मुताबिक धूप की लकड़ी के धंधेबाज नेपाल के चितवन जंगल से काटकर सीमावर्ती इलाकों में छिपा देते हैं। फिर लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके बोरे में भर देते हैं। उसके बाद बाॅर्डर के पगडंडी रास्तों से बोरे साइकिल से सरहद पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिए जाते है। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बरामद 650 किलो धूप की लकड़ी जब्त कर कार्रवाई करने के साथ ही कई बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी गई है।
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इस लकड़ी को कोतवाली ठूठीबारी क्षेत्र के लक्ष्मीपुर खुर्द के रास्ते लाया जा रहा है। बाॅर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों की टीम एक सूचना के आधार पर 12 अक्तूबर को 650 किलो धूप की लकड़ी बरामद कर चुकी है। टीम शीघ्र ही तस्करों को पकड़ने की तैयारी में जुट गई है।
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नेपाल का चितवन जंगल एक हरा भरा होने के साथ ही जैव विविधता से भरपूर है। इस जंगल में वन्य जीव के साथ ही कीमती लकड़ियां भी पाई जाती हैं। यह जंगल भारत-नेपाल बाॅर्डर को भी छूता है। इसका फायदा दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में बैठे धंधेबाज उठा रहे हैं। तस्कर मोटी रकम कमाने के चक्कर में इस जंगल से धूप की लकड़ी की तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहे हैं। इस लकड़ी की मांग भी अधिक होती है। क्योंकि यह लकड़ी हवन-पूजन में प्रयोग की जाती है। निचलौल शहर के एक व्यापारी ने बातचीत में बताया कि धूप की लकड़ी 80 रुपये किलो से लेकर 400 रुपये किलो तक बेची जाती है। नेपाल से आने वाली धूप की लकड़ी अच्छी क्वालिटी की होता है। जो मोटी रकम में बेची जाती है। ऐसे में इस लकड़ी को नेपाल से तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में आने के बाद गोरखपुर, दिल्ली, कानपुर, मुंबई के अलावा कई बड़े मंडियों में पहुंचा दिया जाता है।
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सूत्रों के मुताबिक धूप की लकड़ी के धंधेबाज नेपाल के चितवन जंगल से काटकर सीमावर्ती इलाकों में छिपा देते हैं। फिर लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके बोरे में भर देते हैं। उसके बाद बाॅर्डर के पगडंडी रास्तों से बोरे साइकिल से सरहद पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिए जाते है। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बरामद 650 किलो धूप की लकड़ी जब्त कर कार्रवाई करने के साथ ही कई बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी गई है।