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Maharajganj News: सरकार की संपत्ति, वक्फ बोर्ड का नाम
Thu, 03 Apr 2025 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:59 PM IST
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महराजगंज। वक्फ विधेयक के पास होने की चर्चा के बीच प्रशासन जानकारी लेने में जुट गया है कि जो भी संपत्ति प्रयोग के आधार पर वक्फ के हाथों में है उनकी मौजूदा स्थिति क्या है? उस पर किसका कब्जा है? जनपद में कुल 444 सरकारी संपत्ति हैं जो वक्फ के हाथ में है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में 444 संपत्ति है, जिसे वक्फ बोर्ड प्रयोग कर रहा है। इसमें मस्जिद, मदरसा व मकतब, ईदगाह, कब्रिस्तान की भूमि शामिल है। अभिलेखों में यह सरकारी भूमि के रूप में ही दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ मस्जिद व मदरसों के आसपास की दुकानें भी सरकारी जमीन पर ही बनी हैं, जिनका किराया कहीं मस्जिद के इमाम को तो कहीं मदरसा व मकतब के मौलवी के पास आता है। इसी तरह मुड़िला में बाजार की भूमि पर दुकान बनवाकर अल्पसंख्यक समुदाय प्रयुक्त कर रहे हैं जबकि इसे हिंदू अपनी जमीन बताते हैं। लेकिन कागजों में यह सरकार के नाम पर है। विगत आठ वर्ष से यहां का मामला विवादों के घेरे में है।
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वामिक पोर्टल पर फीड है आधी-अधूरी जानकारी-
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को सूचीबद्ध करने के लिए शासन स्तर पर 2024 में राष्ट्रीय पोर्टल वामिक लाया गया। इसपर प्रदेश जनपदवार संपत्तियों का डाटा फीड कराना था, लेकिन जनपद की सिर्फ 178 संपत्तियों का डाटा इसपर फीड है। सर्वाधिक संपत्ति फरेंदा में 97 हैं। सदर में 72 संपत्ति का डाटा फीड है।
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जनपद में वक्फ बोर्ड के नाम पर कोई संपत्ति अभिलेख में नहीं दर्ज है। कुल 444 संपत्ति कागजों में सरकार की है, लेकिन उपयोग मुस्लिम समुदाय करता है इसलिए उन्हें वक्फ के दायरे में माना जाता है। शासन की तरफ से निर्देश मिलने पर अग्रिम कार्रवाई होगी।
- नीरज अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में 444 संपत्ति है, जिसे वक्फ बोर्ड प्रयोग कर रहा है। इसमें मस्जिद, मदरसा व मकतब, ईदगाह, कब्रिस्तान की भूमि शामिल है। अभिलेखों में यह सरकारी भूमि के रूप में ही दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ मस्जिद व मदरसों के आसपास की दुकानें भी सरकारी जमीन पर ही बनी हैं, जिनका किराया कहीं मस्जिद के इमाम को तो कहीं मदरसा व मकतब के मौलवी के पास आता है। इसी तरह मुड़िला में बाजार की भूमि पर दुकान बनवाकर अल्पसंख्यक समुदाय प्रयुक्त कर रहे हैं जबकि इसे हिंदू अपनी जमीन बताते हैं। लेकिन कागजों में यह सरकार के नाम पर है। विगत आठ वर्ष से यहां का मामला विवादों के घेरे में है।
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वामिक पोर्टल पर फीड है आधी-अधूरी जानकारी-
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को सूचीबद्ध करने के लिए शासन स्तर पर 2024 में राष्ट्रीय पोर्टल वामिक लाया गया। इसपर प्रदेश जनपदवार संपत्तियों का डाटा फीड कराना था, लेकिन जनपद की सिर्फ 178 संपत्तियों का डाटा इसपर फीड है। सर्वाधिक संपत्ति फरेंदा में 97 हैं। सदर में 72 संपत्ति का डाटा फीड है।
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जनपद में वक्फ बोर्ड के नाम पर कोई संपत्ति अभिलेख में नहीं दर्ज है। कुल 444 संपत्ति कागजों में सरकार की है, लेकिन उपयोग मुस्लिम समुदाय करता है इसलिए उन्हें वक्फ के दायरे में माना जाता है। शासन की तरफ से निर्देश मिलने पर अग्रिम कार्रवाई होगी।
- नीरज अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी