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Maharajganj News: मुफलिसी देखी तो इस्माइल गोल्डन बॉय बनकर सवांरने लगे तकदीर
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मुफलिसी ने इस्माइल को बना दिया गोल्डन ब्वाय
महराजगंज। करीब 19 साल के इस्माइल खान को मुफलिसी ने गोल्डन ब्वाय स्टैच्यू कलाकार बना दिया। इस्माइल को आगरा में ताजमहल के आसपास सुनहरे रंग की प्रतिमा (स्टैच्यू) बने देखा जा सकता है। उनके साथ पर्यटक फोटो खिंचवाते हैं। वीडियो बनाते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने की वजह से आजकल इस्माइल चर्चा में हैं।
महराजगंज जनपद के कोल्हुई थाना क्षेत्र के बटईडीहा परमेशरापुर गांव के रहने वाले इस्माइल खान ताजमहल के आसपास पर्यटकों को लुभाने के लिए सिर से पांव तक सुनहरे रंग का कपड़ा पहनकर और शरीर पर रंग पोतकर स्टैच्यू (प्रतिमा) बनते हैं। इस्माइल की खासियत यह है कि वह तीन घंटे तक हिलते तक नहीं हैं। उनके इस संयम और कलाकारी की वजह से पर्यटक उन्हें कई बार सच में प्रतिमा ही समझ बैठते हैं।
ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक सुनहरी रंग की प्रतिमा बने इस्माइल के साथ फोटो खिंचवाते हैं। वीडियो बनाते हैं। बातचीत करते हैं। हाथ मिलाते हैं। बदले में उन्हें पैसे देते हैं। यही इस्माइल की आमदनी है। अपनी इस कलाकारी और उससे मिलने वाली आमदनी से इस्माइल खुश हैं। उनका परिवार भी खुश है।
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गोल्डन ब्वाय ने बताया कि आगरा में स्टैच्यू बनने से जो रकम मिलती है, उससे घर बनाऊंगा। मां शायमा खातून भी बेटे के मशहूर होने से खुश हैं। शायमा कहती हैं कि इस्माइल बचपन से ही होनहार था। वह अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचा है। संवाद
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इस्माइल के परिवार में सात सदस्य
बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाले इस्माइल के परिवार में सात सदस्य हैं। माता-पिता और छोटे चार भाई-बहन। सभी भाई-बहनों में वह सबसे बड़े हैं। इस्माइल बताते हैं कि उन्होंने यूट्यूब की मदद से स्टैच्यू बनने की कला सीखी है। सोचा ऐसा करके कुछ पैसे कमा सकेंगे और परिवार की रोजी रोटी चल सकेगी।
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कला है यूरोपीय देशों में स्टैच्यू बनना
इस्माइल बताते हैं कि स्टैच्यू बनना एक कला है। यूरोपीय देशों में कलाकार स्टैच्यू बनकर लोगों को आकर्षित करते हैं। विदेशों में यह रोजी-रोटी का साधन है। भारत में यह कला अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है।
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महराजगंज। करीब 19 साल के इस्माइल खान को मुफलिसी ने गोल्डन ब्वाय स्टैच्यू कलाकार बना दिया। इस्माइल को आगरा में ताजमहल के आसपास सुनहरे रंग की प्रतिमा (स्टैच्यू) बने देखा जा सकता है। उनके साथ पर्यटक फोटो खिंचवाते हैं। वीडियो बनाते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने की वजह से आजकल इस्माइल चर्चा में हैं।
महराजगंज जनपद के कोल्हुई थाना क्षेत्र के बटईडीहा परमेशरापुर गांव के रहने वाले इस्माइल खान ताजमहल के आसपास पर्यटकों को लुभाने के लिए सिर से पांव तक सुनहरे रंग का कपड़ा पहनकर और शरीर पर रंग पोतकर स्टैच्यू (प्रतिमा) बनते हैं। इस्माइल की खासियत यह है कि वह तीन घंटे तक हिलते तक नहीं हैं। उनके इस संयम और कलाकारी की वजह से पर्यटक उन्हें कई बार सच में प्रतिमा ही समझ बैठते हैं।
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ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक सुनहरी रंग की प्रतिमा बने इस्माइल के साथ फोटो खिंचवाते हैं। वीडियो बनाते हैं। बातचीत करते हैं। हाथ मिलाते हैं। बदले में उन्हें पैसे देते हैं। यही इस्माइल की आमदनी है। अपनी इस कलाकारी और उससे मिलने वाली आमदनी से इस्माइल खुश हैं। उनका परिवार भी खुश है।
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गोल्डन ब्वाय ने बताया कि आगरा में स्टैच्यू बनने से जो रकम मिलती है, उससे घर बनाऊंगा। मां शायमा खातून भी बेटे के मशहूर होने से खुश हैं। शायमा कहती हैं कि इस्माइल बचपन से ही होनहार था। वह अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचा है। संवाद
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इस्माइल के परिवार में सात सदस्य
बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाले इस्माइल के परिवार में सात सदस्य हैं। माता-पिता और छोटे चार भाई-बहन। सभी भाई-बहनों में वह सबसे बड़े हैं। इस्माइल बताते हैं कि उन्होंने यूट्यूब की मदद से स्टैच्यू बनने की कला सीखी है। सोचा ऐसा करके कुछ पैसे कमा सकेंगे और परिवार की रोजी रोटी चल सकेगी।
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कला है यूरोपीय देशों में स्टैच्यू बनना
इस्माइल बताते हैं कि स्टैच्यू बनना एक कला है। यूरोपीय देशों में कलाकार स्टैच्यू बनकर लोगों को आकर्षित करते हैं। विदेशों में यह रोजी-रोटी का साधन है। भारत में यह कला अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है।