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Maharajganj News: तीन दिन से नहर में फंसी रही गंगा डॉल्फिन..ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती में सुरक्षित छोड़ा

Tue, 21 Jul 2026 01:58 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 01:58 AM IST
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Ganges dolphin trapped in canal for three days; safely released into Rapti River via green corridor.
रिकॉर्ड एक घंटा पांच मिनट में राप्ती में सुरक्षित छोड़ा,
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महराजगंज में धरमौली बाजार के पास नहर में फंसी थी, वीडियो वायरल होने के बाद शुरु हुआ था अभियान
रविवार को बचाव दल को को नहीं मिली सफलता, सोमवार को फिर शुरू हुए प्रयास
महराजगंज/गोरखपुर। महाराजगंज की एक नहर में तीन दिन से फंसी गर्भवती गंगा डॉल्फिन को आखिरकार सोमवार को बचा लिया गया। वन विभाग की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे बचाने में सफलता हासिल की। नहर से निकालने के बाद भटहट से राजघाट तक 25 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक घंटा पांच मिनट में राप्ती नदी में उसे सुरक्षित छोड़ दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, त्रिवेणी नदी से भटककर एक गर्भवती डॉल्फिन शनिवार को देवरिया कैनाल के रास्ते महाराजगंज में धरमौली बाजार के पास नहर तक पहुंच गई थी। काफी लंबी व भारी होने के कारण वह वहां से निकल नहीं पा रही थी और तीन दिन तक फंसी रही। शनिवार को इसका वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी अमला सक्रिय हुआ। गोरखपुर पुलिस, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिडि़याघर और लखनऊ से आए विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर रविवार को बचाव अभियान शुरू किया पर सफलता नहीं मिली। सोमवार को दोबारा अभियान शुरू किया गया और कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित राप्ती में पहुंचाया गया। डीएफओ गोरखपुर शुभम सिंह ने बताया कि डॉल्फिन पूरी तरह सुरक्षित है।
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वजन 147 किलो, लंबाई सात फीट दो इंच, जांच में पता चला गर्भवती है
नहर से निकाली गई डॉल्फिन का विशेष एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार किया गया। उसके स्वास्थ्य की जांच की गई तो पता चला कि वह सात फीट दो इंच लंबी है। वजन 147 किलोग्राम है और वह गर्भवती है। विशेषज्ञों ने तत्काल उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ने की सलाह दी। इसी के बाद ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया गया।
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बॉक्स स्टोरी
तेज बहाव, अधिक जलस्तर व लगातार स्थान बदलती डॉल्फिन...
चुनौतियां पर रणनीति की जीत
एसडीओ विनीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी का तेज बहाव और डॉल्फिन के लगातार स्थान बदलने के कारण अभियान काफी कठिन रहा। नहर का जलस्तर भी ज्यादा था। इसी कारण रविवार को टीम विफल हो गई। इसके बाद संयुक्त रणनीति बनाई गई और सफलता मिल गई। बताया जा रहा है कि डॉल्फिन शनिवार को मछुआरों के जाल में फंसने के बाद चर्चा में आई थी। हालांकि ग्रामीणों ने उसे जाल से निकालकर दोबारा नहर में छोड़ दिया था लेकिन उसके बाद से वन विभाग लगातार उसकी निगरानी और रेस्क्यू अभियान में जुटा रहा।

सफल अभियान में इनका योगदान
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर डॉ. बीसी ब्रह्मा के निर्देशन में चले अभियान में गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह, टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। हाटा वन विभाग की अधिकारी अमृता सिंह भी शामिल रहीं।


प्राकृतिक रास्ता बाधित होने पर बनाते हैं ग्रीन कॉरिडोर
डॉल्फिन (विशेषकर गंगा डॉल्फिन) के संरक्षण के लिए ग्रीन कॉरिडोर या ''''वन्यजीव गलियारा'''' मुख्यतः उन क्षेत्रों में बनाया जाता है, जहां मानवीय हस्तक्षेप, बांधों, या नहरों के कारण उनका प्राकृतिक रास्ता बाधित हो जाता है। गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के लिए पूरे देश में ''''प्रोजेक्ट डॉल्फिन'''' भी चलाया जा रहा है।
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