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मुआवजे को लेकर किसानों ने फंसाया पेच, बढ़ीं मुश्किलें
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मुआवजे को लेकर किसानों ने फंसाया पेच, बढ़ीं मुश्किलें
महराजगंज। सोनौली में एकीकृत चेकपोस्ट के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर पेच फंस गया है। ज्यादातर किसान अधिक मुआवजा की मांग पर डटे हैं। उनका कहना है कि अगर उचित मुआवजा नहीं मिला तो अपनी जमीन नहीं देंगे। किसानों ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है।
एकीकृत चेेकपोस्ट की जमीन को लेकर मामला ठंडे बस्ते हैं। पेंच फसने के वजह से इस दिशा में अभी कुछ खास तेजी नहीं दिख रही है। सोनौली के किसानों ने इस मसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। वर्ष 2004 से चेक पोस्ट सोनौली में बनाने के लिए प्रस्तावित है। किसान रामजीत प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2018 में 84 लाख प्रति एकड़ मुआवजे पर प्रशासन की ओर से सहमति बनी थी। अब 17 लाख प्रति एकड़ मुआवजा देने की बात की जा रही है।
कम रकम मिलेगी तो दूसरी जगह जमीन खरीदने में परेशानी होगी। किसान विनोद कुमार ने बताया कि इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट में हम लोगों की जमीन भी आई हैं। हम पांच भाई हैं। सबने पूर्व में हुए बैठक में सहमति दी थी, लेकिन अब जो मुआवजे की धनराशि दी जा रही है। वह हम लोगों को मंजूर नहीं है।
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किसान राम अचल ने बताया कि कई साल बीत गए चेकपोस्ट के नाम पर कई बार बातचीत हुई लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला जो मुआवजे की धनराशि तय हुई थी। उसी के अनुसार हम लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए, अन्यथा हम आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसान राम आसरे ने बताया कि सरकार पूर्व में हुई सहमति से हट रही है। किसानों ने डीएम और राजस्व अधिकारियों के जिस सहमति पत्र पर सहमति जताई थी, उसी के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए।
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डीएम डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कहा कि शासन से मिले निर्देशों के क्रम में ही इस मसले पर कोई कार्यवाही हो सकती है। गाइड लाइन के अनुसार ही किसानों को मुआवजा मिलेगा।
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महराजगंज। सोनौली में एकीकृत चेकपोस्ट के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर पेच फंस गया है। ज्यादातर किसान अधिक मुआवजा की मांग पर डटे हैं। उनका कहना है कि अगर उचित मुआवजा नहीं मिला तो अपनी जमीन नहीं देंगे। किसानों ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है।
एकीकृत चेेकपोस्ट की जमीन को लेकर मामला ठंडे बस्ते हैं। पेंच फसने के वजह से इस दिशा में अभी कुछ खास तेजी नहीं दिख रही है। सोनौली के किसानों ने इस मसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। वर्ष 2004 से चेक पोस्ट सोनौली में बनाने के लिए प्रस्तावित है। किसान रामजीत प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2018 में 84 लाख प्रति एकड़ मुआवजे पर प्रशासन की ओर से सहमति बनी थी। अब 17 लाख प्रति एकड़ मुआवजा देने की बात की जा रही है।
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कम रकम मिलेगी तो दूसरी जगह जमीन खरीदने में परेशानी होगी। किसान विनोद कुमार ने बताया कि इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट में हम लोगों की जमीन भी आई हैं। हम पांच भाई हैं। सबने पूर्व में हुए बैठक में सहमति दी थी, लेकिन अब जो मुआवजे की धनराशि दी जा रही है। वह हम लोगों को मंजूर नहीं है।
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किसान राम अचल ने बताया कि कई साल बीत गए चेकपोस्ट के नाम पर कई बार बातचीत हुई लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला जो मुआवजे की धनराशि तय हुई थी। उसी के अनुसार हम लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए, अन्यथा हम आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसान राम आसरे ने बताया कि सरकार पूर्व में हुई सहमति से हट रही है। किसानों ने डीएम और राजस्व अधिकारियों के जिस सहमति पत्र पर सहमति जताई थी, उसी के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए।
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डीएम डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कहा कि शासन से मिले निर्देशों के क्रम में ही इस मसले पर कोई कार्यवाही हो सकती है। गाइड लाइन के अनुसार ही किसानों को मुआवजा मिलेगा।