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Maharajganj News: पगडंडी से दिल्ली तक पहुंच रहा विदेशी तरबूज का बीज
Mon, 12 Aug 2024 02:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 12 Aug 2024 02:22 AM IST
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भारत-नेपाल सीमा।
महराजगंज/सोनौली। नेपाल से तरबूज का बीज दिल्ली तक पहुंच रहा है। शनिवार की देर रात नौतनवा कस्टम के अधिकारियों ने नेपाल से लाया गया विदेशी तरबूज का बीज बरामद किया था। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के कुनसेरवा बाईपास करीब ट्रक से बीज बरामद हुआ था। रविवार को कस्टम ने ट्रक सीज कर मालिक के खिलाफ सम्मन जारी किया है।
सूत्रों की माने तो ट्रक को दिल्ली और कानपुर भेजने की योजना थी। इसकी भनक कस्टम को लगी तो तस्करों की पोल खुल गई। दो माह पहले भी तरबूज का बीज झुलनीपुर बॉर्डर से कस्टम की टीम ने बरामद किया था। तरबूज के बीज का प्रयोग दवा बनाने के लिए किया जाता है। इस वजह से इसकी मांग अधिक है। तरबूज के बीज में प्रोटीन, आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, विटामिन बी नाइन जैसे तत्व मौजूद होते हैं।
तरबूज के बीज खाने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। भारत में आयात शुल्क अधिक है, जिसके कारण इसे अमेरिका से नेपाल में आयात कर फिर इसे भारत में पगडंडियों के रास्ते मंगाया जाता है। दूसरे भारतीय रुपये के मुकाबले नेपाली मुद्रा सस्ती होने के कारण दामों में बहुत फर्क आ जाता है। इसमें बड़े तस्करों को शामिल होने की आशंका है, जिसकी जांच कस्टम विभाग कर रहा है।
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कस्टम अधीक्षक एसके पटेल ने बताया कि तरबूज के बीज को ट्रक सहित सीज कर गाड़ी मालिक को समन जारी किया गया है। तस्करों की तलाश की जा रही है।
ऐसे भारत में पहुंचता है तरबूज का बीज
तरबूज का बीज अमेरिका से पहले नेपाल और फिर भारत में लाया जाता है। तस्कर तड़के सुबह और अंधेरे में सीमा पर गाड़ियां तैयार रखते हैं। जैसे ही इन्हें मौका मिलता है सीमा पार कराकर सीमावर्ती गांव में बने गोदामों में डंप कर उक्त खड़े वाहनों से भारत के महानगरों में भेज देते हैं। बताया जा रहा है कि सीमावर्ती क्षेत्र के ज्यादातर युवा तस्करों के लिए कैरियर का काम करते हैं।
तस्कर स्थानीय लोगों का करते हैं इस्तेमाल
गेहूं, चावल, धान, चीनी, प्याज सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भारत सरकार की ओर से प्रतिबंध सहित नेपाल भंसार में भारी भरकम कस्टम शुल्क के कारण तस्करी हो रही है। ऐसे ही नेपाल से कबाड़, लाइटर, सुपारी के बाद अब नेपाल से प्रतिबंधित तरबूज के बीज भारत में आ रहे हैं। प्रतिकिलो 300 रुपये मुनाफे के कारण हाल के समय में तरबूज की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। नेपाल में उक्त बीज 500 प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा है जबकि भारत में 800 प्रति किलो की दर पर बिक रहा है। सूत्र बताते हैं कि कैरियरों को एक दिन में एक हजार रुपये की बचत हो जा रही है। साइकिल और बाइक से भारत से नेपाल और नेपाल से भारत के सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए इन्हें कैरिंग चार्ज के रूप में 500 से 1000 रुपये मिल जाते हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के नियम
भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के निर्धारित पॉइंट बने हुए हैं, जहां से कोई भी आयातक बगैर आई इसी सर्टिफिकेट (एक्सपोर्ट इंपोर्ट कोड) के आयात नहीं कर सकता, साथ ही भारत और नेपाल में आयात और निर्यात के लिए कड़े नियम हैं। नेपाल से भारत में आयात के लिए नेपाली ओरिजिन होना जरूरी है। नेपाल ओरिजिन नहीं रहने पर उक्त सभी विदेशी समान भारत में आयात नहीं हो सकता है। जिसके कारण भारत नेपाल के सीमावर्ती पगडंडियों के रास्ते इसकी तस्करी हो रही है।
भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाते हैं तस्कर
पगडंडियों से बड़े वाहन ले जाना मुश्किल होता है। इसलिए तस्करी के लिए बाइक सरहद पार करना सबसे आसान तरीका बन गया है। सूत्रों की माने तो दर्जनों युवक इस काम में लगे हुए हैं। 15 बाइक से रोज ढुलाई करते हैं। इधर से चावल और गेहूं लेकर जाते हैं। नेपाल से तरबूज के बीज भारत में लेकर आते हैं।
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सूत्रों की माने तो ट्रक को दिल्ली और कानपुर भेजने की योजना थी। इसकी भनक कस्टम को लगी तो तस्करों की पोल खुल गई। दो माह पहले भी तरबूज का बीज झुलनीपुर बॉर्डर से कस्टम की टीम ने बरामद किया था। तरबूज के बीज का प्रयोग दवा बनाने के लिए किया जाता है। इस वजह से इसकी मांग अधिक है। तरबूज के बीज में प्रोटीन, आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, विटामिन बी नाइन जैसे तत्व मौजूद होते हैं।
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तरबूज के बीज खाने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। भारत में आयात शुल्क अधिक है, जिसके कारण इसे अमेरिका से नेपाल में आयात कर फिर इसे भारत में पगडंडियों के रास्ते मंगाया जाता है। दूसरे भारतीय रुपये के मुकाबले नेपाली मुद्रा सस्ती होने के कारण दामों में बहुत फर्क आ जाता है। इसमें बड़े तस्करों को शामिल होने की आशंका है, जिसकी जांच कस्टम विभाग कर रहा है।
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कस्टम अधीक्षक एसके पटेल ने बताया कि तरबूज के बीज को ट्रक सहित सीज कर गाड़ी मालिक को समन जारी किया गया है। तस्करों की तलाश की जा रही है।
ऐसे भारत में पहुंचता है तरबूज का बीज
तरबूज का बीज अमेरिका से पहले नेपाल और फिर भारत में लाया जाता है। तस्कर तड़के सुबह और अंधेरे में सीमा पर गाड़ियां तैयार रखते हैं। जैसे ही इन्हें मौका मिलता है सीमा पार कराकर सीमावर्ती गांव में बने गोदामों में डंप कर उक्त खड़े वाहनों से भारत के महानगरों में भेज देते हैं। बताया जा रहा है कि सीमावर्ती क्षेत्र के ज्यादातर युवा तस्करों के लिए कैरियर का काम करते हैं।
तस्कर स्थानीय लोगों का करते हैं इस्तेमाल
गेहूं, चावल, धान, चीनी, प्याज सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भारत सरकार की ओर से प्रतिबंध सहित नेपाल भंसार में भारी भरकम कस्टम शुल्क के कारण तस्करी हो रही है। ऐसे ही नेपाल से कबाड़, लाइटर, सुपारी के बाद अब नेपाल से प्रतिबंधित तरबूज के बीज भारत में आ रहे हैं। प्रतिकिलो 300 रुपये मुनाफे के कारण हाल के समय में तरबूज की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। नेपाल में उक्त बीज 500 प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा है जबकि भारत में 800 प्रति किलो की दर पर बिक रहा है। सूत्र बताते हैं कि कैरियरों को एक दिन में एक हजार रुपये की बचत हो जा रही है। साइकिल और बाइक से भारत से नेपाल और नेपाल से भारत के सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए इन्हें कैरिंग चार्ज के रूप में 500 से 1000 रुपये मिल जाते हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के नियम
भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के निर्धारित पॉइंट बने हुए हैं, जहां से कोई भी आयातक बगैर आई इसी सर्टिफिकेट (एक्सपोर्ट इंपोर्ट कोड) के आयात नहीं कर सकता, साथ ही भारत और नेपाल में आयात और निर्यात के लिए कड़े नियम हैं। नेपाल से भारत में आयात के लिए नेपाली ओरिजिन होना जरूरी है। नेपाल ओरिजिन नहीं रहने पर उक्त सभी विदेशी समान भारत में आयात नहीं हो सकता है। जिसके कारण भारत नेपाल के सीमावर्ती पगडंडियों के रास्ते इसकी तस्करी हो रही है।
भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाते हैं तस्कर
पगडंडियों से बड़े वाहन ले जाना मुश्किल होता है। इसलिए तस्करी के लिए बाइक सरहद पार करना सबसे आसान तरीका बन गया है। सूत्रों की माने तो दर्जनों युवक इस काम में लगे हुए हैं। 15 बाइक से रोज ढुलाई करते हैं। इधर से चावल और गेहूं लेकर जाते हैं। नेपाल से तरबूज के बीज भारत में लेकर आते हैं।