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Maharajganj News: गेहूं से दोगुने दाम पर बिक रहा आटा...सफेद रोटी खाकर बीमार हो रहे लोग

Thu, 04 Apr 2024 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 04 Apr 2024 01:21 AM IST
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Flour is being sold at double the price of wheat...people are falling ill after eating white bread
मऊपाकड़ चौराहे पर स्थित आटा चक्की में गेहूं डालता दुकानदार
महराजगंज। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय का अभाव है। इसलिए बहुत से लोग गेहूं पिसवाने के चक्कर में नहीं पड़ते हैं और बाजार से गेहूं से दोगुने दाम पर पैकेट का आटा खरीदकर खाते हैं। वह भी सेहत के लिए बेहतर नहीं होता। यह देखते हुए पैकेट के आटे का कारोबार भी बढ़ गया है। हर माह करीब 10 लाख रुपये का कारोबार होता है। लोगों को नहीं पता कि वह सफेद रोटी के चक्कर में धीरे-धीरे बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार चोकरयुक्त आटा सेहत के लिए बेहतर होता है, लेकिन अब लोग चोकरयुक्त आटे का उपयोग कम कर दिए हैं। शहर में 10 से 12 आटा चक्की संचालित होते हैं। फ्लोर मिल में आटे को बेहतर बनाने के लिए गेहूं की ठीक से छटाई होती है। कारोबारी किसानों से 18 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव से गेहूं की खरीदारी करते हैं। आटा बनने के बाद 40 से 42 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है। दाम तो बढ़ा ही, इन सबके चक्कर में सबसे बड़ा नुकसान यह है कि शहरी लोग ज्यादा सफेद रोटी की चाहत में रिफाइंड आटे की रोटी खाकर बीमार हो रहे हैं।
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जिला अस्पताल के डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि आटे में फाइवर की मात्रा बहुत कम रह जाती है, जबकि कार्बाेहाइड्रेट बढ़ा रहता है। इसका असर धीरे-धीरे लीवर पर पड़ रहा है। इससे लोगों का पाचन तंत्र खराब हो रहा है। ओपीडी में ऐसे मरीज आते हैं। इन दिनों लोगों की जीवनशैली में बदलाव आने के कारण किसी के पास समय नहीं है। समय बचाने के चक्कर में पैकेट के आटे का उपयोग ज्यादा हो रहा है। सुभाष नगर के डॉ. शांति शरण मिश्र कहते हैं कि भागदौड़ की जिंदगी में लोग गेहूं पिसवाने से भी दूरी बनाने लगे हैं। पैकेट का आटा खरीदने की लत बढ़ी तो बाजार में परिष्कृत आटा (जिसमें चोकर की मात्र कम होती है) आने लगा।
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गेहूं एकत्र कर मिल को भेज दिया जाता
कारोबारी रामकेश जायसवाल ने बताया कि आटे की कीमत पर नियंत्रण के लिए मिल मालिकों ने सीधे किसानों से गेहूं खरीदना शुरू कर दिया है। गांव जाकर किसानों से 18 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव से गेहूं खरीद लेते हैं। मांग के अनुसार गेहूं एकत्र कर मिल को भेज दिया जाता है। इससे मिल को आसानी से गेहूं उपलब्ध हो जाता है। कारोबारियों से भी मिल मालिक रेट तय कर गेहूं की खरीदारी करते हैं। गल्ला कारोबारी जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि इस वक्त 18 से 20 रुपये किलो तक गेहूं बिक रहा है। सस्ता खरीदने के चक्कर में मिल मालिक किसानों से गेहूं सीधे खरीदते हैं। गल्ला मंडी से कारोबारी खरीदारी कम करते हैं। मंड़ी में आवक कम हो गई है। गौनरिया राजा के मनीष ने बताया कि गांव में तो बिचौलियों ने डेरा जमा लिया है। गेहूं की कटाई होते ही खेत से ही खरीद लेते हैं। तुरंत रकम भी मिल जाती है। यही कारण है कि अब सरकारी क्रय केंद्रों पर भी खरीद कम हो रही है।
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