{"_id":"62fbe8046a084229153d536a","slug":"first-hoisted-the-tricolor-then-raised-brother-s-meaning-maharajganj-news-gkp4472291132","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: पहले फहराया तिरंगा, फिर उठाई भाई की अर्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: पहले फहराया तिरंगा, फिर उठाई भाई की अर्थी
Wed, 17 Aug 2022 11:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 11:11 AM IST
सार
प्रधानाध्यापक भीमसेन के सामने धर्मसंकट था। घर में भाई की अर्थी पड़ी थी तो स्कूल में तिरंगा फहराने का समय हो रहा था। थोड़ी देर सोचने के बाद वे तैयार हुए और स्कूल के लिए निकल पड़े। भीमसेन तय समय पर स्कूल पहुंचे और पूरे दायित्व के साथ तिरंगा फहराया।
विज्ञापन
ध्वजारोहण के दौरान प्रधानाध्यापक भीमसेन गौतम (गुलाबी शर्ट में)।
- फोटो : MAHARAJGANJ
विस्तार
फरेंदा के गोपलापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक भीमसेन गौतम के लिए स्वतंत्रता दिवस का दिन काफी धर्मसंकट वाला रहा। एक ओर उन्हें स्कूल में तिरंगा फहराना था तो दूसरी ओर घर में भाई की अर्थी पड़ी थी, जिसका उन्हें अंतिम संस्कार करना था।
विज्ञापन
भीमसेन कुछ देर भाई के शव के पास बैठे रहे, फिर घर के अंदर गए और तैयार होकर स्कूल के लिए निकल पड़े। वहां पहले राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाया फिर घर लौटे और भाई की अर्थी लेकर श्मशान घाट निकल पड़े।
विज्ञापन
भीमसेन गौतम फरेंदा क्षेत्र के गोपलापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक हैं। उनके छोटे भाई संघप्रिय गौतम कई दिनों से बीमार थे। घर के लोग उन्हें इलाज के लिए मुंबई ले गए थे, जहां 14 अगस्त को उनकी मौत हो गई। परिजन स्वतंत्रता दिवस के दिन सोमवार को सुबह उनका शव लेकर घर पहुंचे। प्रधानाध्यापक उस समय तिरंगा फहराने के लिए स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे। शव गांव लाते ही घर में रोना-धोना लग गया, जबकि गांव के लोग अर्थी की तैयारी में जुट गए।
विज्ञापन
प्रधानाध्यापक भीमसेन के सामने धर्मसंकट था। घर में भाई की अर्थी पड़ी थी तो स्कूल में तिरंगा फहराने का समय हो रहा था। थोड़ी देर सोचने के बाद वे तैयार हुए और स्कूल के लिए निकल पड़े। भीमसेन तय समय पर स्कूल पहुंचे और पूरे दायित्व के साथ तिरंगा फहराया। उन्होंने देश के वीर सपूतों को नमन किया और बच्चों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने की शिक्षा दी। इसके बाद वे घर पहुंचे और भाई की अर्थी को लेकर करमैन घाट निकल पड़े। वहां उन्होंने अपने छोटे भाई का अंतिम संस्कार किया। संवाद