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Maharajganj News: क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर... विकास को मिलेगी गति
Wed, 11 Dec 2024 04:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 11 Dec 2024 04:19 AM IST
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महराजगंज। आनंदनगर-महराजगंज-घुघली रेल मार्ग बनने के बाद क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बीते दिनों पुल की स्वीकृत मिल चुकी है। रेलवे से जिला मुख्यालय जुड़ने के बाद कारोबारियों को बाहर से सामान मंगाना आसान हो जाएगा। बहुप्रतीक्षित रेल लाइन बिछ जाने के बाद पंजाब और दिल्ली से असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों की ओर चलने वाली ज्यादातर रेलगाड़ियां इसी रास्ते से चलने की संभावना जताई जा रही है। इससे जहां रेल मार्ग से दूरी कम हो जाएगी, वहीं रेलवे की ढुलाई लागत में भी कमी आएगी। क्षेत्र के लोगों को इससे काफी फायदा होगा। भारतीय रेलवे के नेटवर्क से महराजगंज जनपद मुख्यालय अलग-थलग पड़ा था। यहां के लोगों को 60 किमी दूर गोरखपुर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। जिले की व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। इस नई लाइन के बिछ जाने के बाद यहां के लोगों का जीवन स्तर बदल जाएगा।
आजाद नगर के दशरथ गुप्ता कहते हैं कि अभी 20 किमी घुघली और 30 किमी फरेंदा जाने के बाद ही ट्रेन की सुविधा मिलती है। गोरखपुर जिले से दो अक्तूबर 1989 को अलग होकर महराजगंज जिला बनने के बाद यहां के 30 लाख लोगों को विकास की आस बढ़ गई है। प्रस्तावित 52.7 किमी लंबाई की इस रेल लाइन से विकास को गति मिलेगी। शस्त्री नगर के अभिषेक विश्वकर्मा कहते हैं कि जिले की उत्तरी सीमा नेपाल और दक्षिणी गोरखपुर से मिलती है। जबकि, पूर्वी सीमा पर बिहार और पश्चिमी सीमा सिद्धार्थनगर जिले से लगी हुई है। इस नई रेललाइन के बन जाने से 11 नगर निकायों वाले इस जिले की कारोबारी गतिविधियों को बल मिलेगा। नारायणी, गंडक, राप्ती, चंदन, प्यास, घोंघी और डंडा जैसी नदियों के किनारे बसे यहां के लोगों के लिए रेल लाइन वरदान साबित होगी।
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आजाद नगर के दशरथ गुप्ता कहते हैं कि अभी 20 किमी घुघली और 30 किमी फरेंदा जाने के बाद ही ट्रेन की सुविधा मिलती है। गोरखपुर जिले से दो अक्तूबर 1989 को अलग होकर महराजगंज जिला बनने के बाद यहां के 30 लाख लोगों को विकास की आस बढ़ गई है। प्रस्तावित 52.7 किमी लंबाई की इस रेल लाइन से विकास को गति मिलेगी। शस्त्री नगर के अभिषेक विश्वकर्मा कहते हैं कि जिले की उत्तरी सीमा नेपाल और दक्षिणी गोरखपुर से मिलती है। जबकि, पूर्वी सीमा पर बिहार और पश्चिमी सीमा सिद्धार्थनगर जिले से लगी हुई है। इस नई रेललाइन के बन जाने से 11 नगर निकायों वाले इस जिले की कारोबारी गतिविधियों को बल मिलेगा। नारायणी, गंडक, राप्ती, चंदन, प्यास, घोंघी और डंडा जैसी नदियों के किनारे बसे यहां के लोगों के लिए रेल लाइन वरदान साबित होगी।
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