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Maharajganj News: छूटे 313 मजरों में पहुंचेगी बिजली, दूर होगी मुश्किल
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महराजगंज। जिले में सौभाग्य योजना के तहत अब तक बिजली से वंचित रहे मजरों को रोशन करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। शासन के निर्देश पर आरडीएसएस (रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) योजना के तहत जिले के कुल 313 छूटे हुए मजरों को बिजली पहुंचाने के लिए चिह्नित किया गया है। अब तक 21 मजरों में बिजली पहुंच चुकी है।वहीं 51 मजरों में कार्य तेजी से चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले की बिजली व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए चार डिवीजनों में विभाजित किया गया है। महराजगंज, आनंदनग, नौतनवा और निचलौल डिवीजन शामिल हैं। इन चारों डिवीजनों के कुल 882 गांवों में स्थित 313 मजरों को बिजली निगम की ओर से चिंहित किया गया था। आरडीएसएस योजना के माध्यम से इन मजरों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बिजली पहुंचाने के कार्य के दौरान मजरों में बिजली के पोल, 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन लाइन, एलटी लाइन और 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफाॅर्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन मजरों में रहने वाले पात्र उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली कनेक्शन भी प्रदान किया जा रहा है, ताकि उन्हें स्थायी और नियमित बिजली आपूर्ति मिल सके। आंकड़ों के अनुसार, आरडीएसएस योजना के तहत जिले में कुल 6,654 बिजली के पोल लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1,710 पोल स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 4,944 पोल लगना अभी शेष है। पोल लगाने के साथ-साथ लाइन खींचने और ट्रांसफार्मर स्थापित करने का कार्य भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इस योजना के तहत कुल 2,471 उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए उपभोक्ताओं को झटपट योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। अब तक 1,048 उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें से 630 उपभोक्ताओं के घरों पर कनेक्शन और मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि 1,423 उपभोक्ताओं का कनेक्शन अभी शेष है।
बैदा निवासी राधेश्याम ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत उनके खेत के पास बिजली के खंभे और तार तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उनके घर पर बिजली कनेक्शन और मीटर नहीं लगाया गया है।
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नामित कार्यदायी संस्था विश्व समुंद्रा के प्रोजेक्ट मैनेजर ब्रम्हानंद मौर्य ने बताया कि आरडीएसएस योजना का उद्देश्य अधूरे विद्युतीकरण कार्यों को पूरा करना है।
अभी तक बिजली कनेक्शन के लिए जिन उपभोक्ताओं ने आवेदन नहीं किया है, वे जल्द से जल्द झटपट योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करें। आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को नियमानुसार कनेक्शन और मीटर उपलब्ध कराया जाएगा।
- वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता
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जानकारी के अनुसार, जिले की बिजली व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए चार डिवीजनों में विभाजित किया गया है। महराजगंज, आनंदनग, नौतनवा और निचलौल डिवीजन शामिल हैं। इन चारों डिवीजनों के कुल 882 गांवों में स्थित 313 मजरों को बिजली निगम की ओर से चिंहित किया गया था। आरडीएसएस योजना के माध्यम से इन मजरों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बिजली पहुंचाने के कार्य के दौरान मजरों में बिजली के पोल, 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन लाइन, एलटी लाइन और 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफाॅर्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन मजरों में रहने वाले पात्र उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली कनेक्शन भी प्रदान किया जा रहा है, ताकि उन्हें स्थायी और नियमित बिजली आपूर्ति मिल सके। आंकड़ों के अनुसार, आरडीएसएस योजना के तहत जिले में कुल 6,654 बिजली के पोल लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1,710 पोल स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 4,944 पोल लगना अभी शेष है। पोल लगाने के साथ-साथ लाइन खींचने और ट्रांसफार्मर स्थापित करने का कार्य भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इस योजना के तहत कुल 2,471 उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए उपभोक्ताओं को झटपट योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। अब तक 1,048 उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें से 630 उपभोक्ताओं के घरों पर कनेक्शन और मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि 1,423 उपभोक्ताओं का कनेक्शन अभी शेष है।
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बैदा निवासी राधेश्याम ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत उनके खेत के पास बिजली के खंभे और तार तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उनके घर पर बिजली कनेक्शन और मीटर नहीं लगाया गया है।
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नामित कार्यदायी संस्था विश्व समुंद्रा के प्रोजेक्ट मैनेजर ब्रम्हानंद मौर्य ने बताया कि आरडीएसएस योजना का उद्देश्य अधूरे विद्युतीकरण कार्यों को पूरा करना है।
अभी तक बिजली कनेक्शन के लिए जिन उपभोक्ताओं ने आवेदन नहीं किया है, वे जल्द से जल्द झटपट योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करें। आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को नियमानुसार कनेक्शन और मीटर उपलब्ध कराया जाएगा।
- वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता