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Maharajganj News: आरोग्य मेले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर डीएम नाराज, मांगी रिपोर्ट
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महराजगंज। आरोग्य मेला में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति से मरीजों को परेशानी हो रही है। अमर उजाला अखबार प्रकाशित खबर ‘’आरोग्य मेला: विशेषज्ञ डाक्टरों के अभाव में परेशान हुए मरीज’’ का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को निर्देशित किया है कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीएमओ कार्यालय की ओर से जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में वर्तमान समय में कुल 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के 205 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 78 चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इससे स्पष्ट है कि डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति और अधिक चिंताजनक है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हड्डी रोग (ऑर्थो) और त्वचा रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत ही नहीं है। पूरे जनपद में त्वचा विशेषज्ञ का केवल एक पद सृजित है। इस पद पर डॉ. अरुण कुमार द्विवेदी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञों की कमी के कारण चर्म रोग सहित अन्य जटिल बीमारियों के मरीजों का केवल प्राथमिक उपचार ही किया जा पा रहा है। गंभीर मामलों में मरीजों को जिला संयुक्त चिकित्सालय रेफर करना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी के कारण सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि शीघ्र समाधान के लिए कारगर पहल की जाए ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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सीएमओ कार्यालय की ओर से जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में वर्तमान समय में कुल 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के 205 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 78 चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इससे स्पष्ट है कि डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति और अधिक चिंताजनक है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हड्डी रोग (ऑर्थो) और त्वचा रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत ही नहीं है। पूरे जनपद में त्वचा विशेषज्ञ का केवल एक पद सृजित है। इस पद पर डॉ. अरुण कुमार द्विवेदी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
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विशेषज्ञों की कमी के कारण चर्म रोग सहित अन्य जटिल बीमारियों के मरीजों का केवल प्राथमिक उपचार ही किया जा पा रहा है। गंभीर मामलों में मरीजों को जिला संयुक्त चिकित्सालय रेफर करना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी के कारण सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि शीघ्र समाधान के लिए कारगर पहल की जाए ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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