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पिता चला रहा था ट्रैक्टर, रोटावेटर में फंसकर चली गई बेटे की जान
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Sat, 08 Dec 2018 12:30 AM IST
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पिता चला रहा था ट्रैक्टर, रोटावेटर में फंसकर चली गई बेटे की जान
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। पिता ट्रैक्टर चला था और रोटावेटर में फंसकर बेटे की जान चली गई। आंखों के सामने जिगर के टुकड़े को दम तोड़ता देख पिता बेहोश हो गया। परिवार में कोहराम मच गया। मौके पर पूरा गांव जमा हो गया।
घटना पनियरा क्षेत्र के धनखरी गांव की है। शुक्रवार को धनखरी गांव के सिवान में सुबह करीब 8:30 बजे सुरेंद्र गौड अपने ट्रैक्टर से गांव के शंकर के खेत को रोटावेटर से जोत रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर में तेल डालने के लिए चालक सुरेंद्र का पुत्र गणेश (14) आ गया। ट्रैक्टर में तेल डालकर गणेश वाहन पर ज्यों ही बैठा तो ट्रैक्टर आगे बढ़ते ही वह अनियंत्रित होकर गिर पड़ा। इससे ट्रैक्टर में पीछे स्थित रोटावेटर की चपेट में आ गया। जिससे गणेश की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी होते ही मौके पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए।
मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि सुरेंद्र गौड के तीन लड़के हैं। जिसमें एक लड़का मुंबई में रहता है। दो लड़के घर पर ही रह कर अपने ट्रैक्टर से लोगों का काम करते है। गणेश सबसे छोटा था। वह पूरे परिवार का दुलारा था। वह गांव में जीरा देवी बाबा रामदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र था। वह पढ़ने में होनहार था। वही ट्रैक्टर का हिसाब किताब रखता था। परिजनों ने आननफानन में गांव के बाहर एक पोखरी के पास अंतिम संस्कार कर दिया। पिता सुरेंद्र रह कर बेहोश हो जा रहे थे। वह जब भी होश में आते यही कहते कि काश बेटा ट्रैक्टर में तेल डालने नहीं आया होता। काश उन्होंने बेटे को ट्रैक्टर में बैठने नहीं दिया होता। आंखों के सामने जिगर के टुकडे़ की मौत की बात सोचकर वह बेहोश हो जा रहे थे। घर वालों ने बताया कि गणेश पढ़ाई कर डॉक्टर बनाना चाहता था।
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घटना पनियरा क्षेत्र के धनखरी गांव की है। शुक्रवार को धनखरी गांव के सिवान में सुबह करीब 8:30 बजे सुरेंद्र गौड अपने ट्रैक्टर से गांव के शंकर के खेत को रोटावेटर से जोत रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर में तेल डालने के लिए चालक सुरेंद्र का पुत्र गणेश (14) आ गया। ट्रैक्टर में तेल डालकर गणेश वाहन पर ज्यों ही बैठा तो ट्रैक्टर आगे बढ़ते ही वह अनियंत्रित होकर गिर पड़ा। इससे ट्रैक्टर में पीछे स्थित रोटावेटर की चपेट में आ गया। जिससे गणेश की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी होते ही मौके पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए।
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मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि सुरेंद्र गौड के तीन लड़के हैं। जिसमें एक लड़का मुंबई में रहता है। दो लड़के घर पर ही रह कर अपने ट्रैक्टर से लोगों का काम करते है। गणेश सबसे छोटा था। वह पूरे परिवार का दुलारा था। वह गांव में जीरा देवी बाबा रामदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र था। वह पढ़ने में होनहार था। वही ट्रैक्टर का हिसाब किताब रखता था। परिजनों ने आननफानन में गांव के बाहर एक पोखरी के पास अंतिम संस्कार कर दिया। पिता सुरेंद्र रह कर बेहोश हो जा रहे थे। वह जब भी होश में आते यही कहते कि काश बेटा ट्रैक्टर में तेल डालने नहीं आया होता। काश उन्होंने बेटे को ट्रैक्टर में बैठने नहीं दिया होता। आंखों के सामने जिगर के टुकडे़ की मौत की बात सोचकर वह बेहोश हो जा रहे थे। घर वालों ने बताया कि गणेश पढ़ाई कर डॉक्टर बनाना चाहता था।
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