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कोरोना ने ऐसा दिया दर्द कि दो परिवार भूल नहीं पाएंगे
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कोरोना ने ऐसा दिया दर्द कि दो परिवार भूल नहीं पाएंगे
फरेंदा (महराजगंज)। कोरोना महामारी ने तमाम परिवारों की खुशियां छीन लीं तो कई को ऐसा घाव दिया जो जीवन नहीं भूल सकते हैं। ऐसे में परिजनों के दर्द का साझा करने की कोशिश की गई तो वे गमगीन हो उठे। बच्चों के चेहरे पर पिता को खोने का गम तो मां के चेहरे पर पति के साथ छोड़ने का दर्द छलक रहा था।
फरेंदा क्षेत्र के बाजारडीह के तेनुअहिया निवासी 40 वर्षीय रामअचल की कोरोना से मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह दिल्ली, मुंबई में रहकर मजदूरी व पेंटिग का कार्य कर परिवार का गुजर बसर करता था। 16 मई को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन निजी अस्पताल में ले गए। सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजन जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकेतीन बेटे मनीष, अजीत व रंजीत हैं। पत्नी अनिता का रो रोकर बुरा हाल है।
मासूम ने कोरोना से जंग जीती, लेकिन मां को खोया
फरेंदा। बेटी के जन्म लेने से पहले मां संक्रमित हो गई। नवजात ने जब जन्म लिया तो जांच में पता चला कि वह भी कोरोना संक्रमित है। मां-बेटी आठ दिनों तक अस्पताल में कोरोना से जंग लड़ते रहे, लेकिन मां जीवित नहीं बची। नवजात कोरोना से जंग जीत तो गई लेकिन मां की ममता का छांव पाने से वंचित रह गई।
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बृजमनगंज क्षेत्र के विशुनपुर अदरौना निवासी 29 वर्षीय अर्चना चौहान को 22 अप्रैल को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गए। डॉक्टरों ने महिला की कोरोना जांच कराई तो वह पॉजिटिव मिली। भर्ती होने के बाद महिला को ऑपरेशन से बच्ची को जन्म दिया। 24 अप्रैल को नवजात की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। फिर दोनों का इलाज शुरू हुआ। 27 मई को अर्चना को वेंटिलेटर पर रखने की सूचना भी परिजनो ंको दी गई थी। एक मई की रात में पति राहुल चौहान को अस्पताल से फोन कर बताया गया कि अर्चना दुनिया छोड़ कर चली गई। राहुल दूसरे दिन पत्नी के अंतिम संस्कार में जुट गए। दो मई को बेटी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई। चार मई को बेटी को घर लाया गया। पति राहुल ने बताया कि अर्चना ने आरुषि (4) व नवजात आरोही को छोड़ कर हमेशा-हमेशा के लिए चली गई। यह दर्द वह कभी भूल नहीं पाएंगे।
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फरेंदा (महराजगंज)। कोरोना महामारी ने तमाम परिवारों की खुशियां छीन लीं तो कई को ऐसा घाव दिया जो जीवन नहीं भूल सकते हैं। ऐसे में परिजनों के दर्द का साझा करने की कोशिश की गई तो वे गमगीन हो उठे। बच्चों के चेहरे पर पिता को खोने का गम तो मां के चेहरे पर पति के साथ छोड़ने का दर्द छलक रहा था।
फरेंदा क्षेत्र के बाजारडीह के तेनुअहिया निवासी 40 वर्षीय रामअचल की कोरोना से मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह दिल्ली, मुंबई में रहकर मजदूरी व पेंटिग का कार्य कर परिवार का गुजर बसर करता था। 16 मई को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन निजी अस्पताल में ले गए। सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजन जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकेतीन बेटे मनीष, अजीत व रंजीत हैं। पत्नी अनिता का रो रोकर बुरा हाल है।
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मासूम ने कोरोना से जंग जीती, लेकिन मां को खोया
फरेंदा। बेटी के जन्म लेने से पहले मां संक्रमित हो गई। नवजात ने जब जन्म लिया तो जांच में पता चला कि वह भी कोरोना संक्रमित है। मां-बेटी आठ दिनों तक अस्पताल में कोरोना से जंग लड़ते रहे, लेकिन मां जीवित नहीं बची। नवजात कोरोना से जंग जीत तो गई लेकिन मां की ममता का छांव पाने से वंचित रह गई।
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बृजमनगंज क्षेत्र के विशुनपुर अदरौना निवासी 29 वर्षीय अर्चना चौहान को 22 अप्रैल को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गए। डॉक्टरों ने महिला की कोरोना जांच कराई तो वह पॉजिटिव मिली। भर्ती होने के बाद महिला को ऑपरेशन से बच्ची को जन्म दिया। 24 अप्रैल को नवजात की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। फिर दोनों का इलाज शुरू हुआ। 27 मई को अर्चना को वेंटिलेटर पर रखने की सूचना भी परिजनो ंको दी गई थी। एक मई की रात में पति राहुल चौहान को अस्पताल से फोन कर बताया गया कि अर्चना दुनिया छोड़ कर चली गई। राहुल दूसरे दिन पत्नी के अंतिम संस्कार में जुट गए। दो मई को बेटी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई। चार मई को बेटी को घर लाया गया। पति राहुल ने बताया कि अर्चना ने आरुषि (4) व नवजात आरोही को छोड़ कर हमेशा-हमेशा के लिए चली गई। यह दर्द वह कभी भूल नहीं पाएंगे।