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Maharajganj News: टैक्स चोरी पर लगाम, एआई से पुख्ता हुआ इंतजाम
Fri, 01 Aug 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:51 AM IST
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महराजगंज। आईटीआर फार्म में गलत जानकारी देकर टैक्स बचाने वालों को अब राहत की उम्मीद नहीं है। राज्य कर विभाग की तरफ से ऐसे साफ्टवेयर पर फीडिंग शुरू की गई है जो गलत जानकारी देने वालों का आईटीआर खुद ही पकड़कर इन्हें टैक्स चोरी के लिए चिह्नित कर देगा।
यह साफ्टवेयर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) इनबिल्ड है जो गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग ने विकसित कराया है। हालांकि इसमें किस एआई का उपयोग किया जा रहा इसकी जानकारी गोपनीय रखी गई है, लेकिन यह जरूर तय हो गया है कि इसके चलते विभाग की निगरानी क्षमता पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ी है।
राज्य कर विभाग ने टैक्स चोरी पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रहा है। ऐसे लोगों पर विभाग अपनी निगाहें बनाए हुए हैं, जो आईटीआर फार्म में गलत जानकारी देकर टैक्स चोरी कर रहे। विभाग इनकी सूची तैयार कर रहा है। टैक्स चोरी के मामले पकड़ने के लिए एआई डेटा विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है।
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बड़ी रकम निवेश करने वाले, महंगी प्रॉपर्टी खरीदने, क्रेडिट कार्ड पर आमदनी से ज्यादा खर्च के सभी लेनदेन पर विभाग की निगरानी बढ़ी है। बैंक, रजिस्ट्री ऑफिस, वित्तीय संस्थान हर साल विभाग को खरीद-फरोख्त की रिपोर्ट देते हैं इससे राज्य कर विभाग को बड़े लेन-देन की जानकारी मिलती है।
अब प्राप्त ब्योरे को आयकर रिटर्न, टीडीएस, जीएसटी ट्रांजेक्शन से मिलाया जा रहा। नई तकनीक के जरिये आय और खर्च की अनियमितता पकड़ में आ रही है। विभाग गड़बड़ी करने वालों की सूची तैयार करने में जुटा है।
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यह साफ्टवेयर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) इनबिल्ड है जो गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग ने विकसित कराया है। हालांकि इसमें किस एआई का उपयोग किया जा रहा इसकी जानकारी गोपनीय रखी गई है, लेकिन यह जरूर तय हो गया है कि इसके चलते विभाग की निगरानी क्षमता पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ी है।
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राज्य कर विभाग ने टैक्स चोरी पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रहा है। ऐसे लोगों पर विभाग अपनी निगाहें बनाए हुए हैं, जो आईटीआर फार्म में गलत जानकारी देकर टैक्स चोरी कर रहे। विभाग इनकी सूची तैयार कर रहा है। टैक्स चोरी के मामले पकड़ने के लिए एआई डेटा विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है।
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बड़ी रकम निवेश करने वाले, महंगी प्रॉपर्टी खरीदने, क्रेडिट कार्ड पर आमदनी से ज्यादा खर्च के सभी लेनदेन पर विभाग की निगरानी बढ़ी है। बैंक, रजिस्ट्री ऑफिस, वित्तीय संस्थान हर साल विभाग को खरीद-फरोख्त की रिपोर्ट देते हैं इससे राज्य कर विभाग को बड़े लेन-देन की जानकारी मिलती है।
अब प्राप्त ब्योरे को आयकर रिटर्न, टीडीएस, जीएसटी ट्रांजेक्शन से मिलाया जा रहा। नई तकनीक के जरिये आय और खर्च की अनियमितता पकड़ में आ रही है। विभाग गड़बड़ी करने वालों की सूची तैयार करने में जुटा है।