{"_id":"675748b0e6dacbd92007514a","slug":"cold-starts-troubling-children-wait-for-sweaters-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-137734-2024-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: सताने लगी ठंड, बच्चों को स्वेटर का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: सताने लगी ठंड, बच्चों को स्वेटर का इंतजार
Tue, 10 Dec 2024 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 10 Dec 2024 01:14 AM IST
विज्ञापन
निचलौल। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों पर शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ रही है। क्योंकि दिसंबर का पहला सप्ताह खत्म होने के बाद भी अधिकतर छात्र-छात्राओं को ड्रेस, स्वेटर, जूता-मोजा नसीब नहीं हो पाए हैं। उन्हें कड़ाके की ठंड में स्कूल जाते वक्त ठिठुरना पड़ रहा है।
सोमवार को परिषदीय विद्यालयों का जायजा लेने पर अधिकतर बच्चे बिना स्वेटर के आए थे। करीब 20 फीसदी बच्चों के आधार, बैंक खाते व अन्य त्रुटियां होने से उनका पैसा अटक गया है। हालांकि, शासन ने बच्चों के ड्रेस, जूता-मोजा, बैग आदि के वितरण में पारदर्शिता के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) योजना चला रही है।
इस योजना के तहत अक्तूबर माह में जिम्मेदारों को बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से लिंक कराकर डीबीटी कराने के निर्देश दिए गए थे। मगर, इसमें जिम्मेदारों ने लापरवाही बरती। यही कारण है कि ठंड में भी अधिकतर बच्चे फटे-पुराने ड्रेस व चप्पलों में विद्यालय आ रहे हैं।
विज्ञापन
रुद्रौली गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में सुबह 11:15 बजे कुछ बच्चे विद्यालय परिसर में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते देखे गए। जबकि कुछ बच्चे कक्षा में बैठे थे। तमाम बच्चे बगैर स्वेटर के कक्षा में ठिठुरे हुए नजर आए। रोस्टर के मुताबिक मिड डे मिल भी बन रहा था। मौके पर मौजूद मिले विद्यालय के प्रधानाचार्य रामदुलारे ने कहा कि विद्यालय में उनके अलावा सहायक अध्यापक उर्मिला चौधरी, विद्यालक्ष्मी, गोविंद प्रसाद चौधरी की तैनाती है। 86 पंजीकृत हैं। मौके पर 45 बच्चों की उपस्थिति रही। अब तक 70 बच्चों के अभिभावकों के खाते यूनिफॉर्म के लिए 1200 रुपये भेज दिए गए हैं। किताब का भी वितरण किया जा चुका है।
पिपराकाजी गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में सुबह 11:28 बजे अधिकतर बच्चे बगैर स्वेटर, जूता और ड्रेस के दिखाई दिए। एक कक्षा में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षामित्र रामलखन प्रसाद ने बताया कि प्रधानाचार्य गणेश चंद के साथ ही सहायक अध्यापक माहिरे नाजरा, रमेंद्र कुमार पांडेय अवकाश पर हैं। सहायक शिक्षक कल्पना सिंह और शिक्षामित्र गीता भारती उपस्थित मिलीं। बताया कि विद्यालय में 209 बच्चे पंजीकृत है।
जबकि 152 बच्चों की उपस्थित मिले। बच्चों के लिए मिड डे मिल बन रहा था। डीबीटी का कार्य पूरा हो चुका है। फिर भी अब तक करीब 40 बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम नहीं पहुंची है।
प्राथमिक विद्यालय कपियां में सुबह 11:43 बजे शिक्षिका बच्चों को ठंड से बचाने के लिए धूप में पढ़ा रही थी। विद्यालय में अंदर और बाहर काफी साफ-सफाई दिखी। मिड-डे-मिल बन रहा था। बच्चों के लिए पेयजल से लेकर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
सहायक अध्यापक श्रेया वर्मा ने बताया कि प्रधानाचार्य ऋषिकेश त्रिपाठी अवकाश पर हैं। विद्यालय पर कुल 69 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि 50 बच्चे उपस्थित है। अब तक 51 बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम भेज दी गई है। 18 बच्चों का रकम आधार न होने के कारण नहीं भेजी गई है।
प्राथमिक विद्यालय सिधावे में दोपहर 12:48 बजे बच्चे कक्षा में पढ़ रहे थे। प्रधानाध्यापक राजकुमार पांडेय और सहायक अध्यापक सिम्पा विश्वकर्मा मौजूद रही। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में 51 बच्चे पंजीकृत है। 39 बच्चों की उपस्थित है। मिड-डे-मिल में रोटी-सब्जी बना हुआ है। 39 बच्चे के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम भेज दी गई है। जबकि अन्य बच्चों का आधार कार्ड, बैंक खाता संख्या सहित अन्य दिक्कतों की वजह से रकम नहीं जा सकी है। बच्चों के पास किताब-कॉपी उपलब्ध है।
विज्ञापन
सोमवार को परिषदीय विद्यालयों का जायजा लेने पर अधिकतर बच्चे बिना स्वेटर के आए थे। करीब 20 फीसदी बच्चों के आधार, बैंक खाते व अन्य त्रुटियां होने से उनका पैसा अटक गया है। हालांकि, शासन ने बच्चों के ड्रेस, जूता-मोजा, बैग आदि के वितरण में पारदर्शिता के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) योजना चला रही है।
विज्ञापन
इस योजना के तहत अक्तूबर माह में जिम्मेदारों को बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से लिंक कराकर डीबीटी कराने के निर्देश दिए गए थे। मगर, इसमें जिम्मेदारों ने लापरवाही बरती। यही कारण है कि ठंड में भी अधिकतर बच्चे फटे-पुराने ड्रेस व चप्पलों में विद्यालय आ रहे हैं।
विज्ञापन
रुद्रौली गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में सुबह 11:15 बजे कुछ बच्चे विद्यालय परिसर में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते देखे गए। जबकि कुछ बच्चे कक्षा में बैठे थे। तमाम बच्चे बगैर स्वेटर के कक्षा में ठिठुरे हुए नजर आए। रोस्टर के मुताबिक मिड डे मिल भी बन रहा था। मौके पर मौजूद मिले विद्यालय के प्रधानाचार्य रामदुलारे ने कहा कि विद्यालय में उनके अलावा सहायक अध्यापक उर्मिला चौधरी, विद्यालक्ष्मी, गोविंद प्रसाद चौधरी की तैनाती है। 86 पंजीकृत हैं। मौके पर 45 बच्चों की उपस्थिति रही। अब तक 70 बच्चों के अभिभावकों के खाते यूनिफॉर्म के लिए 1200 रुपये भेज दिए गए हैं। किताब का भी वितरण किया जा चुका है।
पिपराकाजी गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में सुबह 11:28 बजे अधिकतर बच्चे बगैर स्वेटर, जूता और ड्रेस के दिखाई दिए। एक कक्षा में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षामित्र रामलखन प्रसाद ने बताया कि प्रधानाचार्य गणेश चंद के साथ ही सहायक अध्यापक माहिरे नाजरा, रमेंद्र कुमार पांडेय अवकाश पर हैं। सहायक शिक्षक कल्पना सिंह और शिक्षामित्र गीता भारती उपस्थित मिलीं। बताया कि विद्यालय में 209 बच्चे पंजीकृत है।
जबकि 152 बच्चों की उपस्थित मिले। बच्चों के लिए मिड डे मिल बन रहा था। डीबीटी का कार्य पूरा हो चुका है। फिर भी अब तक करीब 40 बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम नहीं पहुंची है।
प्राथमिक विद्यालय कपियां में सुबह 11:43 बजे शिक्षिका बच्चों को ठंड से बचाने के लिए धूप में पढ़ा रही थी। विद्यालय में अंदर और बाहर काफी साफ-सफाई दिखी। मिड-डे-मिल बन रहा था। बच्चों के लिए पेयजल से लेकर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
सहायक अध्यापक श्रेया वर्मा ने बताया कि प्रधानाचार्य ऋषिकेश त्रिपाठी अवकाश पर हैं। विद्यालय पर कुल 69 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि 50 बच्चे उपस्थित है। अब तक 51 बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम भेज दी गई है। 18 बच्चों का रकम आधार न होने के कारण नहीं भेजी गई है।
प्राथमिक विद्यालय सिधावे में दोपहर 12:48 बजे बच्चे कक्षा में पढ़ रहे थे। प्रधानाध्यापक राजकुमार पांडेय और सहायक अध्यापक सिम्पा विश्वकर्मा मौजूद रही। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में 51 बच्चे पंजीकृत है। 39 बच्चों की उपस्थित है। मिड-डे-मिल में रोटी-सब्जी बना हुआ है। 39 बच्चे के अभिभावकों के खाते में यूनिफॉर्म की रकम भेज दी गई है। जबकि अन्य बच्चों का आधार कार्ड, बैंक खाता संख्या सहित अन्य दिक्कतों की वजह से रकम नहीं जा सकी है। बच्चों के पास किताब-कॉपी उपलब्ध है।