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Maharajganj News: गली-कूचों में चल रहीं कोचिंग-लाइब्रेरी, फायर एनओसी ली ही नहीं
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लखनऊ हादसे से लेना होगा सबक: शिक्षा विभाग ने कहा चलाएंगे अभियान
महराजगंज। जिले के गली-कूचों में मानकों का उल्लंघन कर कोचिंग व लाइब्रेरी चल रही हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कोचिंग संस्थानों की संख्या 150-200 के बीच होगी लेकिन शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में महज 24 संस्थान ही पंजीकृत हैं। फायर विभाग का कहना है कि किसी ने भी एनओसी नहीं ली है। बिना मानकों के संस्थान संचालित हो रहे हैं, आग के बचाव के इंतजाम भी नहीं हैं। लखनऊ जैसे खतरे कई जगह हैं।
अमर उजाला की मंगलवार को की गई पड़ताल में जनपद में कई संस्थान ऐसे संचालित मिले जिनका निर्माण नियमों की अनदेखी करके किया गया है। इनमें आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। कहीं बेसमेंट में लाइब्रेरी संचालित हो रही है तो कहीं दूसरी मंजिल पर कोचिंग का है। लाइब्रेरी में जाने वाला रास्ता भी संकरा है और आग से बचाव के इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। इसके बाद भी विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। शायद जिम्मेदारों ने यह रवायत बना ली है कि बड़ी दुर्घटना के बाद ही वह सक्रिय होंगे।
कभी अगर हादसा हो जाए तो रास्ते इतने संकरे हैं कि वहां तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाएगी। हर गली और कूचों में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बिना मानक के धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं। कहीं घर में तो कहीं बेसमेंट में लाइब्रेरी संचालित की जा रही है।
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बॉक्स
मौका मुआयना
पड़ताल के दौरान आजाद नगर में एक लाइब्रेरी घर में संचालित मिली। अंदर जाने का रास्ता काफी संकरा है। आग से बचाव के संसाधन भी नहीं दिखे। सिविल लाइंस में वार्ड में तो एक लाइब्रेरी बेसमेंट में संचालित होते हुए मिली। वहीं शास्त्री नगर वार्ड में तो नहर के किनारे ही एक लाइब्रेरी संचालित हो रही है। तीनों जगहों पर आग से बचाव के इंतजाम नहीं दिखे।
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जिम्मेदार नहीं करते हैं जांच
लाइब्रेरी और कोचिंग संचालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। अक्सर यही होता है हादसे के बाद जिम्मेदार जागते हैं और नाम मात्र की कार्रवाई करने के बाद फिर कुंभकर्णी नींद में सो जाते हैं। अगर विभाग के जिम्मेदार नियमित जांच कर रहे होते तो इन संस्थानों में इस कदर मानकों की अवहेलना नहीं की जाती।
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पहले दिल्ली, अब लखनऊ...फिर भी नहीं टूटी नींद
बेसमेंट में पानी भरने से दिल्ली में तीन बच्चों की हो गई थी मौत
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 27 जुलाई 2024 को भारी बारिश के बाद पानी भर गया था। इससे तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद जिम्मेदार जागे थे और कार्रवाई भी की गई थी।
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अफसर अब जागे, याद आया कि एनओसी किसी के पास नहीं
जनपद के जितने लाइब्रेरी संचालक है सबको निर्देश दिया गया है। अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए, कमी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फायर एनओसी किसी के पास नहीं है।
-राजेंद्र प्रसाद, एफएसओ
अभियान चलाकर करेंगे कार्रवाई
जिले में पंजीकृत कोचिंग की संख्या 24 है। बिना मानक चल रहे कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। अभियान चलाकर कार्रवाई होगी।
प्रदीप कुमार शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक
खतरे बड़े हैं, सतर्क रहें-बेसमेंट में संचालित लाइब्रेरी
-दूसरी मंजिल तक जाने के संकरे रास्ते
-फायर एक्सटिंग्विशर और अलार्म सिस्टम का अभाव
-आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं
-संकरी गलियों में संचालित संस्थान
-नियमित सुरक्षा जांच नहीं
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महराजगंज। जिले के गली-कूचों में मानकों का उल्लंघन कर कोचिंग व लाइब्रेरी चल रही हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कोचिंग संस्थानों की संख्या 150-200 के बीच होगी लेकिन शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में महज 24 संस्थान ही पंजीकृत हैं। फायर विभाग का कहना है कि किसी ने भी एनओसी नहीं ली है। बिना मानकों के संस्थान संचालित हो रहे हैं, आग के बचाव के इंतजाम भी नहीं हैं। लखनऊ जैसे खतरे कई जगह हैं।
अमर उजाला की मंगलवार को की गई पड़ताल में जनपद में कई संस्थान ऐसे संचालित मिले जिनका निर्माण नियमों की अनदेखी करके किया गया है। इनमें आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। कहीं बेसमेंट में लाइब्रेरी संचालित हो रही है तो कहीं दूसरी मंजिल पर कोचिंग का है। लाइब्रेरी में जाने वाला रास्ता भी संकरा है और आग से बचाव के इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। इसके बाद भी विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। शायद जिम्मेदारों ने यह रवायत बना ली है कि बड़ी दुर्घटना के बाद ही वह सक्रिय होंगे।
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कभी अगर हादसा हो जाए तो रास्ते इतने संकरे हैं कि वहां तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाएगी। हर गली और कूचों में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बिना मानक के धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं। कहीं घर में तो कहीं बेसमेंट में लाइब्रेरी संचालित की जा रही है।
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पड़ताल के दौरान आजाद नगर में एक लाइब्रेरी घर में संचालित मिली। अंदर जाने का रास्ता काफी संकरा है। आग से बचाव के संसाधन भी नहीं दिखे। सिविल लाइंस में वार्ड में तो एक लाइब्रेरी बेसमेंट में संचालित होते हुए मिली। वहीं शास्त्री नगर वार्ड में तो नहर के किनारे ही एक लाइब्रेरी संचालित हो रही है। तीनों जगहों पर आग से बचाव के इंतजाम नहीं दिखे।
जिम्मेदार नहीं करते हैं जांच
लाइब्रेरी और कोचिंग संचालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। अक्सर यही होता है हादसे के बाद जिम्मेदार जागते हैं और नाम मात्र की कार्रवाई करने के बाद फिर कुंभकर्णी नींद में सो जाते हैं। अगर विभाग के जिम्मेदार नियमित जांच कर रहे होते तो इन संस्थानों में इस कदर मानकों की अवहेलना नहीं की जाती।
पहले दिल्ली, अब लखनऊ...फिर भी नहीं टूटी नींद
बेसमेंट में पानी भरने से दिल्ली में तीन बच्चों की हो गई थी मौत
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 27 जुलाई 2024 को भारी बारिश के बाद पानी भर गया था। इससे तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद जिम्मेदार जागे थे और कार्रवाई भी की गई थी।
अफसर अब जागे, याद आया कि एनओसी किसी के पास नहीं
जनपद के जितने लाइब्रेरी संचालक है सबको निर्देश दिया गया है। अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए, कमी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फायर एनओसी किसी के पास नहीं है।
-राजेंद्र प्रसाद, एफएसओ
अभियान चलाकर करेंगे कार्रवाई
जिले में पंजीकृत कोचिंग की संख्या 24 है। बिना मानक चल रहे कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। अभियान चलाकर कार्रवाई होगी।
प्रदीप कुमार शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक
खतरे बड़े हैं, सतर्क रहें-बेसमेंट में संचालित लाइब्रेरी
-दूसरी मंजिल तक जाने के संकरे रास्ते
-फायर एक्सटिंग्विशर और अलार्म सिस्टम का अभाव
-आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं
-संकरी गलियों में संचालित संस्थान
-नियमित सुरक्षा जांच नहीं