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Maharajganj News: कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की रफ्तार धीमी
Sun, 21 May 2023 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 21 May 2023 12:34 AM IST
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पोषण पुनर्वास केंद्र में खाली पड़े बेड।संवाद
फोटो
आरबीएसके टीम नहीं ले रही जिम्मेदारी, 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में पांच बेड खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला कार्यक्रम विभाग की ओर से समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन लिया जाता है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की गति धीमी है। अधिकारियों के ध्यान नहीं देने के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र में पांच बेड खाली हैं।
जिले में 15,387 सैम कुपोषित और 7945 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे चिह्नित हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए आशा, आंगनबाड़ी, आरबीएसके टीम को जिम्मेदारी दी गई है। । पोषण पुनर्वास केंद्र में चार दिनों से पांच बेड खाली हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में जो बच्चे कुपोषित मिलते हैं, उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। जिला पोषण विशेषज्ञ पूजा त्रिपाठी ने बताया कि विभाग के ग्रुप पर भी मैसेज भेजकर । पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड खाली होने की सूचना दी जाती है।
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जरूरी सूचना पर एक नजर
जिले में कुल आंगनबाड़ी केंद्र 3164 हैं।
पांच वर्ष तक के बच्चे 270626 हैं।
कुपोषित बच्चे 15387 हैं।
गंभीर कुपोषित 7945 हैं।
...
कोट
आरबीएसके टीम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराया जाता है। अगर कहीं लापरवाही हो रही है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-दुर्गेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
...
कोट
कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के लिए बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम को निर्देश दिए गए हैं। कुपोषित बच्चों के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण मरीज 14 दिन तक नहीं रुक पा रहे हैं।
-डॉ. राकेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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आरबीएसके टीम नहीं ले रही जिम्मेदारी, 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में पांच बेड खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला कार्यक्रम विभाग की ओर से समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन लिया जाता है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की गति धीमी है। अधिकारियों के ध्यान नहीं देने के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र में पांच बेड खाली हैं।
जिले में 15,387 सैम कुपोषित और 7945 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे चिह्नित हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए आशा, आंगनबाड़ी, आरबीएसके टीम को जिम्मेदारी दी गई है। । पोषण पुनर्वास केंद्र में चार दिनों से पांच बेड खाली हैं।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में जो बच्चे कुपोषित मिलते हैं, उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। जिला पोषण विशेषज्ञ पूजा त्रिपाठी ने बताया कि विभाग के ग्रुप पर भी मैसेज भेजकर । पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड खाली होने की सूचना दी जाती है।
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जरूरी सूचना पर एक नजर
जिले में कुल आंगनबाड़ी केंद्र 3164 हैं।
पांच वर्ष तक के बच्चे 270626 हैं।
कुपोषित बच्चे 15387 हैं।
गंभीर कुपोषित 7945 हैं।
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कोट
आरबीएसके टीम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराया जाता है। अगर कहीं लापरवाही हो रही है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-दुर्गेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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कोट
कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के लिए बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम को निर्देश दिए गए हैं। कुपोषित बच्चों के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण मरीज 14 दिन तक नहीं रुक पा रहे हैं।
-डॉ. राकेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी