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सिर पर नहीं मयस्सर हुई छत, फूस की झोपड़ी में कट रही जिंदगी
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सिर पर नहीं मयस्सर हुई छत, फूस की झोपड़ी में कट रही जिंदगी
जाड़ा और बरसात के दिनों में बोझ सी लगने लगती है जिंदगी : चंद्रावती
नौतनवां। आदर्श नगर पालिका परिषद नौतनवां में एक परिवार फूस की झोपड़ी में मामूली संसाधनों के बीच अपना जीवन यापन करने को विवश है। तमाम सरकारें व उनकी अनगिनत योजनाएं आईं और चली गईं, लेकिन लाख प्रयासों के बावजूद आज तक इनके सिर पर छत मयस्सर नहीं हो सका। सरकार की आवास योजना का लाखों लोगों को लाभ मिलने के बावजूद वास्तविक पात्र को इसका लाभ न मिल पाना सरकार के सभी दावों और प्रयासों को जमीनी स्तर पर खोखला साबित कर रहा है। ऐसा नहीं है कि इस कुनबे ने अपना आशियाना बनवाने के लिए प्रयास नहीं किया।
बीते 5 वर्षों में 10 से अधिक बार इन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए नेताओं के दर से लगाकर साहब के दरबार तक का चक्कर लगाया, लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या का समाधान निकालने की जहमत नहीं उठाई। छह सदस्यीय परिवार की मुखिया चंद्रावती ने बताया कि वह वर्षों से बिस्मिल नगर वार्ड में अपने पति मोतीलाल, देवर लालमन, बेटी गीता व सीता एवं पुत्र रामानंद के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे परिवार में अकेले ही घर-घर बर्तन मांजकर किसी तरह परिवार का जीविकोपार्जन करती हैं। उज्ज्वला, राशन, विद्युत एवं शौचालय योजना का लाभ तो मिला है, लेकिन आवास योजना के लिए उन्होंने सभासद, चेयरमैन एवं संबंधित अधिकारियों को 5 वर्ष में करीब 10 बार पत्र देकर लाभ दिलाने की मांग की, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन बरसात और जाड़े के समय में जिंदगी बोझ सी लगने लगती है।
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क्या कहते हैं अफसर
परियोजना निदेशक राजकरन पाल का कहना है कि कोई भी पात्र आवास योजना के लाभ से वंचित न रहे, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। चंद्रावती द्वारा यदि आवास के लिए आवेदन किया गया है और बावजूद इसके उन्हें इसका लाभ क्यों नहीं मिल सका तो इसकी जांच कराई जाएगी। पात्रता की श्रेणी में आने पर महिला को निश्चित रूप से इस योजना का लाभ दिलाया जाएगा।
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जाड़ा और बरसात के दिनों में बोझ सी लगने लगती है जिंदगी : चंद्रावती
नौतनवां। आदर्श नगर पालिका परिषद नौतनवां में एक परिवार फूस की झोपड़ी में मामूली संसाधनों के बीच अपना जीवन यापन करने को विवश है। तमाम सरकारें व उनकी अनगिनत योजनाएं आईं और चली गईं, लेकिन लाख प्रयासों के बावजूद आज तक इनके सिर पर छत मयस्सर नहीं हो सका। सरकार की आवास योजना का लाखों लोगों को लाभ मिलने के बावजूद वास्तविक पात्र को इसका लाभ न मिल पाना सरकार के सभी दावों और प्रयासों को जमीनी स्तर पर खोखला साबित कर रहा है। ऐसा नहीं है कि इस कुनबे ने अपना आशियाना बनवाने के लिए प्रयास नहीं किया।
बीते 5 वर्षों में 10 से अधिक बार इन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए नेताओं के दर से लगाकर साहब के दरबार तक का चक्कर लगाया, लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या का समाधान निकालने की जहमत नहीं उठाई। छह सदस्यीय परिवार की मुखिया चंद्रावती ने बताया कि वह वर्षों से बिस्मिल नगर वार्ड में अपने पति मोतीलाल, देवर लालमन, बेटी गीता व सीता एवं पुत्र रामानंद के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे परिवार में अकेले ही घर-घर बर्तन मांजकर किसी तरह परिवार का जीविकोपार्जन करती हैं। उज्ज्वला, राशन, विद्युत एवं शौचालय योजना का लाभ तो मिला है, लेकिन आवास योजना के लिए उन्होंने सभासद, चेयरमैन एवं संबंधित अधिकारियों को 5 वर्ष में करीब 10 बार पत्र देकर लाभ दिलाने की मांग की, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन बरसात और जाड़े के समय में जिंदगी बोझ सी लगने लगती है।
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क्या कहते हैं अफसर
परियोजना निदेशक राजकरन पाल का कहना है कि कोई भी पात्र आवास योजना के लाभ से वंचित न रहे, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। चंद्रावती द्वारा यदि आवास के लिए आवेदन किया गया है और बावजूद इसके उन्हें इसका लाभ क्यों नहीं मिल सका तो इसकी जांच कराई जाएगी। पात्रता की श्रेणी में आने पर महिला को निश्चित रूप से इस योजना का लाभ दिलाया जाएगा।
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