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Maharajganj News: मिलावट के खेल में धंधेबाज मालामाल
Sun, 23 Mar 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 23 Mar 2025 01:08 AM IST
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महराजगंज। मिलावट के खेल में धंधेबाज मालामाल हो रहे हैं। वहीं लोगों की सेहत खराब हो रही है। मिलावटी खाद्य पदार्थ का नियमित सेवन सेहत पर भारी पड़ रहा है। इससे इलाज पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
अभिभावक भी समस्या से परेशान हैं। बच्चों में पेट दर्द, उल्टी की समस्या हो रही है। उधर, शहर में तमाम स्थानों पर खुले में खाद्य सामाग्री गंदे स्थानों पर बिकती है। इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। शनिवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर पड़ताल में ठेले चाउमीन, बर्गर, टिक्की बनाने में तले हुए तेल का उपयोग होता दिखा। बस स्टेशन के पास एक ठेला लगा था। आसपास सफाई दिखी।
कड़ाही में जले हुए खराब तेल से बर्गर बनाया जा रहा था। पास में खड़े रत्नेश वर्मा ने बताया कि भूख लगी है। भरोसा रहता है कि शुद्ध सामाग्री मिलेगी, इस वजह से खाद्य पदार्थ खरीद लिया जाता है। दूसरी वजह है कि सस्ते में मिल जाता है। आगे बढ़ने पर दूसरा ठेला मिला तो वहां मक्खियां भिनभिना रही थीं। एक युवक आया तो पूछताछ करके चला गया। शहर में अन्य स्थानों पर भ्रमण करने पर पता चला कि मिलावट के खेल में धंधेबाज अच्छे कारोबारियों की छवि खराब कर दे रहे हैं। मोटा लाभ कमाने के चक्कर में मसाले से लेकर आटा, चावल, चीनी में भी मिलावट का खेल हो रहा है।
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मिलावट करने वालों ने हर सामान में लागत से ज्यादा मुनाफा कमाने का धंधा खोज लिया है। मसाला, शहद में मिलावट कर धंधेबाज दोगुने लाभ कमा रहे हैं। मसाला बाजार के जानकारों का कहना है कि चीन से आए एक पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी दिखती है। इसकी पहचान आम आदमी नहीं कर सकता है। मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा में अत्यधिक मिलावट की जा रही है।
सूत्रों की माने तो मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। अरारोट में तो महक होती नहीं, लिहाजा उसमें हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इस मिलावट से हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है, लेकिन उसका नुकसान बरकरार रहता है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
खुले में बेचे जा रहे कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ : बाजार में कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ खुले में बेचे जा रहे हैं। शहर में चारों तरफ खुले नाले-नालियों के चलते भिनभिनाती मक्खियों से हर समय बीमारी फैलने का खतरा रहता है। बाजार में रेहड़ियों पर अनार, अनानास, नारियल, पपीता, अमरूद, तरबूज, खरबूज सहित तमाम कटे फल खुले में बेचे जा रहे हैं।
इसके अलावा टिक्की, समोसा, कचौरी, बर्गर, चाउमीन भी ठेलों पर बेचे जा रहे हैं।
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अभिभावक भी समस्या से परेशान हैं। बच्चों में पेट दर्द, उल्टी की समस्या हो रही है। उधर, शहर में तमाम स्थानों पर खुले में खाद्य सामाग्री गंदे स्थानों पर बिकती है। इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। शनिवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर पड़ताल में ठेले चाउमीन, बर्गर, टिक्की बनाने में तले हुए तेल का उपयोग होता दिखा। बस स्टेशन के पास एक ठेला लगा था। आसपास सफाई दिखी।
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कड़ाही में जले हुए खराब तेल से बर्गर बनाया जा रहा था। पास में खड़े रत्नेश वर्मा ने बताया कि भूख लगी है। भरोसा रहता है कि शुद्ध सामाग्री मिलेगी, इस वजह से खाद्य पदार्थ खरीद लिया जाता है। दूसरी वजह है कि सस्ते में मिल जाता है। आगे बढ़ने पर दूसरा ठेला मिला तो वहां मक्खियां भिनभिना रही थीं। एक युवक आया तो पूछताछ करके चला गया। शहर में अन्य स्थानों पर भ्रमण करने पर पता चला कि मिलावट के खेल में धंधेबाज अच्छे कारोबारियों की छवि खराब कर दे रहे हैं। मोटा लाभ कमाने के चक्कर में मसाले से लेकर आटा, चावल, चीनी में भी मिलावट का खेल हो रहा है।
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मिलावट करने वालों ने हर सामान में लागत से ज्यादा मुनाफा कमाने का धंधा खोज लिया है। मसाला, शहद में मिलावट कर धंधेबाज दोगुने लाभ कमा रहे हैं। मसाला बाजार के जानकारों का कहना है कि चीन से आए एक पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी दिखती है। इसकी पहचान आम आदमी नहीं कर सकता है। मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा में अत्यधिक मिलावट की जा रही है।
सूत्रों की माने तो मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। अरारोट में तो महक होती नहीं, लिहाजा उसमें हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इस मिलावट से हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है, लेकिन उसका नुकसान बरकरार रहता है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
खुले में बेचे जा रहे कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ : बाजार में कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ खुले में बेचे जा रहे हैं। शहर में चारों तरफ खुले नाले-नालियों के चलते भिनभिनाती मक्खियों से हर समय बीमारी फैलने का खतरा रहता है। बाजार में रेहड़ियों पर अनार, अनानास, नारियल, पपीता, अमरूद, तरबूज, खरबूज सहित तमाम कटे फल खुले में बेचे जा रहे हैं।
इसके अलावा टिक्की, समोसा, कचौरी, बर्गर, चाउमीन भी ठेलों पर बेचे जा रहे हैं।