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रक्तदान किया तो बीमारी का पता चला
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रक्तदान किया तो बीमारी का पता चला
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान को पहुंचे 13 लोगों में मिली बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में वर्ष 2020 में 13 ऐेसे लोगों ने रक्तदान किया जो गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। रक्तदान करने के बाद जब रक्त की जांच की गई तो बीमारियों का पता चला। ये लोग
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. भानू प्रताप सिंह ने बताया कि रक्तदान के बाद रक्त की संपूर्ण जांच की जाती है। वर्ष 2020 में जिले 13 ऐेसे लोगों ने रक्तदान किया जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित थे। नमूना संग्रह के बाद की जांच में हेपेटाइटिस बी के नौ, एचआईबी के तीन और सिफलिस का एक केस आया। उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक में जांच के दौरान मिलने वाले ऐसे रक्त को तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जांच के बाद संबंधित मरीजों को सूचना भेजकर उपचार की व्यवस्था की जाती है।
संक्रामक बीमारी है हेपेटाइटिस बी
वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बीमारी है। रक्त की जांच से इसका पता चलता है। इसका प्रभाव लीवर पर पड़ता है और लीवर की कोशिकाएं खराब होने लगती हैं। यह लंबे समय के बाद जानलेवा भी हो सकता है। वहीं एचआईवी की जानकारी भी रक्त जांच से ही हो पाती है। यह भी लंबे समय तक होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। सिफलिस के बारे में भी ब्लड की जांच से जानकारी मिलती है। सही उपचार न होने पर बीमारी जानलेवा हो सकती है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान को पहुंचे 13 लोगों में मिली बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में वर्ष 2020 में 13 ऐेसे लोगों ने रक्तदान किया जो गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। रक्तदान करने के बाद जब रक्त की जांच की गई तो बीमारियों का पता चला। ये लोग
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. भानू प्रताप सिंह ने बताया कि रक्तदान के बाद रक्त की संपूर्ण जांच की जाती है। वर्ष 2020 में जिले 13 ऐेसे लोगों ने रक्तदान किया जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित थे। नमूना संग्रह के बाद की जांच में हेपेटाइटिस बी के नौ, एचआईबी के तीन और सिफलिस का एक केस आया। उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक में जांच के दौरान मिलने वाले ऐसे रक्त को तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जांच के बाद संबंधित मरीजों को सूचना भेजकर उपचार की व्यवस्था की जाती है।
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संक्रामक बीमारी है हेपेटाइटिस बी
वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बीमारी है। रक्त की जांच से इसका पता चलता है। इसका प्रभाव लीवर पर पड़ता है और लीवर की कोशिकाएं खराब होने लगती हैं। यह लंबे समय के बाद जानलेवा भी हो सकता है। वहीं एचआईवी की जानकारी भी रक्त जांच से ही हो पाती है। यह भी लंबे समय तक होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। सिफलिस के बारे में भी ब्लड की जांच से जानकारी मिलती है। सही उपचार न होने पर बीमारी जानलेवा हो सकती है।
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