{"_id":"65efd01a7f18c7140707f426","slug":"bike-rider-killed-in-a-road-accident-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-117583-2024-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: सड़क हादसे में बाइक सवार की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: सड़क हादसे में बाइक सवार की मौत
Tue, 12 Mar 2024 09:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 12 Mar 2024 09:16 AM IST
विज्ञापन
सिसवा बाजार। कस्बे के बाईपास मार्ग पर रविवार की रात एक युवक घायल अवस्था में मिला। राहगीरों ने देखा तो उसे सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कोठीभार क्षेत्र के रायपुर निवासी 20 वर्षीय नुरुलहुदा रविवार की देर रात सिसवा स्थित आईपीएल चीनी मिल से घर लौट रहे थे। बाईपास पर स्थित पिक्चर पैलेस के पास अज्ञात वाहन के चपेट में आने से घायल होकर सड़क पर गिर गए थे। यह देख राहगीरों ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। क्षेत्राधिकारी अनूज कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संवाद
मां का छीन गया बुढ़ापे का सहारा
सिसवा बाजार। कस्बे के रायपुर निवासी बक्शीश अली को एक बेटा और एक बेटी थी। पिता की मौके के बाद मां मसीबून ने दोनों बच्चों का मजदूरी करके पालन-पोषण किया। बेटी की शादी की। बेटा बड़ा हुआ तो वह भी मजदूरी करने लगा। मां ने सोचा की अब जिंदगी ठीक से चलेगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। हादसे ने मां से बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। वह रो-रोकर बेसुध हो जा रही है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
कोठीभार क्षेत्र के रायपुर निवासी 20 वर्षीय नुरुलहुदा रविवार की देर रात सिसवा स्थित आईपीएल चीनी मिल से घर लौट रहे थे। बाईपास पर स्थित पिक्चर पैलेस के पास अज्ञात वाहन के चपेट में आने से घायल होकर सड़क पर गिर गए थे। यह देख राहगीरों ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। क्षेत्राधिकारी अनूज कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संवाद
विज्ञापन
मां का छीन गया बुढ़ापे का सहारा
सिसवा बाजार। कस्बे के रायपुर निवासी बक्शीश अली को एक बेटा और एक बेटी थी। पिता की मौके के बाद मां मसीबून ने दोनों बच्चों का मजदूरी करके पालन-पोषण किया। बेटी की शादी की। बेटा बड़ा हुआ तो वह भी मजदूरी करने लगा। मां ने सोचा की अब जिंदगी ठीक से चलेगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। हादसे ने मां से बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। वह रो-रोकर बेसुध हो जा रही है। संवाद
विज्ञापन