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मौनी अमावस्या : श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज/फरेंदा। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर बृहस्पतिवार को जिले की प्रमुख नदियों में श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद गोदान किया। स्नान का क्रम अलसुबह से ही शुरू हो गया था। इस अवसर पर नदी घाटों पर मेले का भी आयोजन हुआ। यहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात रही।
फरेंदा क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। काफी संख्या में श्रद्धालुआें ने स्नान किया। गो दान कर परिवार के मंगल की कामना की। धानी क्षेत्र के राप्ती नदी घाट पर लोग पहुंच कर स्नान कर मेले में खरीदारी की।
ठूठीबारी प्रतिनिधि के अनुसार, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट स्थित नरायणी नदी में डुबकी लगा परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। पड़ोसी देश नेपाल के नवलपरासी में स्थित त्रिवेणी धाम में डुबकी लगाने के लिए ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर खुर्द, रेगहियां, सितलापुर, झुलनीपुर, बहुआर, बैठवलियां, निचलौल, ओडवलियां, हनुमानगंज, जमुईकला, पिपरिहा गांव से श्रद्धालु की टोली बुधवार की दोपहर से ही त्रिवेणी तट पर पहुंचने लगी थी। पंडित अखिलेश शास्त्री ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन कलियुग का आगमन हुआ था। इसके प्रभाव से बचने के लिए पवित्र नदियों में मौन रहकर स्नान करने से पुण्य के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
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घुघुली प्रतिनिधि के अनुसार, छोटी गंडक पर स्थित ऐतिहासिक बैकुंठी घाट समेत विभिन्न घाटो पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस अवसर पर राम जानकी मंदिर के महंत अयोध्यादास द्वारा भंडारे का आयोजन किया। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। बाला क्षत्र घाट, टेडवा घाट, त्रिमुहानी घाट, कोटिया घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मेले में सुरेंद्र तिवारी व लोक गायक नथुनी द्वारा सोरठी बिरजाभार का गायन व नृत्य मेले का मुख्य आकर्षण रहा।
शीशमहल का दर्शन किया
ठूठीबारी। त्रिवेणी घाट पर स्नान के बाद श्रद्धालु त्रिवेणी धाम के उत्तर स्थित गजराज मंदिर के प्रांगण में बने शीश महल समेत नवनिर्मित मंदिर में स्थापित देव मूर्तियों का भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। इस दौरान सर्वाधिक शीशमहल आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहीं त्रिवेणी नदी पार कर श्रद्धालु वाल्मीकि आश्रम भी पहुंचे।
हंगामे के बाद श्रद्धालुओं में मिला प्रवेश
ठूठीबारी। मौनी अमावस्या पर नेपाल के नवलपरासी जिले के त्रिवेणी संगम तट पर स्नान कर श्रद्धालु लौटे तो सीमा पार करने में परेशानी हुई। हंगामे के बाद उन्हें आने-जाने दिया गया। दोनों देश के सुरक्षा कर्मियों ने सामंजस्य स्थापित कर दोपहर एक बजे आने-जाने की अनुमति दी। वही नोमेंस लैंड पर प्रदर्शन की जानकारी पर पहुंचे एसडीएम निचलौल राम सजीवन मौर्य ने बताया कि अभी अधिकृत रूप से भारत नेपाल सीमा से आवागमन की सूचना नहीं है। जब तक उच्चाधिकारियों द्वारा सूचना नहीं मिलती तब तक यही स्थिति बरकरार रहेगी।
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महराजगंज/फरेंदा। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर बृहस्पतिवार को जिले की प्रमुख नदियों में श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद गोदान किया। स्नान का क्रम अलसुबह से ही शुरू हो गया था। इस अवसर पर नदी घाटों पर मेले का भी आयोजन हुआ। यहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात रही।
फरेंदा क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। काफी संख्या में श्रद्धालुआें ने स्नान किया। गो दान कर परिवार के मंगल की कामना की। धानी क्षेत्र के राप्ती नदी घाट पर लोग पहुंच कर स्नान कर मेले में खरीदारी की।
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ठूठीबारी प्रतिनिधि के अनुसार, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट स्थित नरायणी नदी में डुबकी लगा परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। पड़ोसी देश नेपाल के नवलपरासी में स्थित त्रिवेणी धाम में डुबकी लगाने के लिए ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर खुर्द, रेगहियां, सितलापुर, झुलनीपुर, बहुआर, बैठवलियां, निचलौल, ओडवलियां, हनुमानगंज, जमुईकला, पिपरिहा गांव से श्रद्धालु की टोली बुधवार की दोपहर से ही त्रिवेणी तट पर पहुंचने लगी थी। पंडित अखिलेश शास्त्री ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन कलियुग का आगमन हुआ था। इसके प्रभाव से बचने के लिए पवित्र नदियों में मौन रहकर स्नान करने से पुण्य के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
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घुघुली प्रतिनिधि के अनुसार, छोटी गंडक पर स्थित ऐतिहासिक बैकुंठी घाट समेत विभिन्न घाटो पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस अवसर पर राम जानकी मंदिर के महंत अयोध्यादास द्वारा भंडारे का आयोजन किया। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। बाला क्षत्र घाट, टेडवा घाट, त्रिमुहानी घाट, कोटिया घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मेले में सुरेंद्र तिवारी व लोक गायक नथुनी द्वारा सोरठी बिरजाभार का गायन व नृत्य मेले का मुख्य आकर्षण रहा।
शीशमहल का दर्शन किया
ठूठीबारी। त्रिवेणी घाट पर स्नान के बाद श्रद्धालु त्रिवेणी धाम के उत्तर स्थित गजराज मंदिर के प्रांगण में बने शीश महल समेत नवनिर्मित मंदिर में स्थापित देव मूर्तियों का भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। इस दौरान सर्वाधिक शीशमहल आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहीं त्रिवेणी नदी पार कर श्रद्धालु वाल्मीकि आश्रम भी पहुंचे।
हंगामे के बाद श्रद्धालुओं में मिला प्रवेश
ठूठीबारी। मौनी अमावस्या पर नेपाल के नवलपरासी जिले के त्रिवेणी संगम तट पर स्नान कर श्रद्धालु लौटे तो सीमा पार करने में परेशानी हुई। हंगामे के बाद उन्हें आने-जाने दिया गया। दोनों देश के सुरक्षा कर्मियों ने सामंजस्य स्थापित कर दोपहर एक बजे आने-जाने की अनुमति दी। वही नोमेंस लैंड पर प्रदर्शन की जानकारी पर पहुंचे एसडीएम निचलौल राम सजीवन मौर्य ने बताया कि अभी अधिकृत रूप से भारत नेपाल सीमा से आवागमन की सूचना नहीं है। जब तक उच्चाधिकारियों द्वारा सूचना नहीं मिलती तब तक यही स्थिति बरकरार रहेगी।