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विद्यालयों के 362 जर्जर भवन बन सकते हैं दुर्घटना के कारण
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विद्यालयों के 362 जर्जर भवन बन सकते हैं दुर्घटना के कारण
मानसून आने के समय को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारों को लेना होगा त्वरित निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में संचालित होने वाले परिषदीय विद्यालयों में 362 भवन जर्जर हैं। जिम्मेदारों की ओर से उन्हें निष्प्रयोज्य घोषित करते हुए कक्षाओं का संचालन आसपास की अन्य कक्षाओं में किया जा रहा है। निष्प्रयोज्य होने के बाद भी उसका अभी तक ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया, जिससे बारिश के मौसम में उसके किसी भी समय ढहने व दुर्घटना का डर बना रहता है। यदि समय रहते विद्यालयों की दशा को नहीं सुधारा गया तो कभी भी बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित 1695 विद्यालयों में से 362 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके परिसर में स्कूल के ही पुराने व जर्जर भवन मौजूद हैं। पहले जहां इन भवनों को जर्जर होने पर ही ध्वस्त कराए जाने की व्यवस्था थी, वहीं अब पहले इनकी नीलामी की व्यवस्था बनाई गई है। आकलन के मुताबिक भवनों का जो बेस प्राइज निर्धारित किया गया है, वह इतना अधिक है कि कोई भी जिम्मेदार उसमें हाथ डालना नहीं चाहता। इससे जहां उसकी नीलामी नहीं हो पा रही है, वहीं जर्जर विद्यालय जस की तस स्थिति में खड़े हैं। बरसात शुरु होने से पूर्व ही यदि इस समस्या का त्वरित समाधान नहीं किया गया तो यह जर्जर भवन स्कूल में कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं।
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नौतनवां में सर्वाधिक जर्जर भवन चिन्हित
नौतनवा ब्लॉक में सर्वाधिक 63, लक्ष्मीपुर मेें 51, सदर में 54, पनियरा में 22, निचलौल में 34, फरेंदा में नौ, सिसवां में 21, मिठौरा में 29, धानी में सबसे कम पांच, बृजमनगंज में 32, घुघली में 16 एवं परतावल में 26 जर्जर भवन चिन्हित हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में जर्जर भवन को ध्वस्त कराए जाने की दिशा में जो भी बाधा उत्पन्न हो रही है, उसे तत्परता के आधार पर दूर कराते हुए भवन को ध्वस्त कराया जाएगा।
रवींद्र सिंह, प्रभारी बीएसए
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मानसून आने के समय को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारों को लेना होगा त्वरित निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में संचालित होने वाले परिषदीय विद्यालयों में 362 भवन जर्जर हैं। जिम्मेदारों की ओर से उन्हें निष्प्रयोज्य घोषित करते हुए कक्षाओं का संचालन आसपास की अन्य कक्षाओं में किया जा रहा है। निष्प्रयोज्य होने के बाद भी उसका अभी तक ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया, जिससे बारिश के मौसम में उसके किसी भी समय ढहने व दुर्घटना का डर बना रहता है। यदि समय रहते विद्यालयों की दशा को नहीं सुधारा गया तो कभी भी बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित 1695 विद्यालयों में से 362 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके परिसर में स्कूल के ही पुराने व जर्जर भवन मौजूद हैं। पहले जहां इन भवनों को जर्जर होने पर ही ध्वस्त कराए जाने की व्यवस्था थी, वहीं अब पहले इनकी नीलामी की व्यवस्था बनाई गई है। आकलन के मुताबिक भवनों का जो बेस प्राइज निर्धारित किया गया है, वह इतना अधिक है कि कोई भी जिम्मेदार उसमें हाथ डालना नहीं चाहता। इससे जहां उसकी नीलामी नहीं हो पा रही है, वहीं जर्जर विद्यालय जस की तस स्थिति में खड़े हैं। बरसात शुरु होने से पूर्व ही यदि इस समस्या का त्वरित समाधान नहीं किया गया तो यह जर्जर भवन स्कूल में कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं।
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नौतनवां में सर्वाधिक जर्जर भवन चिन्हित
नौतनवा ब्लॉक में सर्वाधिक 63, लक्ष्मीपुर मेें 51, सदर में 54, पनियरा में 22, निचलौल में 34, फरेंदा में नौ, सिसवां में 21, मिठौरा में 29, धानी में सबसे कम पांच, बृजमनगंज में 32, घुघली में 16 एवं परतावल में 26 जर्जर भवन चिन्हित हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में जर्जर भवन को ध्वस्त कराए जाने की दिशा में जो भी बाधा उत्पन्न हो रही है, उसे तत्परता के आधार पर दूर कराते हुए भवन को ध्वस्त कराया जाएगा।
रवींद्र सिंह, प्रभारी बीएसए