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Maharajganj News: चिह्नित भूमि का पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी ने लिया जायजा
Wed, 22 Feb 2023 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 22 Feb 2023 11:19 PM IST
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देवदह राजमहल टीले का निरीक्षण करते पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी लखनऊ रामविनय व टीम।संवाद
फोटो
- आज से शुरू होगा बौद्ध कालीन राजमहल टीले का उत्खनन
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर। बौद्ध कालीन स्थल देवदह के टीले का बुधवार को पुरातत्व विभाग की लखनऊ टीम ने निरीक्षण किया। टीम के राजमहल टीले के अवशेषों का जायजा लेने के बाद अवशेषों की खुदाई बृहस्पतिवार से विधिवत रूप से की जाएगी। पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी रामविनय ने बताया कि राजमहल के पश्चिमी छोर से उत्खनन शुरु किया जाएगा। अधिकारियों की टीम ने कहा कि इस स्थल पर पुरानी सभ्यता रह चुकी है। जिसके पूर्व में मिले अवशेषों से पता चलता है कि यहां बौद्ध कालीन सभ्यता थी। अब उत्खनन के बाद ही स्पष्ट होगा कि यहां कितनी पुरानी सभ्यता थी। उत्खनन में मिले अवशेषों के अध्ययन से इनके रहन-सहन और परंपरा के विषय में पता लगाया जाएगा। इस दौरान राजीव रंजन, जितेंद्र राव, अमित सिंह, प्रभुदयाल, प्रहलाद गौतम, बबलू तिवारी, महेन्द्र जायसवाल, लक्ष्मीपटेल और ओमप्रकाश आदि मौजूद थे।
देवदह को प्रदेश के बौद्ध स्थलों से जोड़ने की मांग
लक्ष्मीपुर। देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति नौतनवां के अध्यक्ष जितेंद राव ने केंद्रीय वित्त मंत्री पंकज चौधरी को पत्र व ज्ञापन देकर देवदह को प्रदेश के बौद्ध स्थलों से जोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिले को अगर बौद्ध परिपथ से जोड़ दिया जाए तो न सिर्फ महराजगंज का विकास होगा, बल्कि जिला विश्व पटल पर पहचाना जाएगा। लुंबिनी व कपिलवस्तु की दूरी भी कम हो जाएगी।
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- आज से शुरू होगा बौद्ध कालीन राजमहल टीले का उत्खनन
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर। बौद्ध कालीन स्थल देवदह के टीले का बुधवार को पुरातत्व विभाग की लखनऊ टीम ने निरीक्षण किया। टीम के राजमहल टीले के अवशेषों का जायजा लेने के बाद अवशेषों की खुदाई बृहस्पतिवार से विधिवत रूप से की जाएगी। पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी रामविनय ने बताया कि राजमहल के पश्चिमी छोर से उत्खनन शुरु किया जाएगा। अधिकारियों की टीम ने कहा कि इस स्थल पर पुरानी सभ्यता रह चुकी है। जिसके पूर्व में मिले अवशेषों से पता चलता है कि यहां बौद्ध कालीन सभ्यता थी। अब उत्खनन के बाद ही स्पष्ट होगा कि यहां कितनी पुरानी सभ्यता थी। उत्खनन में मिले अवशेषों के अध्ययन से इनके रहन-सहन और परंपरा के विषय में पता लगाया जाएगा। इस दौरान राजीव रंजन, जितेंद्र राव, अमित सिंह, प्रभुदयाल, प्रहलाद गौतम, बबलू तिवारी, महेन्द्र जायसवाल, लक्ष्मीपटेल और ओमप्रकाश आदि मौजूद थे।
देवदह को प्रदेश के बौद्ध स्थलों से जोड़ने की मांग
लक्ष्मीपुर। देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति नौतनवां के अध्यक्ष जितेंद राव ने केंद्रीय वित्त मंत्री पंकज चौधरी को पत्र व ज्ञापन देकर देवदह को प्रदेश के बौद्ध स्थलों से जोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिले को अगर बौद्ध परिपथ से जोड़ दिया जाए तो न सिर्फ महराजगंज का विकास होगा, बल्कि जिला विश्व पटल पर पहचाना जाएगा। लुंबिनी व कपिलवस्तु की दूरी भी कम हो जाएगी।
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