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Maharajganj News: बजट अटका तो थमी मदद, 231 पीड़ितों को आर्थिक सहायता का इंतजार
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महराजगंज। अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिले में पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए विभाग को करीब एक माह से बजट का इंतजार है। जिला समाज कल्याण विभाग को प्राप्त 348 लाभार्थियों के प्रस्तावों में से अब तक 117 के खातों में करीब 1.30 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी जा चुकी है। वहीं, 231 पीड़ित अभी आर्थिक सहायता मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विभिन्न प्रकार के मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। सामान्य प्रकृति के मामलों में एक लाभार्थी को करीब 75 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। वहीं गंभीर मामलों में सहायता राशि बढ़ जाती है। हत्या जैसे मामलों में पीड़ित परिवार को अधिकतम 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। मामले की प्रकृति और शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सहायता राशि अलग-अलग होती है।
पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजा जाता है प्रस्ताव
जिला समाज कल्याण विभाग के अनुसार, आर्थिक सहायता के लिए लाभार्थियों के चयन और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जाती है। संबंधित मामले में पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रस्ताव जिला समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद पात्रता और आवश्यक अभिलेखों की जांच समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। इसके बाद उपलब्ध बजट के अनुसार लाभार्थी को सहायता राशि का भुगतान किया जाता है।
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231 लाभार्थियों को अगले बजट की किस्त का इंतजार
विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना के लिए धनराशि एक साथ नहीं, बल्कि किस्तों में उपलब्ध कराई जाती है। इस कारण स्वीकृत मामलों में भी सभी लाभार्थियों को एक साथ भुगतान नहीं हो पाता है। बजट प्राप्त होने के बाद लंबित लाभार्थियों के खातों में निर्धारित सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। ऐसे में 231 लाभार्थियों को अब अगले बजट की किस्त का इंतजार है।
पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रस्ताव आने के बाद नियमानुसार लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जिले में 348 लाभार्थियों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 117 लाभार्थियों के खातों में करीब 1.30 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी जा चुकी है। शेष लाभार्थियों को बजट उपलब्ध होने के बाद भुगतान किया जाएगा।
- विपिन कुमार यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विभिन्न प्रकार के मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। सामान्य प्रकृति के मामलों में एक लाभार्थी को करीब 75 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। वहीं गंभीर मामलों में सहायता राशि बढ़ जाती है। हत्या जैसे मामलों में पीड़ित परिवार को अधिकतम 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। मामले की प्रकृति और शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सहायता राशि अलग-अलग होती है।
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पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजा जाता है प्रस्ताव
जिला समाज कल्याण विभाग के अनुसार, आर्थिक सहायता के लिए लाभार्थियों के चयन और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जाती है। संबंधित मामले में पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रस्ताव जिला समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद पात्रता और आवश्यक अभिलेखों की जांच समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। इसके बाद उपलब्ध बजट के अनुसार लाभार्थी को सहायता राशि का भुगतान किया जाता है।
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231 लाभार्थियों को अगले बजट की किस्त का इंतजार
विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना के लिए धनराशि एक साथ नहीं, बल्कि किस्तों में उपलब्ध कराई जाती है। इस कारण स्वीकृत मामलों में भी सभी लाभार्थियों को एक साथ भुगतान नहीं हो पाता है। बजट प्राप्त होने के बाद लंबित लाभार्थियों के खातों में निर्धारित सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। ऐसे में 231 लाभार्थियों को अब अगले बजट की किस्त का इंतजार है।
पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रस्ताव आने के बाद नियमानुसार लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जिले में 348 लाभार्थियों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 117 लाभार्थियों के खातों में करीब 1.30 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी जा चुकी है। शेष लाभार्थियों को बजट उपलब्ध होने के बाद भुगतान किया जाएगा।
- विपिन कुमार यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी