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Maharajganj News: वसूली के लिए दुकान पर आकर घंटों पर बैठते थे एजेंट
Mon, 02 Jun 2025 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 02 Jun 2025 12:48 AM IST
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महराजगंज। शहर में सुभाष नगर मोहल्ले में आनंद पटवा की मौत ने सबको झकझोर कर दिया है। अगल-अलग तीन कंपनियों ने मिस्त्री ने कर्ज लिया था। वसूली करने वाले एजेंट प्रत्येक दिन दुकान पर आकर घंटों बैठे रहते थे।
रकम की मांग करते थे। रकम नहीं मिलने पर खरीखाेटी सुनाकर चले जाते थे। माली हालत ठीक नहीं होने से रकम जमा नहीं हो पा रही थी। जानकारी के अनुसार, आनंद पटवा 55 निवासी सुभाष नगर के रहने वाले थे। इनको एक बेटा हिमांशु 13 और बड़ी पिंकी 19 व छोटी प्रतिमा 17 है।
पत्नी माया देवी ने बताया कि मोहल्ले में ही किराए पर दुकान लेकर पति काम करते थे। घर की जरूरतों को पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ा। करीब एक साल पहले तीन माइक्रो फाइनेंस कंपनी से चार लाख रुपये कर्ज लिया गया। दो चार महीने तो कोई परेशानी नहीं हुई।
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रकम से घर बनवाने के साथ ही अन्य कार्यों को पूरा कराया गया। करीब छह माह से लगातार वसूली करने वाले एजेंंट दुकान पर आकर अपमानित करते थे। दुकान से जो आमदनी हो रही थी। वह घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई लिखाई में खर्च हो जा रही थी।
एजेंटों का दबाव बढ़ा तो वह तनाव में आ गए थे। बीते एक सप्ताह से वह कुछ बात नहीं करते थे। अब तो कर्ज का दबाव और घर गृहस्थी की चिंता सता रही है। इन सभी बातों का जिक्र करते हुए माया देवी फफक पड़ी। वह रोते राेते बेहोश हो जा रहीं थी।
बेटी पिंकी पटवा कक्षा 12 व छोटी बेटी प्रतिमा पटवा कक्षा 10 में पढ़ती हैं। बेटा हिमांशु 13 कक्षा आठ में पढ़ता हैं। भोर में पापा घर से चार बजे निकले थे : बेटी पिंकी ने बताया कि रविवार को भोर में पापा घर से चार बजे निकले थे। कहे थे कि चाय पीने जा रहा हूं।
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रकम की मांग करते थे। रकम नहीं मिलने पर खरीखाेटी सुनाकर चले जाते थे। माली हालत ठीक नहीं होने से रकम जमा नहीं हो पा रही थी। जानकारी के अनुसार, आनंद पटवा 55 निवासी सुभाष नगर के रहने वाले थे। इनको एक बेटा हिमांशु 13 और बड़ी पिंकी 19 व छोटी प्रतिमा 17 है।
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पत्नी माया देवी ने बताया कि मोहल्ले में ही किराए पर दुकान लेकर पति काम करते थे। घर की जरूरतों को पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ा। करीब एक साल पहले तीन माइक्रो फाइनेंस कंपनी से चार लाख रुपये कर्ज लिया गया। दो चार महीने तो कोई परेशानी नहीं हुई।
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रकम से घर बनवाने के साथ ही अन्य कार्यों को पूरा कराया गया। करीब छह माह से लगातार वसूली करने वाले एजेंंट दुकान पर आकर अपमानित करते थे। दुकान से जो आमदनी हो रही थी। वह घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई लिखाई में खर्च हो जा रही थी।
एजेंटों का दबाव बढ़ा तो वह तनाव में आ गए थे। बीते एक सप्ताह से वह कुछ बात नहीं करते थे। अब तो कर्ज का दबाव और घर गृहस्थी की चिंता सता रही है। इन सभी बातों का जिक्र करते हुए माया देवी फफक पड़ी। वह रोते राेते बेहोश हो जा रहीं थी।
बेटी पिंकी पटवा कक्षा 12 व छोटी बेटी प्रतिमा पटवा कक्षा 10 में पढ़ती हैं। बेटा हिमांशु 13 कक्षा आठ में पढ़ता हैं। भोर में पापा घर से चार बजे निकले थे : बेटी पिंकी ने बताया कि रविवार को भोर में पापा घर से चार बजे निकले थे। कहे थे कि चाय पीने जा रहा हूं।