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महराजगंज के लिए :: 46 साल बाद हत्या के दो दोषियों को मिली उम्रकैद
Wed, 15 May 2024 03:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 15 May 2024 03:28 AM IST
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-महराजगंज में 1978 में भाला व डंडे से हमलाकर युवक की कर दी थी हत्या
-ट्रायल कोर्ट ने सात में से पांच को दोषी ठहराते हुए दो को बरी कर दिया था
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 46 साल बाद हत्या के दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कहा, अभियोजन पक्ष के सबूतों की ट्रायल कोर्ट ने सही से जांच नहीं की। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति शिवशंकर प्रसाद की कोर्ट ने दिया है।
वर्ष 1978 में गोरखपुर के पुलिस स्टेशन घुघुली (अब महाराजगंज जिला) के नेबुइया टोला दुसाधी बारी गांव में एक वारदात हुई। आरोपी अयोध्या व उसके साथी प्यारे सिंह, छोटकू, रामजीत, लखन, सान्हू और छांगुर ने लाठी-भाला लेकर गंगा नाम के युवक से भिड़ गए। गंगा पर आरोप लगाया कि उसने अयोध्या की बहन को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। इसी से नाराज होकर गंगा की लाठी-डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद अयोध्या पकड़ा गया और अन्य आरोपी भाग गए। आरोपियों में अयोध्या, छोटकू, प्यारे, रामजी, सान्हू, लखन और छांगुर पर मुकदमा दर्ज किया गया। ट्रायल कोर्ट ने अयोध्या, रामजी, सान्हू, लखन, छांगुर को हत्या का दोषी ठहराया। वहीं, संदेह का लाभ देते हुए छोटकू और प्यारे को बरी कर दिया था।
सरकार की ओर से दो आरोपियों के बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। वहीं, दोषियों ने भी ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर की। दोनों अपीलों पर एक साथ सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया। प्यारे सिंह व छोटकू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गोरखपुर यह सुनिश्चित करेंगे कि दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया जाए और सजा काटने के लिए जेल भेज दिया जाए। साथ ट्रायल कोर्ट से सजा पाए अन्य पांच की सजा बरकरार रखी। अपीलकर्ता अयोध्या, रामजी, लखन व सान्हू की मृत्यु हो चुकी है।
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-ट्रायल कोर्ट ने सात में से पांच को दोषी ठहराते हुए दो को बरी कर दिया था
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 46 साल बाद हत्या के दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कहा, अभियोजन पक्ष के सबूतों की ट्रायल कोर्ट ने सही से जांच नहीं की। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति शिवशंकर प्रसाद की कोर्ट ने दिया है।
वर्ष 1978 में गोरखपुर के पुलिस स्टेशन घुघुली (अब महाराजगंज जिला) के नेबुइया टोला दुसाधी बारी गांव में एक वारदात हुई। आरोपी अयोध्या व उसके साथी प्यारे सिंह, छोटकू, रामजीत, लखन, सान्हू और छांगुर ने लाठी-भाला लेकर गंगा नाम के युवक से भिड़ गए। गंगा पर आरोप लगाया कि उसने अयोध्या की बहन को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। इसी से नाराज होकर गंगा की लाठी-डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद अयोध्या पकड़ा गया और अन्य आरोपी भाग गए। आरोपियों में अयोध्या, छोटकू, प्यारे, रामजी, सान्हू, लखन और छांगुर पर मुकदमा दर्ज किया गया। ट्रायल कोर्ट ने अयोध्या, रामजी, सान्हू, लखन, छांगुर को हत्या का दोषी ठहराया। वहीं, संदेह का लाभ देते हुए छोटकू और प्यारे को बरी कर दिया था।
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सरकार की ओर से दो आरोपियों के बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। वहीं, दोषियों ने भी ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर की। दोनों अपीलों पर एक साथ सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया। प्यारे सिंह व छोटकू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गोरखपुर यह सुनिश्चित करेंगे कि दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया जाए और सजा काटने के लिए जेल भेज दिया जाए। साथ ट्रायल कोर्ट से सजा पाए अन्य पांच की सजा बरकरार रखी। अपीलकर्ता अयोध्या, रामजी, लखन व सान्हू की मृत्यु हो चुकी है।
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