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Maharajganj News: आइसक्रीम में भी मिलावट, गर्मी से राहत की बजाय बिगड़ जाएगी सेहत

Mon, 22 Jun 2026 02:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 22 Jun 2026 02:22 AM IST
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Adulteration in ice cream too; instead of relief from the heat, it will harm your health.
गर्मी के सीजन में बड़ी आइसक्रीम की डिमांड मिलावट खोरी सेहत के लिए मुसीबत
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रंग लाने के लिए केमिकल का प्रयोग, दूध के बजाय पाउडर का इस्तेमाल
स्थानीय उत्पादन के साथ बाहर से भी बड़ी मात्रा में आती है आइसक्रीम
सिद्धार्थनगर। दूध के बजाय पाउडर, चमकीला और आकर्षक बनाने के लिए रंगों और केमिकल का इस्तेमाल। इन दिनों बाजार में बिक रही लोकल आइसक्रीम में कुछ ऐसी ही मिलावट की जा रही है। यह हकीकत सामने आई है खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग में लिए गए आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक के 22 नमूनों की जांच में, जिसमें तीन आइसक्रीम के नमूने फेल होने के साथ यह खामियां भी पाई गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं और बिना जांचे-परखे बिना इनके इस्तेमाल से बचने की सलाह दे रहे हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ ही आइसक्रीम का कारोबार शुरू हो जाता है। गांव से शहर तक इसकी बिक्री होने लगती है। कुछ स्थानीय स्तर पर बनाया जाता है जबकि कुछ बाहर से बिक्री के लिए आता है। गर्मी चरम पर है और उससे राहत पाने के लिए अगर खुद या फिर बच्चों को आइसक्रीम खिला रहे हैं। शुद्ध मानकर खाई जा रही यह आइसक्रीम बीमारियों को बुलाने की बड़ी वजह बन रही है। इससे न सिर्फ आपको जुकाम और खांसी की समस्या हो सकती है बल्कि पेट की गंभीर बीमारी भी चपेट में ले रही है। यह शरीर के पूरे सिस्टम को भी कमजोर कर रहा है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में लगभग 40 के आसपास आइसक्रीम बनाने वाली फैक्टरी संचालित की जा रहीं हैं। यहां से बनने वाली आइसक्रीम गांव के साथ ही शहर तक बिक्री के लिए जाती है। इसके साथ ही शादी और अन्य पार्टी के लिए भी बुकिंग होती है। इस्तेमाल की जाने वाले यह आइसक्रीम कितनी शुद्ध हैं, इससे शायद खाने वाले अनजान हैं। आइसक्रीम की मांग बढ़ने का फायदा उठाकर धंधेबाजों ने यहां भी सेंधमारी कर ली है। पिछले दिनों हुई सैंपलिंग में तीन नमूना जांच में मानक के अनुरूप नहीं पाया गया है। इसमें रंग के लिए केमिकल और दूध के बजाय अरारोट का पाउडर मिलाने की बात सामने आई है। इसके अलावा मिस ब्रांड के मामले भी पाए गए हैं। गर्मी में होने वाले करोड़ों रुपये के इस कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कारण जांच का उतना बड़ा तंत्र नहीं है जो हर कारोबार करने वाले को टच कर सके और जांच करे।
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पाम ऑयल और डिटर्जेंट का इस्तेमाल
खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि आइसक्रीम में आकर्षक रंग के लिए फूड ग्रेड सिंथेटिक रंगों जैसे टार्ट्राजिन (पीला), पोंसियू फोर आर (लाल) या कैरामेल का उपयोग किया जाता है। दूध की जगह आइसक्रीम को क्रीमी और गाढ़ा बनाने के लिए मुख्य रूप से मिल्क पाउडर और कस्टर्ड पाउडर मिलाया जाता है। जबकि इन दिनों कम लागत की आइसक्रीम को तैयार करने के लिए धंधेबाज खतरनाक केमिकल और रंगों की मिलावट कर रहे हैं। मलाईदार बनाने के लिए मिल्क पाउडर और मक्के के स्टार्च का उपयोग किया जाता है। वहीं, असली दूध के फैट की जगह सस्ते पाम ऑयल या हाइड्रोजनयुक्त तेलों को डिटर्जेंट के साथ मिलाकर गाढ़ा बेस तैयार किया जा रहा है। आइसक्रीम में बर्फ न जमे और झाग बने रहे, इसके लिए वॉशिंग पाउडर (डिटर्जेंट) और यूरिया जैसे हानिकारक रसायनों का प्रयोग करने से भी धंधेबाज बाज नहीं आ रहे हैं। रंगों की बात करें तो सिंथेटिक डाई और नॉन-फूड कलर्स यानी कई बार कपड़ों या चमड़े पर इस्तेमाल होने वाले जहरीले रंगों का उपयोग भी अवैध रूप से किया जा रहा है। इन केमिकल वाली आइसक्रीम के नियमित सेवन से पाचन तंत्र खराब होना, लीवर-किडनी को नुकसान, और बच्चों में हाइपर एक्टिविटी जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

ऐसे तैयार हो रही आइसक्रीम
कारोबार से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि सफेद चमक लाने के लिए आइसक्रीम में वाॅशिंग पाउडर मिलाया जाता है। शहर से लेकर गांव के चौराहों तक सस्ती आइसक्रीम बिक रही है। कहीं कुल्फी और आइसक्रीम में मसाले वाली बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है तो कहीं धूप के बजाय पाउडर ज्यादा मिलाया जा रहा है जो कि सेहत के लिए ठीक नहीं है। वहीं, बच्चों को लुभाने के लिए जो बर्फ बेची जाती है, उसमें सबसे खराब क्वालिटी की गरी और कई दिनों से सड़ाने के बाद चावल मिलाया जाता है। गांव से लेकर शहर तक यह कारोबार संचालित हो रहा है। कुछ चुनिंदा दुकान और फैक्टरी को छोड़ दी जाए तो जांच नीचे लेवल तक नहीं पहुंचा पाती है। साल के आठ माह तक चलने वाले इस करोड़ों रुपये के कारोबार पर किसी की नजर नहीं पड़ती है।
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बिक्री के हिसाब से कमीशनविभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक जनपद में 40 छोटे बड़े आइसक्रीम बनाने वाले कारखाने संचालित हो हैं। जिले के पास उत्पादन से लेकर बिक्री का तक सिस्टम तैयार है। सीजन शुरू होने के साथ बाइक वाले लड़कों को तैयार करते हैं। उन्हें बिक्री के हिसाब से कमीशन पर माल देते हैं जो दिन बिक्री करते हैं और शाम को रोज का रोज हिसाब करते हैं। यह लोग मांगलिक कार्यक्रम सहित अन्य आयोजन में सीधे बुकिंग करते हैं। वहीं, डब्बा बंद आइसक्रीम बाहर से मंगवाई जाती है। नगर के एक दुकानदार ने बताया कि बिक्री के हिसाब से डिमांड की जाती है। कई बार माल गड़बड़ आ जाता है। ऐसे में संबंधित सप्लायर से शिकायत भी की जाती है।
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बर्फ के गोले असुरक्षित
ग्रामीण इलाके के बाजारों में रंगीन बर्फ के गोले की बिक्री होती है जो ग्रामीण अंचन के बच्चों को खूब भाते हैं। बर्फ किस पानी से तैयार किया गया है और वह कितना शुद्ध है, इससे वह अनजान रहते हैं। इसके साथ ही खराब क्वालिटी का रंग प्रयोग किया जाता है जो खाते समय तो पता नहीं चलता है लेकिन प्रदूषित पानी के बर्फ और प्रदूषित स्थान का होने के कारण कुछ देर बाद बच्चों में पेट में दर्द, कई बार उल्टी-दस्त जैसी शिकायत होती है लेकिन परिवार के लोग समझ नहीं पाते हैं कि यह किस कारण हो रहा है।
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बोले विशेषज्ञ
गर्मी से राहत पाने के लिए आइसक्रीम, बर्फ और बाजार में बिकने वाला बर्फ का गोला कितना शुद्ध यह किसी को पता नहीं है। खुले में बिकने वाले शीतलपेय बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। अगर रंग और वॉशिंग पाउडर जैसा कुछ मिलाने आई है तो यह खतरनाक और सेहत के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में खाने से बचने की जरूरत है। यह लिवर सहित अन्य अंग का प्रभावित करता है। इसके अधिक इस्तेमाल से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है।

डॉ. एके राव, एमडी मेडिसिन
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बोले जिम्मेदार
टीम लगातार जांच कर रही है। जांच में तीन नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। आइसक्रीम सहित अन्य खाद्य पदार्थों की जांच हो रही है। समय-समय पर आइसक्रीम की फैक्टरी की जांच की जाती है। सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है। जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर जुर्माना की कार्रवाई की जाती है।
- आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद सुरक्षा विभाग
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