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Maharajganj News: फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा अड्डा बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अड्डा बाजार में लैब टेक्नीशियन रुम के सफाई करता स्वीपर।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नौतनवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अड्डा बाजार में चिकित्सक की तैनाती न होने से लोगों को बेहतर इलाज न मिलने से मरीजों को काफी समस्या हो रही है। वे विवश होकर फार्मासिस्ट से दवा लेकर जा रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के गांव अड्डा बाजार में क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल का निर्माण कराया। इससे क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी कि यहां के लोगों को स्वास्थ्य सेवा मिलेगी, लेकिन यहां चिकित्सक न होने से अस्पताल वीरान पड़ा है। फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल चल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन तत्कालीन राज्यमंत्री संस्थागत वित्त एवं व्यापार कर ने 21 अप्रैल 2001 को किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी लक्ष्मीपुर डॉ. विपिन कुमार शुक्ला यहां भी प्रभारी हैं। यहां किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। वर्तमान में डेंटल हाईजिनिस्ट अशोक प्रताप सिंह, फार्मासिस्ट संजय वर्मा, लैब टेक्नीशियन अर्चना चौधरी, स्वीपर विष्णु प्रसाद की तैनाती है।
फार्मासिस्ट संजय वर्मा ने बताया कि चिकित्सक की तैनाती न होने से इमरजेंसी सेवा नहीं है। प्रतिदिन 20 की ओपीडी है। बुखार, पेट दर्द, गैस, उलटी, सुगर, बीपी, खुजली आदि की दवाएं मौजूद हैं। यहां दो फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाॅय, महिला चिकित्सक, फिजिसियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियो लॉजिस्ट आदि की आवश्यकता है।
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वर्ष 2001 में उद्घाटन के बाद से 23 वर्ष हो गए, लेकिन अब तक रंगाई-पुताई नहीं हुई है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। जरनेटर, इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में दो इंडिया मार्का हैंडपंप हैं, जिसमें एक खराब है, दूसरा दूषित जल देता है। परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। परिसर में घास उगी है। ऑपरेशन थियेटर के दरवाजा का शीशा टूटा है। ऑपरेशन थियेटर में सफाई नहीं है। स्ट्रेचर व एक अन्य उपकरण धूल से पटा है। अस्पताल के अंदर एक एंबुलेंस धूल फांक रही है। शौचालय खराब है। यहां रात में कोई कर्मचारी नहीं रुकता है। अस्पताल चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए बना आवास कभी खुलता नहीं है।
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नौतनवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अड्डा बाजार में चिकित्सक की तैनाती न होने से लोगों को बेहतर इलाज न मिलने से मरीजों को काफी समस्या हो रही है। वे विवश होकर फार्मासिस्ट से दवा लेकर जा रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के गांव अड्डा बाजार में क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल का निर्माण कराया। इससे क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी कि यहां के लोगों को स्वास्थ्य सेवा मिलेगी, लेकिन यहां चिकित्सक न होने से अस्पताल वीरान पड़ा है। फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल चल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन तत्कालीन राज्यमंत्री संस्थागत वित्त एवं व्यापार कर ने 21 अप्रैल 2001 को किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी लक्ष्मीपुर डॉ. विपिन कुमार शुक्ला यहां भी प्रभारी हैं। यहां किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। वर्तमान में डेंटल हाईजिनिस्ट अशोक प्रताप सिंह, फार्मासिस्ट संजय वर्मा, लैब टेक्नीशियन अर्चना चौधरी, स्वीपर विष्णु प्रसाद की तैनाती है।
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फार्मासिस्ट संजय वर्मा ने बताया कि चिकित्सक की तैनाती न होने से इमरजेंसी सेवा नहीं है। प्रतिदिन 20 की ओपीडी है। बुखार, पेट दर्द, गैस, उलटी, सुगर, बीपी, खुजली आदि की दवाएं मौजूद हैं। यहां दो फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाॅय, महिला चिकित्सक, फिजिसियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियो लॉजिस्ट आदि की आवश्यकता है।
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वर्ष 2001 में उद्घाटन के बाद से 23 वर्ष हो गए, लेकिन अब तक रंगाई-पुताई नहीं हुई है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। जरनेटर, इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में दो इंडिया मार्का हैंडपंप हैं, जिसमें एक खराब है, दूसरा दूषित जल देता है। परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। परिसर में घास उगी है। ऑपरेशन थियेटर के दरवाजा का शीशा टूटा है। ऑपरेशन थियेटर में सफाई नहीं है। स्ट्रेचर व एक अन्य उपकरण धूल से पटा है। अस्पताल के अंदर एक एंबुलेंस धूल फांक रही है। शौचालय खराब है। यहां रात में कोई कर्मचारी नहीं रुकता है। अस्पताल चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए बना आवास कभी खुलता नहीं है।