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बखिरा व रामगढ़ ताल को दिलाई जाएगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
Updated Sun, 09 Dec 2018 12:09 AM IST
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बखिरा,रामगढ़ ताल को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। बखिरा और रामगढ़ ताल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी। इसके लिए दोनों तालों को रामसर साइट पर दर्ज कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसी के साथ प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी का गठन भी किया गया है।
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि वर्ष 1971 में इरान के रामसर नामक शहर में वेटलैंड को लेकर 195 देशों का सम्मेलन हुआ था। सम्मेलन में वेटलैंड की महत्ता बताई गई थी। रामसर साइट पर अभी तक भारत के 25 तथा प्रदेश का मात्र एक वेटलैंड दर्ज हो सका है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए बीते माह 29 व 30 नवंबर को लखनऊ में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव मंजू की अध्यक्षता में प्रदेश के प्रभागीय वनाधिकारियों, कुछ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तथा एनजीओ की कार्यशाला हुई थी। इसमें प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के मुद्दे पर चर्चा की गई। वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए राज्य में उत्तर प्रदेश वेटलैंड अथारिटी गठित होने की भी बात बताई गई। साथ ही सूबे के सभी वेटलैंड का अध्ययन एवं चिह्नांकन कराने के मुद्दे पर भी विचार विमर्श किया गया।
डीएफओ ने बताया कि प्रदेश में ढाई लाख से अधिक वेटलैंड हैं। जिसमें से 95 हजार वेटलैंड ढाई हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल वाले तथा अन्य ढाई हेक्टेअर से कम क्षेत्रफल के हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के वेटलैंड पर कई तरह के खतरे हैं। मसलन, अवैध कब्जा, खेती के लिए पट्टा, वेटलैंड का भराव व पटान आदि खतरे प्रमुख हैं। पानी का बहाव एक ताल से दूसरे ताल के बीच बना रहता है, ऐसे में तालों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंदर सिगरहना, हरिहरपुर, बखिरा, श्रीनगर, सरूआ सहित करीब 32 वेटलैंड हैं। ऐसे सभी वैटलैंड का अध्ययन तथा चिह्नांकन करने की कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर सभी वेटलैंड के चिह्नीकरण के साथ उसके क्षेत्रफल का ब्योरा तैयार किया जाएगा। इस कार्य में राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ स्थानीय राजस्व कर्मियों की मदद ली जाएगी। वेटलैंड चिह्नीकरण की प्रक्रिया जल्द ही शुुरू करा दी जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। बखिरा और रामगढ़ ताल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी। इसके लिए दोनों तालों को रामसर साइट पर दर्ज कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसी के साथ प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी का गठन भी किया गया है।
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि वर्ष 1971 में इरान के रामसर नामक शहर में वेटलैंड को लेकर 195 देशों का सम्मेलन हुआ था। सम्मेलन में वेटलैंड की महत्ता बताई गई थी। रामसर साइट पर अभी तक भारत के 25 तथा प्रदेश का मात्र एक वेटलैंड दर्ज हो सका है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए बीते माह 29 व 30 नवंबर को लखनऊ में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव मंजू की अध्यक्षता में प्रदेश के प्रभागीय वनाधिकारियों, कुछ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तथा एनजीओ की कार्यशाला हुई थी। इसमें प्रदेश के सभी वेटलैंड को संरक्षित करने के मुद्दे पर चर्चा की गई। वेटलैंड को संरक्षित करने के लिए राज्य में उत्तर प्रदेश वेटलैंड अथारिटी गठित होने की भी बात बताई गई। साथ ही सूबे के सभी वेटलैंड का अध्ययन एवं चिह्नांकन कराने के मुद्दे पर भी विचार विमर्श किया गया।
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डीएफओ ने बताया कि प्रदेश में ढाई लाख से अधिक वेटलैंड हैं। जिसमें से 95 हजार वेटलैंड ढाई हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल वाले तथा अन्य ढाई हेक्टेअर से कम क्षेत्रफल के हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के वेटलैंड पर कई तरह के खतरे हैं। मसलन, अवैध कब्जा, खेती के लिए पट्टा, वेटलैंड का भराव व पटान आदि खतरे प्रमुख हैं। पानी का बहाव एक ताल से दूसरे ताल के बीच बना रहता है, ऐसे में तालों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंदर सिगरहना, हरिहरपुर, बखिरा, श्रीनगर, सरूआ सहित करीब 32 वेटलैंड हैं। ऐसे सभी वैटलैंड का अध्ययन तथा चिह्नांकन करने की कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर सभी वेटलैंड के चिह्नीकरण के साथ उसके क्षेत्रफल का ब्योरा तैयार किया जाएगा। इस कार्य में राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ स्थानीय राजस्व कर्मियों की मदद ली जाएगी। वेटलैंड चिह्नीकरण की प्रक्रिया जल्द ही शुुरू करा दी जाएगी।
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