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Maharajganj News: एसएनसीयू मेंे 32 बेड पर 45 नवजात भर्ती
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में क्षमता से अधिक नवजात बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वार्ड की क्षमता 32 बेड की है, लेकिन इसमें 45 बच्चों का उपचार चल रहा है। एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। पहले यह वार्ड 26 बेड का था, लेकिन अब 32 होने के बाद भी समस्या दूर नहीं हो रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.विशाल चौधरी बताते हैं कि सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम, पीलिया, सांस फूलने की समस्या हो। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। तीमारदारों का कहना है कि निजी अस्पतालों में यह सुविधा महंगी है। अस्पताल में इस सुविधा का कोई शुल्क नहीं है। थोड़ी परेशानी है तो क्या किया जाएगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन बरामदे में बैठे रहते हैं। गर्मी में उनको भी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं। अधिक बच्चों को भर्ती होने के कारण इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि वार्ड में भर्ती बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम समय समय पर निगरानी करती है। भर्ती बच्चों को स्वस्थ होने की दर अधिक है। बेहतर इलाज की सुविधा मिलने से भीड़ बढ़ जा रही है।
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महराजगंज। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में क्षमता से अधिक नवजात बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वार्ड की क्षमता 32 बेड की है, लेकिन इसमें 45 बच्चों का उपचार चल रहा है। एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। पहले यह वार्ड 26 बेड का था, लेकिन अब 32 होने के बाद भी समस्या दूर नहीं हो रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.विशाल चौधरी बताते हैं कि सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम, पीलिया, सांस फूलने की समस्या हो। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। तीमारदारों का कहना है कि निजी अस्पतालों में यह सुविधा महंगी है। अस्पताल में इस सुविधा का कोई शुल्क नहीं है। थोड़ी परेशानी है तो क्या किया जाएगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन बरामदे में बैठे रहते हैं। गर्मी में उनको भी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं। अधिक बच्चों को भर्ती होने के कारण इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि वार्ड में भर्ती बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम समय समय पर निगरानी करती है। भर्ती बच्चों को स्वस्थ होने की दर अधिक है। बेहतर इलाज की सुविधा मिलने से भीड़ बढ़ जा रही है।
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