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Maharajganj News: एसएनसीयू में 26 बेड पर 32 नवजात
Fri, 30 May 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 30 May 2025 12:50 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल में बने नवजात शिशु देखभाल इकाई में 26 बेड पर 32 नवजात शिशु भर्ती हैं। अधिकांश बच्चे समय से पहले जन्म लेने वाले हैं।
इस वार्ड में बीते 15 दिनों से क्षमता से अधिक बच्चे हैं। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनका जन्म के समय वजन कम है अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। रोजाना आठ-10 नवजात इलाज के लिए आ रहे हैं। तीमारदारों का कहना है कि बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है तो थोड़ी परेशानी सहन करनी पड़ेगी।
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तीमारदार नरेश ने बताया कि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मुफ्त में मिलती है। बाहर बच्चों को भर्ती करने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी। गरीब आदमी के लिए ज्यादा रकम खर्च कर पाना संभव नहीं है।
बेहतर ढंग से इलाज की सुविधा मिलने से भीड़ हो जाती है। वहीं, सुमित्रा देवी कहती हैं कि चार दिन से उनका पोता भर्ती है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है। डॉक्टर समय समय पर आकर देखभाल करते हैं। सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से काम करने का प्रयास जारी है। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
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इस वार्ड में बीते 15 दिनों से क्षमता से अधिक बच्चे हैं। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनका जन्म के समय वजन कम है अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। रोजाना आठ-10 नवजात इलाज के लिए आ रहे हैं। तीमारदारों का कहना है कि बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है तो थोड़ी परेशानी सहन करनी पड़ेगी।
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तीमारदार नरेश ने बताया कि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मुफ्त में मिलती है। बाहर बच्चों को भर्ती करने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी। गरीब आदमी के लिए ज्यादा रकम खर्च कर पाना संभव नहीं है।
बेहतर ढंग से इलाज की सुविधा मिलने से भीड़ हो जाती है। वहीं, सुमित्रा देवी कहती हैं कि चार दिन से उनका पोता भर्ती है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है। डॉक्टर समय समय पर आकर देखभाल करते हैं। सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से काम करने का प्रयास जारी है। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।