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बाबुओं की लालफीताशाही होगी खत्म
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:05 PM IST
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मनरेगा
- फोटो : amar ujala
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महराजगंज। मनरेगा के तहत होने वाले विकास कार्यों की फाइलों को अब सरकारी दफ्तरों के बाबू नहीं लटका सकेंगे, क्योंकि शासन मनरेगा के कामों के लिए सेक्योर नाम का विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया है। नतीजतन अब इस्टीमेट इसी सॉफ्टवेयर में कंप्यूटर पर तैयार किया जाएगा और वित्तीय स्वीकृति भी इसी साफ्टवेयर के जरिए जारी की जाएगी। एक अप्रैल 2018 से लागू होने जा रही इस व्यवस्था के लिए मार्च में ही संबंधित कर्मचारियों - अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मनरेगा के तहत बनने वाले प्राकलन इस्टीमेट ब्लॉक मुख्यालयों से गायब हो जाते थे या फिर प्रशासनिक वित्तीय संस्तुति के लिए अधिकारियों की टेबल पर महीनों पड़े रहते थे। इससे एक ओर तो कार्य बाधित होता था और दूसरी ओर कागजों को खोजना भी मुश्किल हो जाता था। इस समस्या को दूर करने के लिए सेक्योर सॉफ्टवेयर के माध्यम से योजना का प्राकलन बनाया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन अधिकारी इसे प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृत भी देंगे। इससे समय से प्राकलन पास हो जाएंगे। इस नई व्यवस्था से पेपर के खोने की समस्या से निजात मिलेगी। प्राकलन ब्लॉक मुख्यालयों पर तैनात जेई और टीए तैयार करेंगे। संबंधित कर्मचारियों को जिलास्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मनरेगा के तहत बनने वाले प्राकलन इस्टीमेट ब्लॉक मुख्यालयों से गायब हो जाते थे या फिर प्रशासनिक वित्तीय संस्तुति के लिए अधिकारियों की टेबल पर महीनों पड़े रहते थे। इससे एक ओर तो कार्य बाधित होता था और दूसरी ओर कागजों को खोजना भी मुश्किल हो जाता था। इस समस्या को दूर करने के लिए सेक्योर सॉफ्टवेयर के माध्यम से योजना का प्राकलन बनाया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन अधिकारी इसे प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृत भी देंगे। इससे समय से प्राकलन पास हो जाएंगे। इस नई व्यवस्था से पेपर के खोने की समस्या से निजात मिलेगी। प्राकलन ब्लॉक मुख्यालयों पर तैनात जेई और टीए तैयार करेंगे। संबंधित कर्मचारियों को जिलास्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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