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संविधान के अनुरूप व्यवहार एवं आचरण करने का आह्वान
Updated Sun, 26 Nov 2017 06:34 PM IST
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महराजगंज। संविधान दिवस के अवसर पर रविवार को प्रभारी जनपद न्यायाधीश संजय कुमार डे की अध्यक्षता में दीवानी न्यायालय के एडीआर भवन के सभागार में गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें जनपद न्यायाधीश ने संविधान दिवस 26 नवंबर 1949 के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गोष्ठी में मौजूद अधिवक्ताओं व कर्मचारियों से संविधान के अनुरूप व्यवहार एवं आचरण करने की अपील की।
इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय डॉ. बाल मुकुंद ने संविधान निर्माण से लेकर उसे अंगीकृत किए जाने तक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान को सभी अन्य देशों के मुकाबले विशिष्ट संविधान माना गया है। अपर जनपद न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय ललित नारायण झा ने संविधान दिवस पर प्रकाश डालते हुए न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में मदद करने की अपील की। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राम किशोर ने कहा कि संविधान के अनुरूप सभी को कार्य करना चाहिए। अधिवक्ता स्वामीनाथ तिवारी ने संविधान के अनुरूप मूल कर्तव्यों के पालन पर जोर दिया। अधिवक्ता राजेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि पूरे संविधान को समझाने के लिए प्रस्तावना को समझ लेना ही पर्याप्त है। देश के सभी नागरिक जब तक संविधान के अनुरूप आचरण नहीं करेंगे, तब तक संविधान के वास्तविक उद्देश्य प्राप्त नहीं कर सकते। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सर्वजीत कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 26 नवंबर 1949 को संविधान बना और 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। इसी भारत को विश्व में नए गणराज्य के रूप में संवैधानिक मान्यता मिली। तभी से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। सिविल जज अवर खंड त्वरित न्यायालय शीलवंत ने संविधान दिवस की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस दौरान प्रमोद कुमार त्रिपाठी, सिद्धार्थ शरण, राकेश कुमार मणि, रवि प्रताप पटेल, राजेश पांडेय, अतुल कुमार श्रीवास्तव, प्रेमचंद्र वर्मा, अनिल कुमार शुक्ला, राजेश कुमार यादव, अजय कुमार, दीपक, बलराम पटेल, सुनील कुमार, घनश्याम पांडेय, दिग्विजय कुमार, दुर्गेश कुमार, संतोष कुमार, मो. असलम, संतोष कुमार, बलराम चंद पटेल, शहजादी, भवानी प्रसाद, गौरव शुक्ला, गिरीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय डॉ. बाल मुकुंद ने संविधान निर्माण से लेकर उसे अंगीकृत किए जाने तक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान को सभी अन्य देशों के मुकाबले विशिष्ट संविधान माना गया है। अपर जनपद न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय ललित नारायण झा ने संविधान दिवस पर प्रकाश डालते हुए न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में मदद करने की अपील की। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राम किशोर ने कहा कि संविधान के अनुरूप सभी को कार्य करना चाहिए। अधिवक्ता स्वामीनाथ तिवारी ने संविधान के अनुरूप मूल कर्तव्यों के पालन पर जोर दिया। अधिवक्ता राजेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि पूरे संविधान को समझाने के लिए प्रस्तावना को समझ लेना ही पर्याप्त है। देश के सभी नागरिक जब तक संविधान के अनुरूप आचरण नहीं करेंगे, तब तक संविधान के वास्तविक उद्देश्य प्राप्त नहीं कर सकते। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सर्वजीत कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 26 नवंबर 1949 को संविधान बना और 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। इसी भारत को विश्व में नए गणराज्य के रूप में संवैधानिक मान्यता मिली। तभी से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। सिविल जज अवर खंड त्वरित न्यायालय शीलवंत ने संविधान दिवस की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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इस दौरान प्रमोद कुमार त्रिपाठी, सिद्धार्थ शरण, राकेश कुमार मणि, रवि प्रताप पटेल, राजेश पांडेय, अतुल कुमार श्रीवास्तव, प्रेमचंद्र वर्मा, अनिल कुमार शुक्ला, राजेश कुमार यादव, अजय कुमार, दीपक, बलराम पटेल, सुनील कुमार, घनश्याम पांडेय, दिग्विजय कुमार, दुर्गेश कुमार, संतोष कुमार, मो. असलम, संतोष कुमार, बलराम चंद पटेल, शहजादी, भवानी प्रसाद, गौरव शुक्ला, गिरीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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