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लोगों को जागरूक कर करेंगे जेइ-एईस पर नियंत्रण
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लोगों को जागरूक कर करेंगे जेइ-एईस पर नियंत्रण
इससे प्रभावित 88 गांवों पर है स्वास्थ्य विभाग की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करके जेइ-एईएस पर नियंत्रण करेगा। विभाग जेई-एईएस से प्रभावित 88 गांवों में विशेष अभियान चला रहा है। बीते साल चले दस्तक एवं जागरूकता अभियान का ही परिणाम था कि दिमागी बुखार के 250 मरीज भर्ती कराए गए, जिसमें से मात्र दस प्रतिशत मरीजों की मौत हुई, जबकि एक भी मरीज विकलांगता का शिकार नहीं होने पाया।
स्वास्थ्य विभाग ने 2018 की तुलना में एई-जेईएस प्रभावित मरीजों और इससे हुई मृत्यु के आंकड़े को कम करने के लिए अभी से अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के तहत ग्राम प्रधानों से विशेष सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में जेई-एईएस से प्रभावित कुल 88 गांव चिह्नित हैं। इनमें से 44 अति संवेदनशील और 44 संवेदनशील गांव हैं। इन गांवों में विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का दौरा शुरू हो गया है। अति संवेदनशील गांव श्यामदेउरवा, बांसपार बैजौली व करमहा का दौरा कर लोगों को जागरूक जा रहा है। जिले में जेई-एईएस से प्रभावित 88 गांव हैं। इनमें करमहा, बागापार, बरवा कला, बिरवा बनकटा, नेता सुरहुरवा, बड़हरा मीर, खुटहा, सिसवा, धानी, बैदौली, कोल्हुई, चौक, निचलौल, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर देऊरवा, बांसपार बैजौली, चेहरी, हरपुर, मंगलपुर, नंदना, नौतनवां, बड़हरा, कांध, कोटा मुकुंदपुर, नटवा, पनेवा पनेई, परागपुर, पनियरा, सोहरौना तिवारी, बलुआ, सियरहीभार, तरकुलवा, चिउटहा, परसिया, बड़गो, बरवा राजा, बेलभरिया, बजही, श्यामदेऊरवा, जोगियाबारी तथा मुड़ेरी गांव को अतिसंवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है।
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इससे प्रभावित 88 गांवों पर है स्वास्थ्य विभाग की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करके जेइ-एईएस पर नियंत्रण करेगा। विभाग जेई-एईएस से प्रभावित 88 गांवों में विशेष अभियान चला रहा है। बीते साल चले दस्तक एवं जागरूकता अभियान का ही परिणाम था कि दिमागी बुखार के 250 मरीज भर्ती कराए गए, जिसमें से मात्र दस प्रतिशत मरीजों की मौत हुई, जबकि एक भी मरीज विकलांगता का शिकार नहीं होने पाया।
स्वास्थ्य विभाग ने 2018 की तुलना में एई-जेईएस प्रभावित मरीजों और इससे हुई मृत्यु के आंकड़े को कम करने के लिए अभी से अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के तहत ग्राम प्रधानों से विशेष सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में जेई-एईएस से प्रभावित कुल 88 गांव चिह्नित हैं। इनमें से 44 अति संवेदनशील और 44 संवेदनशील गांव हैं। इन गांवों में विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का दौरा शुरू हो गया है। अति संवेदनशील गांव श्यामदेउरवा, बांसपार बैजौली व करमहा का दौरा कर लोगों को जागरूक जा रहा है। जिले में जेई-एईएस से प्रभावित 88 गांव हैं। इनमें करमहा, बागापार, बरवा कला, बिरवा बनकटा, नेता सुरहुरवा, बड़हरा मीर, खुटहा, सिसवा, धानी, बैदौली, कोल्हुई, चौक, निचलौल, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर देऊरवा, बांसपार बैजौली, चेहरी, हरपुर, मंगलपुर, नंदना, नौतनवां, बड़हरा, कांध, कोटा मुकुंदपुर, नटवा, पनेवा पनेई, परागपुर, पनियरा, सोहरौना तिवारी, बलुआ, सियरहीभार, तरकुलवा, चिउटहा, परसिया, बड़गो, बरवा राजा, बेलभरिया, बजही, श्यामदेऊरवा, जोगियाबारी तथा मुड़ेरी गांव को अतिसंवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है।
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